Mon. Dec 16th, 2019

नोयडा होमगार्ड विभाग का अग्निकांड-नपेंगे कई अफसर और गुर्गे

द संडे व्यूज़,इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़  खबर का असर : मुख्यमंत्री ने नोयडा कमांडेंट ऑफिस में लगी आग में दिए जांच के आदेश

नपेंगे कई अफसर और कमांडेंट के गुर्गे

पूर्व मंत्री अनिल राजभर के समय से शुरू हुई थी भ्रस्टाचार की गाथा

मंत्री जी, नोयडा और गाजियाबाद के कमांडेंट की संपत्ति की जांच हो जाए तो उड़ जाएंगे होश

आग लगी नहीं लगाई गई है

शेखर यादव

लखनऊ। गौतमबुद्ध नगर, नोयडा में होमगार्ड विभाग के जिला कमांडेंट कार्यालय में आग लगी नहीं लगाई गई है। पूर्व कमांडेंट,वर्तमान में अलीगढ़ के मंडलीय कमांडेंट राम नारायण चौरसिया और वर्तमान में नोयडा कमांडेंट का चार्ज लेने वाले मंडलीय कमांडेंट पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। सवाल यह है कि आखिर उसी कमरे में आग क्यों लगी जहां बक्शे में पिछले चार वर्ष के दस्तावेज रखे थे ? आखिर वे लोग कौन हैं और किसके इशारे पर रात के अंधेरे में कार्यालय में घुसे और पत्रावलियों में आग लगाकर आराम से भाग निकले ? क्या इस विभाग के अफसर रामराज की कल्पना में जी रहे हैं कि रात के वक्त कमांडेंट कार्यालय का वो कमरा खुला रखते हैं जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं ? इस तरह के कई अहम सवाल हैं जिसका जवाब जांच अधिकारी और पुलिस विभाग के अफसर तलाश रहे हैं।

परिणाम क्या होगा नहीं मालूम लेकिन  द संडे व्यूज़ डंके की चोट पर कहेगा कि ये आग लगी नहीं बल्कि लगाई गई है। पूरा कुचक्र नोयडा के पूर्व कमांडेंट राम नारायण और मेरठ के मंडलीय कमांडेंट डीडी मौर्या ने मिलकर रची है। इस खेल में इनलोगों का साथ गौतमबुद्ध नगर कमांडेंट में कार्यालय कर्मचारियों ने दिया है।

द संडे व्यूज़ ने 16 सितंबर को ही गौतमबुद्धनगर में होमगार्ड विभाग में सबसे बड़े फर्जीवाड़े का होगा खुलासा शीर्षक में भ्रस्टाचार का खुलासा किया था।

सारी बातें खुलकर रखा था कि आखिर नोयडा के कमांडेंट रामनारायण कीस तरह से सांठगांठ कर जवानों का फर्जी मस्टर रोल बनवाते हैं और हर माह लगभग 20 लाख रुपए अंदर करते हैं। यह भी लिखा गया था कि उनके साथ कितने विभागीय गुर्गे थें और उनका नोयडा में कितना आतंक बरकरार है। मामले को वहां के एसएसपी ने गंभीरता से लिया और जांच करने की सिफारिश शासन से की। शासन ने मुख्यालय को निर्देश दिए कि चार सदस्यीय टीम बनाकर जांच कराकर अवगत कराए। मुख्यालय पर तैनात तेज-तर्रार अधिकारी सुनील कुमार के नेतृत्व में टीम बनायी गयी और नोयडा में पडऩे वाले सभी थानों पर गंभीरता से जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में पूरी तरह से फंसता देख नोयडा के पूर्व कमांडेंट रामनारायण और मेरठ के मंडलीय कमांडेंट डीडी मौर्या,जिन्हें नोयडा का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है,ने मिलकर आग लगवाने का काम किया। पुलिस की मानें तो जांच लगाई गई है। बात में दम है। देखना है कि आखिर इस मामले में शासन किसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है क्योंकि अभी तक के मामलों में नजर डालें तो जांच के नाम पर हमेशा छोटे लोगों को बलि का बकरा बनाकर बड़ों को बख्श दिया जाता रहा है। लेकिन मामला मुख्यमंत्री की संज्ञान में है इसलिए पूरी उम्मीद है कि भ्रस्टाचार के आकंठ में डूबे इन महाभ्रष्ट कमांडेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और यही द संडे व्यूज़ व इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ की बड़ी जीत होगी…। जै हो…

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