Tue. Dec 1st, 2020

बांदा-दिन में करते हैं खेतों में काम,सारी रात बैठकर बचाते हैं अपनी फसल: ग्राम प्रधान

सरकार,आप ही बताओ आवारा जानवरों से किसान कैसे बचाये अपनी फसल

जब फसल ही नहीं बचेगी तो कैसे होगी आय दुगनी

पंकज यादव
बांदा। उत्तर प्रदेश में यदि किसी ने गाय माता को मारा तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है। ये अलग बात है कि लोग अपने गाय माता को दूध दुहने के बाद आवारा जानवरों की तरह छोड़ देते हैं। लेकिन क्या किसी ने ये सोचा कि गांव में छुट्टा घूमने वाले आवारा पशु खेतों को तहस-नहस कर किसानों को कितना चोट पहुंचा रहे हैं ? सरकार सोच रही है कि किसानों के खेती को बचाने के लिये इन आवारा पशुओं पर रोक लगाने के लिये कोई निर्देश जारी करे। पूरे सूबे के किसान आवारा पशुओं से अपने खेतों को बचाने के लिये बेहाल हैं लेकिन कर कुछ नहीं पा रहे हैं। आज बात करते हैं बुंदेलखण्ड की। यहां पानी के लिये हाहाकार मचा रहता है लेकिन अब किसान अपनी फसलों को बचाने के लिये भगवान भरोसे हैं। आवारा पशु खेतों में घूसकर फसलों को तबाह कर रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि दिन में किसान खेतों में मेहनत करता है और रात में आवारा पशुओं से अपने फसल को बचाने के लिये जागता रहता है।

इस समय समूचा किसान वर्ग दो समस्याओं से पूरी तरह घीरा हुआ है। पहली- किसानों के सिर चढ़े कर्जे की है, जिसके चलते देश का अन्नदात आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा है। दूसरी बड़ी समस्या- किसानों के लिये आवारा पशु बने हैं। जिस कारण किसानों में जिला प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। इन आवारा पशुओं ने किसानों के नाक में दम कर रखा है। किसानों के लिये आवारा पशु भारी मुसीबत बने हुये हैं। आवारा पशु किसानों की पाली हुयी फ सलों को बर्बाद कर रहे हैं और वे अपनी आंखों से देख रहे हैं। किसानों के खेतों में आवारा पशुओं के झुंड फि रते हैं। जिस खेत में ये पशु घुस जाते हैं, वहां फ सल का सफाया कर देते हैं। रात के समय ये आवारा पशु फ सलों का ज्यादा नुक्सान करते हैं और दिन चढ़ते तक फ सलें चट कर वापस चलेे जाते हैं। यह समस्या पूरे उत्तर प्रदेश में है ।सही शब्दों में कहा जाये तो किसान एक फ सल को अपने बच्चे की तरह पर ब्रश करके पैदा करता है । पहले तो वह आवारा जानवरों से दिन- रात मेहनत करके मुश्किल से बचा पाता है फि र हमेशा उसे मौसम की मार ना पड़ जाये, इसकी चिंता सताती रहती है। जब फ सल तैयार हो जाती है तो वह मंडी में उसे लेकर जाता है तो व्यापारियों की नजर उसकी फ सल पर औने पौने दाम में खरीदने पर होती है। आप महसूस कर सकते हैं कि एक किसान के लिये कितना मुश्किल भरा सफ र होता है ,लेकिन हमारी सरकार संवेदनशील नहीं है।

बुंदेलखंड के किसान इन दिनों आवारा पशुओं की समस्या से बेहद परेशान हैं। पहली बार फ सलों को बचाने के लिए किसानों को खेतों के चारों तरफ कंटीले तार लगाने पड़ रहे हैं। खेतों की रखवाली में जरा सी चूक का मतलब है, साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाना। सूखे का दंश झेल रहे इस क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या क्यों विकराल हो रही है। यह जानने के लिये हमारे संवाददाता ने स्थानीय प्रतिनिधियों से बात की। ग्राम प्रधान कतरावल गांव, बांदा के रामनरेश ने बताया कि मैंने अपने खेतों में धान की रोपाई की है। खेतों के चारों तरफ कंटीले तार लगाया है, फि र भी आवारा पशु खेतों में घुसकर फ सल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम लोग रात भर जाग कर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, तब जाकर कुछ हद तक फ सल बच रही है। जिनके खेतों में बाड़बंदी नहीं हुई है, उनकी फ सलों को तो बहुत नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो- तीन साल से यह समस्या है जो धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है।

इस समस्या के निदान के लिए सबसे जरूरी है कि जानवरों का बंध्याकरण किया जाये। इसके लिये पोलिया जैसा अभियान चलाने की जरूरत है। पहले के समय में जानवरों से खेती होती थी और अनुपयोगी होने पर उन्हें खुला नहीं छोड़ा जाता था। अब वक्त बदल चुका है। लोग अपने मां- बाप को ही नहीं खिला पाते तो जानवरों को क्या खिलायेंगे। इसलिये उन्हें खुला छोड़ देते हैं।उत्तर प्रदेश में बूचडख़ानों को बंद करने से भी कुछ हद तक समस्या बढ़ी है। बांदा जिले में पिछले साल सरकार ने मांस की दुकानें बंद करवा दी थी। इसका असर यह पड़ा कि जानवरों का कोई खरीदार नहीं रहा।

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