Tue. Feb 25th, 2020

जनसेवा ही मेरा लक्ष्य : राकेश कुमार पाण्डेय

लखनऊ. खण्ड स्नातक निर्वाचन के एमएलसी (स्नातक) प्रत्याशी राकेश कमार पाण्डेय

जनसेवा ही मेरा लक्ष्य : राकेश कुमार पाण्डेय

संजय पुरबिया

लखनऊ। राजधानी का एक नौजवान जब लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ता था तो वो कैंटीन में बैठकर अक्सर यूपी की सियासत और अवाम से राजनीतिक दलों द्वारा वायदा कर छलने की बातों पर चिंतन-मंथन करता। वो सोचता कि आखिर राजनीतिक दल के लोग चुनाव से पहले जन सुविधाओं को देने और सूबे की तस्वीर बदलने की बातें कर जीतने के बाद मुकर क्यों जाते हैंण्ण्ण्। चिंतन-मनन के बादल उसमे मानस पटल पर आते-जाते रहते थे। उसकी सोच थी कि वो नेता ना बनें,वो सभी का चहेता बनें लेकिन सवाल यह उठता था कि आखिर कैसे? जवाब भी वो किसी से ना पूछ अपने से ही सवाल करता। यही वजह है कि छात्र राजनीति में शौक रखने के बावजूद उसने कभी चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन, चुनावी मैदान में ताल ठोंकने वाले साथियों को वसूल का पाठ जरूर पढ़ाता कि जीतो या हारो, छात्रों से किये वायदा को जरूर पूरा करो…। वसूल और शिद्धांतों की राह पर चल पड़ा वो नौजवान आज लखनऊ में अपनी सकारात्मक सोच को जीवंत करने के लिए लखनऊ खण्ड स्नातक निर्वाचन के चुनाव में अपनी नई पारी खेलने के लिये उतर पड़ा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं राकेश कुमार पाण्डेय की जिन्होंने एम.एल.सी. स्नातक के चुनाव में बतौर प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाने के साथ ही अवाम के ज्वलंत मुद्दों को साथ लेकर उतर पड़े हैं। श्री पाण्डेय राजधानी से प्रकाशित राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक कैनविज टाइम्स के चेयरमैन एवं प्रधान संपादक हैं।

 

द संडे व्यूज़ के ब्यूरो चीफ संजय पुरबिया से खास बातचीत में एमएलसी स्नातक प्रत्याशी राकेश पाण्डेय ने कहा कि वे गैर राजनीतिक हैं, इसीलिये निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस पद के चुनाव को भी राजनीतिकरण किया गया है जो नहीं करना चाहिये, क्योंकि एमएलसी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी व जनता के प्रति जवाबदेही होती है। आखिर जीतने के बाद छोटी- छोटी जन सुविधाओं सहित अवाम की समस्याओं को कोई तभी पूरा कर पायेगा जब जीतने वाला प्रत्याशी गैर राजनीतिक हो और भरपूर समय दे। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश…

सवाल : एमएलसी स्नातक का चुनाव जीतने के बाद अधिसंख्य प्रत्याशी गायब हो जाते हैं तब जनता अपने का छला महसूस करती है?

जवाब : राकेश पाण्डेय ने कहा कि ऐसा नहीं करना चाहिये, इच्छा शक्ति का प्रभाव होना चाहिये क्योंकि जनता की जनसमस्याओं के निस्तारण ही प्रतिनिधि का कार्य हैं, किये गए वायदों को हर हाल में पूरा करना चाहिये।

सवाल: आप निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर क्यों चुनाव लड़ रहे हैं ? किसी राजनैतिक दल के समर्थित उम्मीदवारी भी ले सकते थे?

जवाब: देखिये, मैं किसी भी राजनैतिक पार्टी का बहस नहीं बनना चाहता। अब बदलाव की बयार है। जनता देखती है कि कौन उनके गंभीर मुद्दों को पूरा करने में सक्षम है। लोग ये भी सोचते हैं कि चुनाव जीतने के बाद कौन उन्हें बेटा, दोस्त, प्रतिनिधित्व करने वाले रूप में मिलता रहेगा। मेरी कोशिश रहेगी कि चुनाव जीतता हूं तो अपना पूरा समय जनता की सेवा में लगा दूंगा।

सवाल: यदि एमएलसी का चुनाव जीतते हैं तो आपकी प्राथमिकता क्या रहेगी?

जवाब: राकेश पाण्डेय अपनी जिंदगी में हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे में विश्वास किया है। आपके सवाल का यही जवाब दूंगा कि आज कल रोजमर्रा की जिंदगी में सडक़ पर हो रही दुर्घटनाओं को कैसे रोका जाये। मैंने देखा है कि दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल तड़प- तड़प कर अपनी जान गंवा देता है। ऐसे में मेरी कोशिश रहेगी कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नि:शुल्क एम्बुलेंस की व्यवस्था सुचारू रूप से करूँगा !

