Tue. Sep 17th, 2019

… कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय पर भारी पड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव की ईमानदारी

… कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय पर भारी पड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव की ईमानदारी

सिर्फ फेसबुक पर एक मैसेज लिखने के आरोप में कृपा ने सुभाष को दिया था नोटिस

विभाग में हो रही जग हंसाई :जिस पर है ‘मंत्री’ और ‘मुख्यालय’  की कृपा, उस कृपाशंकर को इंस्पेक्टर ने दी पटकनी

संजय पुरबिया

लखनऊ।                                          हर तरफ सियापा है,हर तरफ तबाही है।
                                                       अंधों की अदालत में बहरों की गवाही है।।

 

ये पंक्तियां किसी अज्ञात शायर की है लेकिन इन दो लाईनों में जिंदगी की हकीकत छिपी हुई है। मौजूदा सरकारी तंत्र जिस तरह से भ्रष्टïाचार के आकंठ में डूबा है,उसकी सही तस्वीर उक्त अज्ञात शायद की शायरी में घुसी हुई है। यही वजह है ईमानदारों को ये शायरी जितनी रास आ रही है बेईमान और भ्रस्टाचार में डूबकर मलाई खाने वाले अफसर और कर्मचारियों को रत्तीभर नहीं सुहा रहा है। एक साल पहले फेसबुक पर होमगार्ड विभाग के हवलदार प्रशिक्षक अजीत चौधरी ने इस खूबसूरत शायदी का जिक्र किया। खूब लाईक मिला। लोगों ने अपने-अपने अंदाज से विचार व्यक्त कर अज्ञात शायर की प्रशंसा की। इसी जमात में वाराणसी में तैनात इंस्पेक्टर सुभाष यादव ने भी अपने दिल की भड़ास को कुछ इस अंदाज में बयां किया-

                                                                                                        हर तरफ सियापा है,हर तरफ तबाही है।
                                                                                                        अंधों की अदालत में बहरों की गवाही है।।

इस पंक्तियों की फेसबुक पर खूब वाहवाही मिली लेकिन वाराणसी में तैनात होमगार्ड कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय (जो वर्तमान में लखनऊ कमांडेंट हैं) को रत्तीभर नहीं सुहाया। उन्होंने सोचा होगा कि उक्त पंक्तियां तो मेरे ऊपर सटीक बैठ रही है,क्योंकि जनाब की गिनती महा… में होती है। ऐसा विभाग के लोग कहते हैं।

बस साहेब ने आव देखा न ताव,मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र, रामनगर में तैनात इंस्पेक्टर सुभाष यादव को प्रतिकूल प्रविष्टि थमा दिया। जब श्री यादव ने प्रतिकृल प्रविष्टि देने की वजह पूछा तो श्रीमान पाण्डेय जी ने जवाब दिया कि आपने फेसबुक पर जो कमेंट किया है उससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है।

गुरू आपको बता दें कि यादव जी भी किसी से कम नहीं हैं। इनकी छवि ईमानदार ही नहीं बेहद ईमानदार और नियम-कानून को भरपूर सम्मान देने वाले इंस्पेक्टर माने जाते हैं। इन्होंने झट से डीजी से लेकर शासन स्तर पर एक कर्रा सा पत्र लिख भेजा। अब कहां जुगाडू कृपाशंकर और कहां सुभाष बाबू…। पाण्डेय जी ने दिल खोलकर मुख्यालय के अफसरों को मुस्कराकर तो कभी दंडवत होकर दबाव बनाया कि किसी तरह सुभाष यादव को दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि पर मुहर लग जाए और उनकी प्रतिष्ठा बढ़ जाए।

लेकिन कहा गया है ना कि एक ईमानदार सैंकड़ों भ्रस्टाचारियों की चूलें हिलाने का दम रखता है। लगभग एक वर्ष तक जांच चली और आखिर में 21 जून 2019 में जीत ईमानदार इंस्पेक्टर सुभाष यादव की हुई। मौजूदा डिप्टी कमांडेंट जनरल रजनी उपाध्याय ने उन्हें क्लीन चीट देते हुए कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय द्वारा लगाए गए परिनिन्दा दण्ड को खारिज कर दिया।

आपको बता दें कि परिनिन्दा दण्ड देने से संबंधित कर्मचारी की पदोन्नति रोक दी जाती है और वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं लगता है। आखिर में यही कहेंगे कि पाण्डेय जी,सच्चाई,ईमानदारी और न्याय अभी भी जिंदा है…

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