Sun. Oct 20th, 2019

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला की प्राथमिकता : बुजुर्ग अधिवक्ताओं को पेंशन का लाभ दिलायेंगे

लखनऊ बार एसोसिएशन के चुनाव में दिखेगा कुर्सी के वर्चस्व को तोड़ने का जंग

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला की प्राथमिकता :

1- अधिवक्ताओं को फ्री ऑफ कास्ट चैंबर दिलाना

2- जायज अधिवक्ताओं की समस्याओं को दूर कराना

3- अधिवक्ता फोरम बनाने की लंबित योजना को बहाल कराना

4-लंबे समय से एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कुर्सी पर काबिज लोगों का वर्चस्व तोडऩा

5-चुनाव जीतने के बाद प्रत्याशी समस्याओं का दूर करने के बजाए,विवाद के मामलों को निपटाने लगते हैं

संजय पुरबिया

लखनऊ। लखनऊ बार एसोसिएशन के चुनाव में इस बार अधिवक्ताओं के बीच विचारों का द्वंद देखने को मिलेगा। कई वर्षों से लखनऊ बार एसोसिएशन में पद की लालसा रखने और कुर्सी की चाहत रखने वालों की कुर्सी इस बार खतरे में पड़ सकती है। कुर्सी के वर्चस्व को तोडऩे की ललक भी देखने को भी मिलेगा। जहां तक बात वकीलों की समस्याओं की है तो उसे दूर करने का नारा तो सभी लगा रहे हैं लेकिन क्या इस बार जो जीतेंगे इस पर अमल करेंगे ? इसी तरह वकीलों की समस्याओं और चुनावी वायदों को लेकर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला से खास बातचीत हुयी। ये वही धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला हैं जो वर्ष 2006 में बार एसोसिएशन के मंत्री थे। पेश है बातचीत के मुख्य अंश …


लखनऊ बार एसोसिएशन के चुनाव में लुभावने नारों के बीच आप किन मुददों को लेकर वकीलों के बीच जा रहे हैं ?

इस पर अध्यक्ष प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला ने पूरी बेबाकी से कहा कि देखिए , वर्ष 2006 में जब मैं लखनऊ बार एसोसिएशन का मंत्री था,उस दौरान मैंने वकीलों के लिए फ्री ऑफ कास्ट 50 चेंबर का निर्माण कराया था। साथ ही अधिवक्ताओं की जायज समस्याओं के लिए संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि इस बार दो वर्ष बाद चुनाव हो रहा है जबकि नियमत:एक वर्ष के उपरांत चुनाव होने चाहिए।

आखिर इतने लंबे अंतरात के बाद आप अध्यक्ष पद पर चुनावी दंगल लडऩे क्यों उतरे ?

श्री शुक्ला ने कहा कि मेरे कार्यकाल में जो अधूरे काम रह गए थे,वे आज भी लंबित हैं। स्थितियां बिल्कुल बिगड़ गयी है। बार एसोसिएशन की कुर्सी पर एक ही लोग कई वर्षों से डटे हैं। जो प्रत्याशी चुनाव हार जाते हैं,वे दूसरे पदों के लिए किस्मत आजमाने लगते हैं।

आप कहना क्या चाहते हैं…। कुर्सी की ताकत या धन की माया… जिसकी वजह से लोग बार-बार किस्मत आजमाते रहते हैं ?

इस पर अध्यक्ष पद प्रत्याशी धमेन्द्र कुमार शुक्ला ने कहा इतने लंबे अंतरात के बाद इसीलिए चुनाव लड़ रहा हूं कि बार एसोसिएशन के चुनाव में एकाधिकार का वर्चस्व को तोड़ सकूं। चुनाव में युवाओं को मौका देना चाहिए लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा। यहां जीते हुए प्रत्याशियों को मैन पॉवर चाहिए,वो तभी संभव है जब वे चुनाव में जीतकर कुर्सी तक पहुंचे। इनलोगों को अधिवक्ताओं की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं। इन्हें बस सौदेबाजी,प्रापर्टी डीलिंग या फिर किसी विवाद को निपटाने में रूचि रहती है क्योंकि उसी से ही धन की बारिश होती है।

इस बार आपकी किस्मत साथ देती है और आप को अधिवक्ता जीत का स्वाद चखाते हैं तो आप क्या करेंगे ?

