Sun. Oct 20th, 2019

एक पिता का दर्द : ‘ वाह रे नेतागीरी और वाह रे पुलिस’

नेताओं के पिछलग्गू बनें पुलिस वालों की झाडूगिरी में चोटिल हुआ लडक़ा

छपास रोग वालों ने नया झाडू लेकर फोटो खिंचाया,उसके बाद सड़ा मुंह बनाकर हुए रफूचक्कर

क्या किसी ने पुरानी झाडू से,बिना ग्लब्स पहने लगाया झाडू?

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। भईया गांधी जी तो एक विचार हैं। हम सभी के दिलों में बसे हैं। फिर एक दिन में लल्लन टाप झाडू वो भी ग्लब्स पहनकर सफाई अभियान की नौटंकी क्यों? शहर के साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है,आखिर यहां काम करने वाले कर्मचारी पूरी ईमानदारी से काम क्यों नहीं करते…। सही मायने में गांधी जयंती के दिन इस विभाग के अफसरों और कर्मचारियों को पहले जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वे अपने प्यारे शहर को साफ रखेंगे।

उसके बाद आम जनमानस को अपने घर और आसपास के इलाकों को साफ करने का संकल्प लेना होगा तभी सही मायने में गांधी जी के स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा। अब देखिए, एक लडक़ा 2 अक्टूबर की सुबह अपने कार्यालय जा रहा था। आप सभी जानते हैं कि सुबह कार्यालय जाने में कितना आपाधापी मचा रहता है। जैसे ही वो जलालपुर रेलवे क्रासिंग के पास पहुंचा तो देखा वहां पर कोई नेता और उसके साथ छुटभैय्यों की जमात कुछ ज्यादा थी,सभी लल्लन टाप झाडू लेकर नसीहतों की बौछार कर रहे थें कि झाडू ऐसे पकडऩा चाहिए,झाडू को इस तरह से घुमाना चाहिए वगैरह-वगैरह…।

ऐसा लग रहा था मानों नेताजी नर्सरी के पाठशाला में शिक्षा ग्रहण कर रहे हों। खैर,जब लडक़ा वहां से निकलने लगा तो मंश्तैद पुलिसकर्मियों राहगीरों को भौकाल में लेते हुए धकिया दिए। फिर क्या,वो लडक़ा भी अपनी गाड़ी से गिर पड़ा और उसके कमर व हांथ में चोट लग गयी।

खैर,इससे मामू और नेताजी को कोई लेना-देना नहीं था,वो छुटभैय्यों की पाठशाला में व्यस्त थें और मामू यह दिखाने की कोशिश कर रहे थें कि वे नेताजी की सुरक्षा में कितने मुश्तैद हैं। वे जानते हैं कि तबादला होने पर यही सब पैरोकार बनेंगे। कहने का मतलब ऐसी गांधीगिरी से क्या फायदा जब जनमानस ही चोटिल हो…। हम तो यही कहेंगे वाह रे नेतागीरी, दिखावा और उसपर नेताओं के मान बढ़ाने के लिये पुलिसिया कार्यवाही।

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