Sun. Oct 20th, 2019

कहीं ‘अनिल’ के ‘राज’ में भ्रस्टाचार की गाथा खुलने पर तो नहीं छिना गया होमगार्ड विभाग !

द संडे व्यूज़ ने अनिल राजभर के कार्यकाल में  दर्जनों भ्रस्टाचार का किया खुलासा, इसीलिए छिन गया होमगार्ड विभाग !

अनिल राजभर से होमगार्ड विभाग छिनकर दिया दिव्यांग ? 

अनिल राजभर के कार्य काल का खेल :

1-  वर्दी घोटाला

2-सामानों की खरीद-फरोख्त घोटाला

3-तबादलों में  माल बटोरने

4- नियमों को ताख  पर रख कर होमगार्डों की भर्ती करने

5- मुख्यालय पर बने सीटीआई में जवानों को खिलाए जाने वाले खाने की खरीद में घोटाला…

 

संजय पुरबिया

संजय पुरबिया

लखनऊ। होमगार्ड मंत्री के रूतबे की बात की जाए तो उप-मुख्यमंत्री से कम नहीं दिखता। अल-सुबह मंत्रीजी की आंख खुलते ही सलामी ठोंकने वाले अफसर और अर्दलियों की लाइन लगी रहती है। सलामी इतनी जबरदस्त ठोंकी जाती कि कई बार मंत्री जी भी ‘अकुता’ और ‘झुल्ला’ जाते हैं,कि ससुरा आंख खुलल ना वर्दी वालन के चेहरा देखे के मिल जाएला…। अधिसंख्य माननीय वर्दी को ‘शुभ’ और ‘अशुभ’ से भी जोडक़र देखते हैं। खैर,यहां बात होमगार्ड मंत्री की हो रही थी। अब नाम के आगे ‘पूर्व’ ही लगाना होगा क्योंकि अब होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान बन गए हैं और अनिल राजभर ‘पूर्व वाले’…।

 

द संडे व्यूज़ ने ‘पूर्व वाले मंत्री जी’ के कार्यकाल में वर्दी घोटाला,सामानों की खरीद-फरोख्त घोटाला,तबादलों में धकाधक माल बटोरने सहित नियमों को ताख क्या तोड़-मरोडक़र बिना शासन की अनुमति लिए होमगार्डों की भर्ती करने सहित होमगार्ड मुख्यालय पर बने सीटीआई में जवानों को खिलाए जाने वाले खाने की खरीद में घोटाला, प्रदेश में कमांडेंट स्तर पर होमगार्डो पर फर्जी आरोप लगाकर सैंकड़ों जवानों को नौकरी से बाहर करने के मामले को धड़ल्ले से खुलासा किया गया लेकिन किसी में कार्रवाई नहीं हुई।

कई मामलों में जांच तो बिठा दी गई,जिस अफसर को जांच मिला,वो सौदेबाजी का दलाल निकला। जांच में बेगुनाहों को ही बरी कर द संडे व्यूज़ की पत्रकारिता को ही गलत ठहरा दिया। उस वक्त थोड़ा कोफ्त होता था कि आखिर सच लिखने के बावजूद मुख्यमंत्री या शासन के अफसरानों की नजर होमगार्ड विभाग पर क्यों नहीं पड़़ रही है। क्योंकि सरकारी विभागों में सबसे अधिक घोटाले एवं अनियमितताएं इसी विभाग में हो रही है।

