Tue. Sep 17th, 2019

बड़े भईया डीआईजी तो का करेंगे डीजी, कमांडेंट विजय सिंह ने फर्जी मस्टर रोल बनाकर की लाखों की कमाई

पश्चिम के हर कुएं में भांग भरा है साहेब : शासन अंधा और मुख्यालय बहरा है !

मुजफ्फरनगर कमांडेंट के गुर्गों  ने  गैरहाजिर जवानों  का फर्जी हस्ताक्षर  बनाकर निकाल लिए वेतन 

बड़े भईया डीआईजी तो का करेंगे डीजी, फर्जी ड्यूटी लगाकर कमांडेंट शासन को कर रहा गुमराह

फर्जी जवानों की डयूटी लगाने वाले गुर्गे को निकाला,एक माह बाद किया बहाल

अनिल गुप्ता
मुजफ्फरनगर। पूरब से लेकर पश्चिम तक भ्रस्टाचार की बेल इस तरह से फैली हुई है कि उससे निकल पाना जवानों के लिए मुश्किल ही नहीं असंभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदारी की बातों को तवज्जो देते हैं लेकिन क्या उस पर शासन अमल करता है ? ऐसा लगता है सीएम की बातों को एक कान से सुनकर नौकरशाह दूसरे कान से निकाल देते हैं। यही वजह है कि भ्रष्ट अफसर मौज कर रहे हैं और रत्तीभर ईमानदारी की बातें करने एवं सच्चाई का राग अलापने वालों को अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर विभाग से बेइज्जत कर बाहर निकाल दिया जाता है। उस दौरान अफसर ये भी नहीं सोचते कि अवैतनिक स्तर पर काम करने वाला एक वर्दीधारी सडक़ पर आता है तो सिर्फ वही नहीं बल्कि उसके साथ उसका पूरा परिवार भूखमरी की कगार पर पहुंच जाता है। लेकिन, अफसरों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें तो बस फर्जी ड्यूटी लगवाकर, फर्जी मस्टर रोल बनाकर हर माह लाखों रुपए कमाने वाले गुर्गे ही पसंद हैं। अफसरों के दुलारे गुर्गे ही होते हैं क्योंकि यही लोग वसूली करते हैं जिससे अफसरों के परिवार के लोग लग्जरी जीवन जी रहे हैं। इनलोगों का पेट कितना बड़ा है, नहीं मालूम…।  इस स्टोरी में इस बात का खुलासा किया जा रहा है कि मुजफ्फरनगर के कमांडेंट विजय कुमार सिंह किस तरह अपने गुर्गों से फर्जी मस्टर रोल बनवाता है और किस तरह गैरहाजिर जवानों के नाम के आगे फर्जी हस्ताक्षर करवा कर उनके हक का वेतन अपनी जेब में डाल रहा है। साथ ही जब ईमानदार जवानों ने कमांडेंट के गुर्गों द्वारा खेले जा रहे फर्जी मस्टर रोल का शिकायत करते हैं तो वो अपने गुर्गे पर प्रतिबंध लगा देता है। लेकिन,एक माह बाद उससे भी पैसा लेकर बहाल कर देता है। कहने का मतलब पश्चिम के मुज़फ्फरनगर में बैठे कमांडेंट पर किसी का खौफ नहीं दिखता। जब से वो तैनात हैं तब से ये खेल जारी है। द संडे व्यूज़ के हाथ माह मई एवं जून 2018 का असली और फर्जी मस्टर रोल लगा है जिससे उक्त बातें सच साबित हो रही है।


सबसे पहले कमांडेंट के उस गुर्गे की बात करते हैं जो शराब की तस्करी में जेल गया और एक माह बाद पैसा देकर बहाल हो गया। 2 जुलाई 2018 को कंपनी नंबर 302 के सहायक कंपनी कमांडर निशांत एवं 304 कंपनी डी के अवैतनिक कंपनी कमांडर अब्दुल सलाम ने कमांडेंट अजीत कुमार सिंह को बताया कि मई माह में मेरी डयूटी शांति व्यवस्था में पीसी हरेन्द्र शर्मा के साथ थाना मुजफ्फरनगर में आई जो कि कम्प्यूटर एनआईसी अंतर्गत लगी। साथ में डीजीपी कोटे में नरेन्द्र कुमार खेवरिया व पीसी अब्दुल सलाम के साथ कोतवाली थाने में लगी।

