Tue. Dec 1st, 2020

इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ डॉटकॉम की खबर पर दो कमांडेंट हुये बर्खास्त: योगीराज में नहीं बच पायेंगे भ्रष्टाचारी

द संडे व्यूज की खबर पर सीएम योगी का कहर: मुकेश कुमार के बाद अब कमांडेंट कृपाशंकर हुये बर्खास्त

होमगार्डों को बर्खास्त करने वालों अब समझ में आयेगा भूख,इज्जत कितना मायने रखता है

मीडिया को चुनौती देने वाला प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय पर भारी पड़ी होमगार्डों की बददुआ

जवानों को बर्खास्त कर बहाली में लूटने वाली रकम से अफसरों ने खूब की अय्याशी

योगी के आक्रामक तेवर से सदमे में अफसर, मस्त हुये सूबे के लाखों जवान

संजय पुरबिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एक लाख 18 हजार जवानों, वाकई आपलोग आज बेहद खुश होंगे। मैं भी हूं। क्योंकि पत्रकारिता में मेरा कैरियर लगभग 26 वर्ष हो चला है। खबरों से दबंगई करने और बेसहारा,मजबूरों की आवाज बनने के जुनून ने इस पेश में मुझे लाया लेकिन बड़े मीडिया घराने में संपादकों की चाटुकारिता ना करने, सच लिखने के जज्बे की वजह से हर एक साल बाद मुझे इस्तीफा देकर सडक़ पर आना पड़ा। कई बार ऐसा हुआ कि मेरी स्टोरी की सीरिज चल रही थी और अचानक ऊपर से आदेश आता कि स्टोरी रोक दो…। कोई बात नहीं, मैं अगली स्टोरी पर काम करने लगता लेकिन भ्रष्टाचारकी बातें कभी छिपती नहीं। कुछ दिनों बाद मालूम चलता कि मेरे सीनियर ने स्टोरी रोकने के लिये ठीक-ठाक सौदेबाजी कर ली…। फिर क्या, अगले दिन मेरा इस्तीफा तैयार…। संपादकों को इस्तीफा देते वक्त मेरा हौसला बुलंद रहता था। निकल पड़ता था, अगली गुमनाम मंजिल की ओर…। इस दौरान मैंने कई बार महसूस किया किया कि बार-बार इस्तीफा देने की वजह से उत्पन्न आर्थिक अभाव में मेरा परिवार अपने मन को मार रहा है, मैं महसूस करता था कि मकान मालिक किराये के लिये तेवर बदलकर तल्ख अंदाज में बात करता था। सिर्फ इसलिये कि मैं तोपची पत्रकार तो जरुर था लेकिन जेब खाली रहा…। पत्रकारिता को मिशन के तौर पर लेकर चलने की वजह से कई बार जेब खाली होने की वजह से भूख लगने पर खाना खाने के बजाये लईया-चना खाकर गडग़ड़ाकर दो ग्लास पानी पीकर अपने मन को सांत्वना दे देता था। आप सोच रहे होंगे कि आज मैं अपनी बखान क्यों कर रहा हूं ? मैं इसलिये बता रहा हूं कि 25 साल पहले जब मैं स्वतंत्र भारत अखबार में रिपोर्टिंग कर रहा था तो होमगाडों की बेबसी,मजबूरी को मैंने करीब से देखा।

 