शासन के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि पूर्व होमगार्ड मंत्री को ओमप्रकाश राजभर के विकल्प के रूप में चुनावी बेला में चुना गया था। सरकार की सोच थी कि पूर्वांचल की सरजमीं पर राजभर वोट बैंक को साध लेने का मतलब,वहां की सीट अपनी है। इसमें पूरी तरह से तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कुछ हद तक सरकार कामयाब रही क्योंकि बागी माने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का अपनी बिरादरी में जबरदस्त पैठ है। ओमप्रकाश राजभर के पास दिव्यांश विभाग था ,जिसमें काम करने के लिए कुछ नहीं है। सरकार से ओमप्रकाश की नाराजगी की वजह में से एक विभाग को लेकर भी चल रहा था। उन्होंने सत्ता की परवाह ना करते हुए अपनी बिरादरी और लचर विभाग को छोड़ जनता और दलित,राजभर के साथ एक लाइन में खड़े हो गए। इसका फायदा ओमप्रकाश राजभर का मिला की वे अपनी बिरादरी के नायक बन गए। सभी के दिमाग में यह बात पैठ कर गयी है कि ओमप्रकाश राजभर ने हमलोगों के लिए सत्ता सुख को छोड़ दिये।

दूसरी तरफ,पूर्व होमगार्ड मंत्री ने चुनाव भर खूब मेहनत की। कुछ सीटें इनके खाते में आयी और अधिसंख्य चली गयी। मंत्रीमंडल विस्तार में अनिल राजभर को स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री से कैबिनेट का दर्जा इनाम के तौर पर मिला। उनके शुभचिंतकों की खुशी मानों ‘उफान’ पर थी। कैबिनेट की घोषणा के बाद शुभचिंतकों ने तरह-तरह के कयास लगाने लगें। मसलन,होमगार्ड विभाग तो मंत्री जी के पास रहेगा ही साथ में समाज कल्याण,लोक निर्माण विभाग… वगैरह विभाग तो मिलेगा ही,क्योंकि मंत्री जी ने काम किया है। यानि, शुभचिंतकों ने सिर्फ ‘माल’ कमाने वाले विभाग की ही कल्पना की,ये नहीं सोचा कि ‘काम’ करने वाले विभाग में भी जा सकते हैं…।

जैसे ही घोषणा हुई कि अनिल राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया और होमगार्ड विभाग ले लिया गया,मानों सभी को ‘सांप’ सूंघ गया। चाटुकारों को तो ऐसा लगा मानों ‘गश’ खाकर गिर जाएंगे, क्योंकि वर्दी वालों से सलामी लेने की आदत जो पड़ गयी थी।

खैर,बड़ा सवाल यह है कि क्या अनिल राजभर की अपनी राजभर बिरादरी में वोट बैंक है या कम हो रहा है ? आखिर मुख्यमंत्री ने इन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाकर प्रमोशन किया है या डिमोशन ?
बताया तो यह जाता है कि लोकसभा चुनाव में पूर्व होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर ने पार्टी के लिए खूब पसीना बहाया और कई सीटों पर प्रत्याशियों को जीत का स्वाद भी चखाया लेकिन उनके कार्यकाल में हुए भ्रस्टाचार और अनियमता की शिकायतों की वजह से उनसे होमगार्ड विभाग लेकर महत्वहीन विभाग का मंत्री बनाया गया है।

बात में दम इसलिए भी लगती है क्योंकि द संडे व्यूज़ व इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ ने होमगार्ड विभाग में हुए दर्जनों भ्रस्टाचार के कारनामों का खुलासा किया था। यदि इस बात में सच्चाई है तो मैं यही कहूंगा कि कलमकार यदि सच लिखने का दम रखता है तो सीएम और शासन में बैठे लोगों की निगाहों में उसकी खबर चढ़ती जरूर है।

महत्वहीन विभाग के बारे में पूर्व कैबिनेट मंत्री सुभाषपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार को जिस मंत्री को बर्बाद करना होता है उसे पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बना देते हैं। अब आप समझ गए होंगे। मुझे भी साजिशन यही विभाग दिया गया था। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलितों को मोहना बनाकर वोट बैंक हासिल करने की सिर्फ साजिश रची जाती है। जितने भी बैकवर्ड मंत्री बनें सभी को सीएम ने झुनझुना थमाने का काम किया है।

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