Sun. Oct 25th, 2020

इंडियाएक्सप्रेसन्यूज़डॉटकॉम शासन से मांगता है जवाब :कमांडेंट की बात में है सच्चाई,फिर किस पर होनी चाहिए कार्रवाई?

कमांडेंट ने कहा डीडीओ क्यों भेजेगा पैसा,डीजी के आदेश पर ही फंड आता और जाता है ?

क्या पूर्व डीडीओ राजेन्द्र सिंह की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वो डीजी को बताये कि शासन को फंड भेजना है?

द संडे व्यूज़ शासन से मांगता है जवाब: सच उगलने वाले मनोज कुमार पर लिया क्वीक एक्शन,क्या दोषियों के खिलाफ लेंगे एक्शन?

द संडे व्यूज़ में खबर छपने के बाद अफसरों ने कल्याण कोष में जमा की धनराशि

डीजी साहेब, पैसा सरकार का है शासन को क्यों हीं सौंपा,कल्याण कोष से तो कभी भी हो सकती है हेराफेरी ?

शेखर यादव

इटावा। होमगार्ड विभाग में मेरठ के कमांडेंट राजेन्द्र सिंह के बयान से नौकरशाही में भूचाल आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान विभाग में जो फंड आता है, उसे डीजी के अनुमोदन से बांटा जाता है और शासन को वापस किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कैश लॉग में पैसा रखा है तो डीडीओ की कोई जिम्मेदारी नहीं होती कि वो शासन भेज दे…। डीजी की जिम्मेदारी बनती है कि वो शासन फं ड वापस करने के लिये कहे…। राजेन्द्र सिंह का मतलब, कैश लॉग में चुनाव बाद जो फंड बचा उसे डीडीओ नहीं बल्कि डीजी जमा करने का निर्देश देते हैं। डीडीओ की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती…। कमांडेंट की बातों के मुताबिक चाहें पूर्व के डीजी जी.एल.मीणा रहे हों या फिर वर्तमान डीजी, होमगार्ड विजय कुमार,ये लोग पूरी तरह से दोषी हैं। सीधी बात करें तो जब डीजी विजय कुमार ने जो रवैया अपनाया है तो उनके खिलाफ क्या शासन कार्रवाई करेगी ? मामला सरकारी फंड को दबाये रखने का है,जिसे डीजी ने किसी को अवगत नहीं कराया। द संडे व्यूज़ शासन से सवाल करता है कि जब सरकारी फंड यानि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तपस्या की धनराशि को होमगार्ड मुख्यालय पर दबाकर रखा गया, इसके लिये क्या दोषी लोगों पर कार्रवाई होगी ? मेरा सवाल पूर्व डीडीओ, कमांडेंट,मेरठ राजेन्द्र सिंह से है, आपने पूर्व डीजी या फिर यूं कहें नवागंतुक डीजी विजय कुमार या डीआईजी रंजीत सिंह को कितनी बार लिखित रुप से कैश लॉग में रखी धनराशि के बारे में बताया ? यदि नहीं, तो क्या आपके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये या नहीं ? जब सारे लोग पाक-साफ हैं तो फिर सस्पेड डीडीओ मनोज कुमार के खिलाफ कार्रवार्ई क्यों की गयी ? मनोज कुमार ने तो डीडीओ का कार्यभार ग्रहण करने के 11वें दिन ही डीआईजी,मुख्यालय रंजीत सिंह को कैश लॉग में रखे सरकार के लाखों रुपये की सूचना दे दी थी ? उसका क्या ईनाम मिला… निलंबन…।


होमगार्ड मुख्यालय पर तैनात निलंबित डीडीओ मनोज कुमार ने अपने ही सीनियर एसएसओ सुनील कुमार के खिलाफ 14 पेज में भ्रस्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाये। इस खबर को प्रमुखता के साथ द संडे व्यूज़ ने प्रकाशित किया था। मनोज का एक आरोप था कि एसएसओ सुनील कुमार डीआईजी रंजीत सिंह के कमरे में अमरोहा कमांडेंट मनीष दूबे की मौजूदगी में कैश लॉग में रखे 22 लाख रुपये निकाल कर देन की मांग की। मनोज कुमार द्वारा बिना कैशियर की मौजूदगी में सरकारी फंड देने से मना कर दिया था। बता दें कि मुख्यालय के कैश लॉग में उत्तराखंड चुनाव के बाद बची धनराशि 27 लाख रुपये और दिल्ली चुनाव में बची 22 लाख रुपये की धनराशि रखा था। विरोध यहीं से शुरु हुआ और बात शासन तक पहुंची। उसके बाद डीडीओ मनोज कुमार ने मुख्यालय पर चल रहे भ्रस्टाचार का पूरा पोल खोलकर रख दिया। बाद में मुख्यालय के अफसरों ने भ्रस्टाचार के मुद्दे को दबाने के लिये बागपत की कमांडेंट नीता भारतीया की शिकायती पत्र पर मनोज कुमार को निलंबित करा दिया है।