जेलरोड पर बने होमगार्ड मुख्यालय के खाली मैदान में मुझे आज भी याद है वो जून का महीना,तपती दुपहरिया में ग्राउंड में एक तंबू के नीचे अंडरबियर पहनकर पसीने से लथपथ दो होमगार्ड एक चारपाई पर लेटे थे। कौतुहलवश मैंने पूछा भाई,गर्मी नहीं लग रही है ? खिंझते हुये दोनों जवान उठे और एक सुर में अफसरों के शोषण और भ्रष्टाचार की बातें बताने लगे। मैं ठहरा पत्रकार,पूछ ही लिया कि यार,होमगार्ड विभाग में भी भ्रष्टाचार ?क्योंकि अभी भी लोग होमगार्ड विभाग को गरीब,निरीह विभाग मानते हैं। उसके बाद मैं इस विभाग में घुसा और आपलोगों को भी याद होगा,खोखा घोटाला और कारतूस घोटाला। फिर क्या,मैं लगा दागने और भ्रष्ट  डीजी, डीआईजी सहित उनके गुर्गे लगे अखबार के दफ्तर खंगालने…। वो दिन और आज का दिन बराबर है,भ्रष्टाचार उस समय भी था और आज भी है,जवान पहले भी परेशान थें,आज भी अफसरों को कोसते हैं। इस विभाग के तथाकथित अफसर इस कदर बेहया हो गये हैं कि जिन जवानों के नाम से इस विभाग का नाम होमगार्ड विभाग रखा गया, उन्हीं को लूट रहे हैं,सता रहे हैं…। अरे आपलोग जवानों के परिवार की बद्दुआ से तो डरो…। आपलोग अपनी फिजूलखर्ची, कोठियां बनाने, दर्जनों प्लॉट, फ्लैट बनाने के हवस से बाहर निकले। उन्हें बेवजह बर्खास्त करते हैं तो सिर्फ वे ही नहीं उनका पूरा परिवार भूखमरी की कगार पर पहुंच जाता है।

सोचिये, जिसके घर में खाने को रोटी ना हो तो क्या उनके मन से निकलने वाली आह से आपका परिवार बचेगा ? कहा गया है कि सब कुछ करो लेकिन किसी गरीब की हाय,बद्दुआ ना लो,क्योंकि ऐसा करने वाला बर्बाद हो जाता है। आपलोगों के सामने तो अब एक नहीं दो उदाहरण हैं…। बुलंदशहर के प्रमोटी कमांडेंट मुकेश कुमार के बाद आज लखनऊ के पूर्व प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय को बर्खास्त कर दिया है। एक हफ्ते में दो कमांडेंट की बर्खास्तगी से पूरा विभाग सदमे में हैं। अभी कई और लाईन में हैं जो इस विभाग को खाला की दुकान समझ कर काम कर रहे हैं।

आपको बता दूं कि लखनऊ के पूर्व कमांडेंट कृपाशंकर ने इस सरकार में भ्रष्टाचार की ऐसी गाथा लिखी कि इसके रुतबे के सामने प्रमुख सचिव से लेकर डीजी तक मुंह नहीं खोल पाते थे क्योंकि ये सभी के मुंह में गड्डी डाल देता था। शासन के अधिकारी बताते हैं कि पाण्डेय जी पहले अफसर की कमजोरी पकड़ते थे उसके बाद कुछ ऐसा कारनामा करते थे कि बाद में अफसर इनकी हां में हां मिलाने लगता था। पाण्डेय जी ने पूर्व होमगार्ड राज्य मंत्री अनिल राजभर को अपने मायाजाल में इस तरह से लपेटा कि किसी की बोलने की जुर्रत नहीं होती थी। इसी दंभ में उन्होंने द संडे व्यूज़ अखबार को पंपलेट बोलने की गल्ती कर दी। बस,उसके बाद मैंने मंत्री जी और पाण्डेय के बीच चल रही भ्रष्टाचार की जुगलबंदी को करने लगा खुलासा। पाण्डेय जी,ये वही पंपलेट है जिसकी खबरों को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया और बर्खास्तगी कर इस विभाग में संदेश दे दिया कि वो भ्रष्टाचार किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ये पंपलेट की ही देन है कि मुख्यमंत्री की टीम ने उन्हें सच्चाई से रुबरु कराया और आज आज आप बर्खास्त कर दिये गये हैं। ये द संडे व्यूज़,इंडियाएक्सप्रेसन्यूज़डॉटकॉम की ही जीत नहीं बल्कि प्रदेश के एक लाख 18 हजार होमगार्डों की जीत है। आखिर में यही कहना चाहुंगा कि हर मोर्चे पर विभाग की शान होमगार्ड बढ़ाते हैं ना कि अधिकारी,फिर इन्हें क्यों ड्यूटी लगाने के नाम पर,बर्खास्त करने के नाम पर,बहाली के नाम पर पैसा ऐंठते हो…। अरे साहेबान,एक बार जवानों केकंधों पर हाथ रखकर,मुस्करा कर उनका हाल तो पूछिये…। देखिये, आपके जवान पुलिस से बेहतर बनकर दिखाने का माद्दा रखते हैं।

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