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डीआरएम की तानाशाही: अवाम को न्याय दिलाने वाले खुद बैठें सडक़ पर…

डीआरएम एनआर की ऐंठन: न्याय दिलाने वाले रेलवे के वकील सडक़ पर बैठ कर रहे पैरवी

रेलवे के डीआरएम के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहें रेलवे अधिवक्ता

रेलवे के जज ने लिखा डीआरएम को पत्र लिखकर अधिवक्ताओं के बैठने के लिये मांगा कमरा

डीआरएम ने कहा : जज साहेब,वकीलों ने नहीं की कमरे की मांग,क्यों दूं कमरा…

डीआरएम को घसीटेंगे हाईकोर्ट में:अनिल मिश्रा

संजय पुरबिया

लखनऊ। राजधानी के उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट, चारबाग में फरियादियों को न्याय दिलाने वाले लगभग 50 वकील सडक़ पर बैठकर मामले का निस्तारण करा रहे हैं। वकीलों ने सिर्फ डीआरएम से इतनी फरियाद की कि उनलोगों के बैठने के लिये एक कमरा बना दिया जाये ताकि वादकर्ताओं की समस्याओं के निराकरण की तैयारी कर सकें लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वकीलों ने गृहमंत्री से लेकर उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम को पत्र भी लिखा लेकिन ऐसा लग रहा है मानों वे खुद चाहते हैं कि वकील सडक़ पर रहकर ही वादों का निस्तारण करायें। बता दें कि यहां पर आने वाले अस्थाई अधिवक्ता 3 आरपी,यूपी एक्ट एवं रेलवे एक्ट के मामलों को देखते हैं और प्रतिदिन सैंकड़ों मामलों का निस्तारण करते चले आ रहे हैं। चलिये,मान लेते हैं कि डीआरएम बहुत बड़े तुर्रा हैं,वे वकीलों को हल्के में लेते हैं लेकिन जब उत्तर रेलवे के अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट पत्र लिख चुके हैं,इनके मान को तो रखना चाहिये ? जज साहेब,ने अपने पत्र में खुलकर लिखा है कि ये लोग रेलवे में न्यायायिक कार्य करते हैं,इनके बैठने के लिये जगह नहीं है जिसकी वजह से ये लोग चबूतरे व नालियों पर बैठकर मामले निपटा रहे हैं ? इससे साबित होता है कि डीआरएम नहीं चाह रहे हैं कि रेलवे केस को लडऩे वाले वकीलों के लिये रेल परिसर में कहीं पर कमरा बनें जहां ये लोग बैठकर अपना काम कर सकें। इसके विरोध में सभी वकील हाईकोर्ट में डीआरएम के खिलाफ याचिका दाखिल करने जा रहे हैं और पार्टी एनआर व एनईआर डीआरएम को बनायेंगे।


उत्तर रेलवे के पूर्व जज विनय सिंह ने एक मई 2019 को डीआरएम को एक पत्र लिखा था जिसका सार यह है कि एनआर व एनईआर में केस लडऩे वाले अधिवक्ताओं को न्यायालय परिसर के बाहर ना तो बैठने के लिये जगह है,ना ही बाथरुम उपलब्ध है,फिर ये लोग कैसे केस को सही तरीके से लड़े। ये लोग न्यायालय के बाहर बने चबूतरे व नालियों पर बैठकर अपना केस देखते हैं। कई बार तो वादकारीगण वहीं पर बाथरुम तक कर देते हैं जिसकी वजह से दुर्गन्ध न्यायालय के अंदर तक आने लगता है। आपसे अनुरोध है कि अधिवक्ताओं को मूलभूत सुविधाएं दिलायी जाये। वर्ष 2021 है,कई डीआरएम बदल भी गये लेकिन जज साहेब का निवेदन स्वीकार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने बताया कि पूर्व के डीआरएम ने जब विनय सिंह से कहा था कि अधिवक्ताओं ने मुझे कोई पत्र नहीं लिखा है,जबकि अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि कई बार दोनों डीआरएम को पत्र लिखा लेकिन किसी ने हमलोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया। कहा कि हमलोग अपने रहने के लिये आरामगाह की मांग थोड़े कर रहे हैं।

एनआर व एनईआर के न्यायालयों में लगीभग 3आरपी यूपी एक्ट के मामलों की संख्या लगभग तीन हजार,जीआरपी थानों के मामलों की संख्या पांच हजार मामले विचाराधीन है। इसके अलावा लगभग 15 हजार सम्मन ट्रायल वादों का निस्तारण उक्त न्यायालयों द्वारा किया जाता है जिसकी वजह से हर न्यायालय दिवस पर लगभग 50 अधिवक्ता, 40 साक्षी गवाह,100 वादकर्ता,आरपीएफ,जीआरपी कर्मचारियों सहित न्यायालय के स्टॅाफ मौजूद रहते हैं। इस वजह से न्यायायल परिसर में बैठने क्या खड़ा होने की जगह नहीं होता है। आप ही बतायें कि हमलोग कैसे अपना काम करें। श्री मिश्रा सहित पूर्वोत्तर रेलवे न्यायालय कक्ष के बाहर खड़े दर्जनों अधिवक्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि एनआर व एनईआर के डीआरएम हमलोगों की मांग पूरी नहीं करेंगे तो हमलोग उनके खिलाफ शीघ्र हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। इसमें पार्टी दोनों डीआरएम को बनायेंगे।

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