खैर, बात सरकारी धन को दबाकर मुख्यालय पर रखने की हो रही है। सरकारी धन को चुनाव बाद शासन को ना सौंपकर कैश लॉग में अपने पास रखने के मुद्दे पर जब आज द संडे व्यूज़ के संवाददाता शेखर यादव ने मुख्यालय पर तैनात पूर्व डीडीओ वर्तमान तैनाती कमांडेंट मेरठ राजेन्द्र सिंह से की तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। राजेन्द्र सिंह ने कहा कि कैश लॉग में जो भी फंड है,उसे शासन को डीडीओ नहीं भेज सकता है और जब मैं चार्ज लिया था उस समय लगभग 20 लाख रुपये कैश लॉग में था। उन्होंने कहा कि मुझे याद नहीं है कि कितना वितरण हुआ,कितना शेष धनराशि बची है। जब सवाल किया गया कि चुनाव बाद जो पैसा बचा उसे तो शासन को सौंप देना चाहिये था ? इस पर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि ये डीजी का काम होता है। डीडीओ एचओडी के नीचे होता है। हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। यानि आपके पास सिर्फ कैश की चॉभी होती है? इस पर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि डीजी के थ्रू पैसा आता है और डीजी के थ्रू ही पैसा शासन के पास जाता है।

पूर्व डीडीओ,कमांडेंट राजेन्द्र सिंह की बातों में दम है। चुनाव बाद जो भी फंड बचता है उसे शासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डीजी यानि विभाग के मुखिया की होती है लेकिन राजेन्द्र जी,क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं बनती की डीआईजी या डीजी को आप बताये कि कैश लॉग में सरकार का पैसा रखा है ? क्या आपने अपने कार्यकाल के दौरान डीजी को लिखित रुप से बताया था कि कितना फंड कैश लॉग में रखा है ? नहीं, तो क्यों ? जब सारा काम डीजी ही करेंगे तो डीडीओ के पोस्ट का क्या मतलब ? चर्चा इस बात का है कि डीडीओ मनोज कुमार,जो निलंबित चल रहे हैं, उन्होंने 24 दिसंबर 2019 को मुख्यालय पर डीडीओ का कार्यभार ग्रहण किया और 11 वें दिन डीआईजी रंजीत सिंह को लिखित रुप से कैश लॉग में रखे 22 लाख रुपये की जानकारी दी थी जो दिल्ली चुनाव के बाद बचा था। उसके बाद उत्तराखंड चुनाव के बाद लगभग 27 लाख रुपये बचे,उसे भी कैश लॉग में रख दिया गया था। नियमत: उक्त धनराशि सरकार की है तो उसे तुरंत शासन को सौंप देना चाहिये,लेकिन अफसरों ने ऐसा नहीं किया।

मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि द संडे व्यूज़ की खबर के बाद शासन से लेकर मुख्यालय तक हडक़म्प मच गया। आनन-फानन में डीजी विजय कुमार के निर्देश पर लगभग 22 लाख रुपये की धनराशि शासन में ना जमाकर कल्याण कोष में जमा करा दिया। यानि,यहां पर सरकारी धन तो मनोज कुमार की जागरुकता से बच गयी लेकिन कल्याण कोष से योगी जी का फंड बचेगा,इसकी कोई गारंटी नहीं। सवाल यह कि आखिर डीजी ने उक्त धनराशि शासन में क्यों नहीं जमा किया ? बहरहाल, कमांडेंट मेरठ राजेन्द्र सिंह के बयान ने सीधे तौर पर डीजी,होमगार्ड विजय कुमार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। देखना है कि शासन इनके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है ? सैल्यूट करते हैं मेरठ कमांडेंट राजेन्द्र सिंह को,जिन्होंने पूरी बेबाकी के साथ अपनी बात द संडे व्यूज़ के सामने रखा और कैश लॉग में रखे सरकारी धन की प्रक्रिया के बारे में बताया और ये भी बताया कि शासन तक यदी सरकारी धन नहीं पहुंचता है तो इसके लिये जिम्मेदार कौन है…

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