उन्होंने कहा कि आने के बाद अधिवक्ताओं के लिए अधिक से अधिक चेम्बर का निर्माण कराऊंगा और उसे प्राथमिकता के आधार पर देने की व्यवस्था कराऊंगा। बार में पानी की समस्या है, पेयजल की व्यवस्था कराऐंगे, शस्त्र लाइसेंस लंबे समय से लंबित पड़े हैं,उन्हें बनवाने के साथ ही बहुप्रतिक्षित मांग जिनकी वकालत 50 वर्ष हो चुकी है उन्हें पेंशन का लाभ दिलाने की लड़ाई लडूंगा। श्री शुक्ला ने यह भी कहा कि शासन-प्रशासन ने वायदा किया था कि अधिवक्ता फोरम का निर्माण होगा लेकिन अभी तक कुछ भी नही हुआ, उसके लिए संघर्ष करूंगा। पूर्व की सरकारों ने हमलोगों से वायदा किया था कि अधिवक्ताओं की मृत्यु होने के बाद उनके परिजनों को 5 लाख रूपए का लाभ मिलेगा लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। मामला अभी तक लंबित पड़ा है। साथ ही अधिवक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर नि: शुल्क पुस्तक दिलाने की व्यवस्था कराऊंगा।

आए दिन अधिवक्ताओं की हत्या हो रही है,इस पर रोक लगाने के लिए आप सरकार से क्या मांग करेंगे ?

इस पर श्री शुक्ला ने कहा कि वकीलों की बेसिक वकालत से कोई मतलब नहीं है। किसी का कोई विवाद है तो उसे दूर करने के लिए सभी तैयार हैं।
यदि कोई अधिवक्ता ईमानदारी से कोई काम करेगा तो उसकी हत्या क्यों होगी…। आप वकालत करें,प्रापर्टी डीलिंग,किसी विवाद में ना हाथ डालें तो फिर आपको कोई क्यों मारेगा? उन्होंने यह भी कहा कि यदि रंजीश में किसी अधिवक्ता की हत्त्या होती है तो उनके साथ खड़े हैं लेकिन कोई प्रापर्टी डीलिंग करेगा तो हम नहीं खड़े होंगे। चुनाव होते हैं,पदाधिकारी चुने जाते हैं ताकि चुने हुए पदाधिकारी अधिवक्ताओं की समस्याओं का निराकरण करे।

यूपी बार एसोसिएशन में लगभग नौ हजार अधिवक्ता हैं इनमें से बार काउंसिल से रजिस्टर्ड अधिवक्ताओं की संख्या साढ़े चार हजार है जो इस चुनाव में किस्मत गढऩे का काम करेंगे। ये लोग आपको ही वोट क्यों देंगे ?

इस पर श्री शुक्ला ने कहा कि मेरा रिकार्ड पता कर सकते हैं। मैंने हमेशा अधिवक्ताओं की लड़ाई लड़ी है। सही का साथ दिया है और युवा अधिवक्ताओं को हमेशा आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया है। 13 वर्ष बाद फिर से चुनाव में इसलिए खड़ा हूं क्योंकि यदि मैं अध्यक्ष बनता हूं तो अधिवक्ताओं को मेडिकल,फ्री ऑफ कास्ट चैम्बर देने,बुजुर्ग अधिवक्ताओं को पेंशन की सुविधा सहित महिला अधिवक्ताओं की जायज समस्याओं को दूर करूंगा। इसके अलावा चुनावी मैदान में उतरने का मकसद लखनऊ बार एसोसिएशन की कुर्सी पर वर्चस्व की जंग को तोडक़र जीत हासिल करना है।

जायज पत्रकारों की समस्याएं यदि आपके पास आती है तो क्या आप इसे भी अधिवक्ताओं की समस्याओं की तरह गंभीरता से लेंगे ?

अध्यक्ष पद प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला ने कहा कि मैं पहले भी पेशे से अधिवक्ता लेकिन राष्ट्रीय अखबारों में काम करने वाले अधिवक्ताओं को समय-समय पर सम्मानित करता रहा हूं। देखिए,यदि मैं चुनाव जीतूं या हारूं,मेरा सेल नंबर आप पत्रकारों को दे दें। उनकी समस्याएं जायज होंगी तो फ्री में केस लडूंगा। मैं कदम-कदम पर पत्रकारों के साथ हूं।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी धर्मेन्द्र कुमार शुक्ला की बातों में दम है। अब देखना है कि लखनऊ बार एसोसिएशन के रजिस्टर्ड अधिवक्ता,जो इस बार के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे वे किसकी किस्मत का ताला खोलते हैं…

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