Tue. Feb 25th, 2020

‘आप’ ने किया दिल्ली के दिल पर राज-पॉजिटिव व्यूज से जीते केजरीवाल

दिल्ली

ब्यूरो

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी  (आप ) की जीत लगभग तय है। आप को दिल्ली में लगभग 50 सीटों के आस-पास मिलती नजर आ रही है। हालांकि इस बार आम आदमी पार्टी को सीटों में नुकसान होता हुआ नजर आ रहा है। मगर इसके बाद भी आम आदमी पार्टी दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाने की ओर आगे बढ़ रही  है। आइए आपको बताते आम आदमी पार्टी की जीत की पांच वजहें।

मोदी पर निशाना नहीं :

आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार में जबरदस्त सतर्कता बरती है। आप ने पूरे चुनाव प्रचार में एक बार भी पीएम मोदी पर निशाना नहीं साधा। पार्टी के पूरे शीर्ष नेतृत्व ने पांच साल के काम के नाम पर वोट मांगा। आम आदमी पार्टी ने भाजपा के परंपरागत वोटर का भी पूरा ध्यान रखा, पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तो भाजपा के सर्मथकों तक से वोट मांग लिया। आम आदमी पार्टी यह समझने में कोई गलती नहीं की कि अगर उन्होंने पीएम मोदी पर कोई वार किया तो उन्हें इसका खामियाजा भुगताना पड़ेगा और उनके इस दांव ने काम भी किया।

मोहल्ला क्लीनिक:

मोहल्ला क्लीनिक ने भी केजरीवाल सरकार को काफी लोकप्रियता दिलाई। आम आदमी पार्टी, मोहल्ला क्लीनिक पर लगी भीड़ को वोटों में तब्दील करने में कामयाब रही। आप सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आकर्षित किया। हालांकि भाजपा ने मोहल्ला क्लीनिक के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश की पर चुनावों परिणामों को देखे तो वह इसमें भी पूरी तरह विफल नजर आए।

पॉजिटिव प्रचार :

आम आदमी पार्टी ने अपना पूरा चुनाव बहुत सधा हुआ रखा। किसी भी नेता ने कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया। इसी के साथ सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं एक सुर में अपने पांच साल के कार्यों का प्रचार करते रहे। पूरे प्रचार को काफी पॉजिटिव रखा गया, आम आदमी पार्टी ने भाजपा के उलट मुद्दों पर बात की। भाजपा के बड़े नेताओं पर आरोप लगाते समय भी काफी सतर्कता बरती गई।

बिजली पानी :

आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल बिजली और पानी के मुद्दे को पूरी तरह भुनाने में कामयाब रहे। पूरी पार्टी ने बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों को जनता तक पहुंचाया। पूरे प्रचार के दौरान केजरीवाल ने जब-जब जनता से संवाद किया तब-तब जनता ने मुफ्त बिजली-पानी के मुद्दे पर केजरीवाल की बात पर हुंकार भरी। हालांकि भाजपा ने जनता के बीच फ्री सुविधाओं के प्रति एक नकारात्मक छवि पैदा करने की कोशिश की, जिसमें वे पूरी तरह से विफल रहे।

सीएम उम्मीदवार :

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में आम आदमी पार्टी ने भाजपा की सबसे कमजोर कड़ी यानी सीएम उम्मीदवार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और उन्हें इसका फायदा भी हुआ। अरविंद केजरीवाल ने चुनावी सभाओं से लेकर प्रेस कांफ्रेंस तक हर जगह अमित शाह को सीएम उम्मीदवार घोषित करने की चुनौती दी, मगर भाजपा जनता के बीच इस मुद्दे पर भी कुछ खास जवाब देने में कामयाब नहीं रही। यह आम आदमी पार्टी की जीत की सबसे बड़ी वजह है कि किसी भी विपक्षी पार्टी के पास केजरीवाल के कद का कोई भी उम्मीदवार नहीं था।

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