कंपनी कमांडर नरेन्द्र कुमार ने शांति व्यवस्था अंतर्गत होमगार्ड रेजीमेंट नंबर 1223 में मो. यूनुस एवं होमगार्ड रेजीमेंट नंबर 169 अशोक कुमार पूरे माह अनुपस्थित रहें। सहायक कंपनी कमांडर निशांत शर्मा डी नगर एवं पीसी अब्दुल सलाम को किसी भी होमगार्ड की गैरहाजिरी रपट लिखवाने के लिए साफ तौर से मना कर दिया। लेकिन माह के अंत में हमदोनों अवैतनिक अधिकारियों से झूठ बोलकर गलत तरीके से दो-दो ब्लैंक मस्टर रोल पर हस्ताक्षर कराए गए एवं इन दोनों होमगार्डों को संज्ञान में लिए बिना गलत तरीके से उनके एक माह का पूरा पैसा निकाल लिया गया।

अब खेल देखिए, कमांडेंट ने इस पत्र पर कार्रवाई की और दोषी कंपनी कमांडर नरेन्द्र शर्मा पर प्रतिबंध लगा दिया लेकिन एक माह बाद कमांडेंट ने उसे बहाल कर दिया। बताया जाता है कि कमांडेंट विजय कुमार सिंह को इसके एवज में 10 हजार रुपए एवं दो हजार रुपए रनर राजकुमार को मिले। नरेन्द्र शर्मा ही कमांडेंट का मुख्य वसूली मैन है जिस पर प्रतिबंध लगने से इन्हें काफी नुकसान हो रहा था। लेकिन कमांडेंट में कितनी हवस है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उसने पैसा लेने में अपने वसूली मैन को भी नहीं बख्शा। इसी तरह, जून माह में बड़ी संख्या में फर्जी होमगार्डों का हस्ताक्षर एवं ड्यूटी लगवाकर कमांडेंट ने वारा-न्यारा किया।डीएम कार्यालय से लेकर प्रशासनिक अफसरों के आवास पर भी गलत तरीके से होमगार्डों को लगाया गया। जहां तीन जवान लगते थें वहां पर छह होमगार्डों का फर्जी वेतन बनाकर निकाला गया। कमांडेंट ने शराब तस्करी में जेल गए पीसी मनोज कुमार ठाठ को प्रभारी बनाया है।

 

ये कलेक्ट्रेट परिसर में लगने वाले 78 होमगार्डों में से तोडक़र अफसरों के आवास पर भेज देता है। एडीएम (ई), सिटी मैजिस्ट्रेट,एसडीएम,एसडीएम कोठी,सीडीओ के यहां तीन-तीन होमगार्डों की तैनाती होती थी लेकिन उसकी जगह पर मस्टर रोल में 6 की तैनाती दिखाकर फर्जी पैसा बनाया गया है। इतना ही नहीं, होमगार्ड अशोक कुमार के पैर में चोट लगने की वजह से मार्च, अप्रैल एवं मई ड्यूटी पर नहीं आया लेकिन उसके नाम से फर्जी तरीके से तीन माह का वेतन बना और उसे निकाल भी लिया गया।
द संडे व्यूज़ के हाथ जून माह का जो मस्टर रोल लगा है उसके मुताबिक मस्टर रोल के साथ जो पीडीएफ कॉपी लगा होता है उसमें ओरिजनल कापी पर हस्ताक्षर करा लेते हैं फिर उसकी डुप्लीकेट कापी बनाई जाती है। डुप्लीकेट कापी में गैरहाजिर जवानों को उपस्थित दिखाकर पैसा बना लेते हैं। मस्टर रोल में कई जवानों का फर्जी मस्टर रोल बनाया गया है जिनके नाम क्रमश: 20 नंबर पर सरोज रानी नाम के आगे कहीं सरोज तो कहीं सरोज रानी नाम से हस्ताक्षर किया गया है। इसी तरह 4 नंबर पर तेजपाल सिंह ने 1 व 2 तारीख को अवकाश लिया 182 नंबर पर योगेश 11,12,13,14,20,21,22 मई को अवकाश पर थें लेकिन इनलोगों का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर पेमेंट निकाल लिया गया।

इसी तरह 803 नंबर राहुल कुमार,211 नंबर रईस,106 नंबर अलीजान,717 अरूण कुमार,470 नंबर रितिका,442 नंबर सरोज रानी,853 नंबर नीरज कुमार, 165 नंबर अनिल कुमार, 210 नंबर सुरेश कुमार,793 नंबर आदेश कुमार, 385 अवधेश शर्मा,775 नंबर भोपाल सिंह,273 नंबर रमेश,747 नंबर वीर सिंह, 798 नंबर नरेन्द्र कुमार गैरहाजिर थे बावजूद माह मई व जून माह में उक्त सभी लोगों के नाम से फर्जी वेतन बनाकर निकाल लिया गया। कुल मिलाकर जवानों के नाम के आगे फर्जी हस्ताक्षर कर बड़े पैमाने पर सरकारी धन कमांडेंट की जेब में समा गया।

 

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