सवाल: राजधानी के अधिसंख्य इलाके अंधेरे में है, क्या इस पर आपकी निगाहें पड़ी है?

जवाब : देखिये, उसके लिये इलाकों का चयन कर पहले सोलर स्ट्रीट की व्यवस्था करानी चाहिये। साथ ही यह भी चिन्हित करना चाहिये कि जनता को शुद्ध पेयजल मिल रहा है कि नहीं। नही, तो सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध पेयजल के लिये इंडिया मार्का हैंडपंप एवं सोलर सिस्टम सबमर्सिबल लगवाने का भी काम करूंगा।

सवाल: शिक्षा को लेकर सरकारी स्तर पर तमाम वायदे किये जाते हैं लेकिन पूरा नहीं होता दिख रहा। सरकार किसी की भी हो, शिक्षा में नाम पर कोचिंग माफि आयों की लूट, बच्चों को कडकड़ाती ठंड में समय पर स्वेटर, जूते नहीं मिलते…। सीधी बात करें तो शिक्षा के नाम पर सरकारी खजाने तो खुले रहते हैं लेकिन उसमें लूट मची है। आप बेरोजगार नौजवानों को किस तरह से सुविधा दिलायेंगे?

जवाब : एमएलसी प्रत्याशी श्री पाण्डेय ने कहा कि सबसे पहले तो शिक्षित बेरोजगारों बेरोजगारी भत्ता दिलवाने और यात्रा भत्ता में छूट दिलाने की पूरी कोशिश करूंगा। स्नातक उत्तीर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये अभ्यर्थियों को नि:शुल्क कोचिंग व हॉस्टल की व्यवस्था कराऊंगा। श्री पाण्डेय ने यह भी कहा कि मेरी कोशिश रहेगी कि शिक्षित बेरोजगारों की आकस्मिक मृत्यु पर कम से कम पांच लाख रूपए की आर्थिक मदद सुनिश्चित कराना होगा।

सवाल: उत्तर प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। बड़ी डिग्री लेने के बाद भी नौजवान रोजगार की कतार में खड़े हैं, तो आप उन्हें किस तरह की सहुलियत देंगे?

जवाब: श्री पाण्डेय ने कहा कि शिक्षित बेरोजगारों, बी.एड. अभ्यर्थियों को जब तक रोजगार नहीं मिलता तब तक बेरोजगारी भत्ता सुनिश्चित कराने की भरपूर कोशिश करूंगा। क्योंकि ये हमारे देश की विडंबना है कि बड़े पैमाने पर डिग्रीधारक नौजवान रोजगार के चक्कर में धक्के खा रहे हैं। ये चिंता का विषय है और इसके लिये सभी को आगे आने की जरूरत है। जिन नौजवानों के अंदर टैलेंट हैए उन्हें सम्मानजनक रोजगार मिले क्योंकि ये उनका हक बनता है।

सवाल: वित्तीयहीन शिक्षकों के लिये कोई योजना?

जवाब: जी हां, वित्तीयहीन शिक्षकों का देखा जाये तो सम्मानजनक मानदेय नहीं मिल रहा है। मेरी कोशिश रहेगी कि उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिले एवं उन्हें पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दिया जाये।

सवाल : महिलाओं व बालिकाओं के लिये आप क्या सुविधा दिलाने की सोच रहे हैं?

जवाब: उन्होंने कहा कि उन्हें कम्प्यूटर प्रशिक्षण के लिये उनके निकट स्थान तक निरूशुल्क मोबाइल वैन की व्यवस्था कराने की व्यवस्था कराऊंगा।

सवाल : किसी अधिवक्ता या पत्रकार की आकस्मिक मृत्यु होने पर क्या कुछ करने के बारे में आपके जेहन में कोई विचार है, क्योंकि इन दो समुदाय के लोग कलमकार तो होते हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर माने जाते हैं ?

जवाब: एमएलसी प्रत्याशी राकेश पाण्डेय के चेहरे पर हंसी आती है…। वे कहते हैं कि आप भी पत्रकार और मैं भी कैनविज टाइम्स अखबार चला रहा हूं। मैं जानता हूं ईमानदार पत्रकार और अधिवक्ता को कितनी तकलीफ के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन ये भी जानता हूं कि दोनों वर्ग कलमकार हैं और इनसे किसी का कोई मुकाबला नहीं। क्योंकि, चाहें सत्ता हो या फि र
नौकरशाह, सभी पत्रकार और अधिवक्ताओं से ही खौफ खाते हैं। श्री पाण्डेय ने कहा कि मेरे जेहन में ये बात है और मैं चाहूंगा कि किसी अधिवक्ता या पत्रकार की आकस्मिक मृत्यु हो तो सरकार द्वारा उनके परिवार के भरण- पोषण के लिये आर्थिक मदद की व्यवस्था करायी जाये। अंत में श्री पाण्डेय ने कहा मैं अकेले ही चला था, लोग मिलते गये, कारवंा बनता गया…

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