Sun. Oct 25th, 2020

महिला दिवस पर विशेष : इसरो में नारी सशक्तिकरण

दिव्या श्रीवास्तव

लखनऊ

मिशन मंगलयान

रितु करढाल: इसरो में कई समस्याओं को विचार- विमर्श से सुलझाने वालीं रितु, दो बच्चों की मां हैं, लेकिन बावजूद इसके वे ज्यादातर सप्ताहांत इसरो में बिताती हैं। जब वे छोटी थीं, तब वे यह देखकर आश्चर्यचकित होती थीं कि चंद्रमा बड़ा और छोटा कैसे होता है। उन्हें हमेशा से चंद्रमा कौतुहल का विषय लगता है जिससे जुड़े कई सवाल उनके दिमाग में थे। लेकिन अब सदियां बीत जाने के बाद वे मंगलयान मिशन की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर हैं। बचपन में ही अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में हर छोटी- बड़ी जानकारी पढऩे के बाद आज वे इसरो के जाने माने इस मिशन की प्रमुखों में से एक हैं।

मौमिता दत्ता : मौमिता ने बचपन में चंद्रयान मिशन के बारे में पढ़ा था, और आज वे मंगलयान मिशन के लिए बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर काम कर रहीं हैं। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से प्रायोगिक भौतिक विज्ञान में एम.टेक की पढ़ाई की है। वर्तमान में वे मेक इन इंडिया का हिस्सा बनकर प्रकाश विज्ञान के क्षेत्र में देश की उन्नति के लिये टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

नंदिनी हरिनाथ : नंदिनी हरिनाथ अपनी पहली नौकरी के तौर पर इसरो में शामिल हुयी थीं और आज 20 साल हो गये वे निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर हैं। वे स्टार ट्रैक सीरिज को देखने के बाद विज्ञान विषय पढऩे के लिए प्रेरित हुयीं। शिक्षकों एवं इंजीनियरों के परिवार से होने के कारण विज्ञान और तकनीक के प्रति उनका स्वभाविक झुकाव था। आज एक इसरो में डिप्टी डायरेक्टर होते वे 2000 रूपए के नोट पर प्रकाशित मंगलयान मिशन का चित्र देश गौरवान्वित महसूस करती हैं। वे बेहद परिश्रम करती हैं। बच्चे होने के बावजूद वे लांचिंग से पहले कुछ दिनों तक घर नहीं गईं।


अनुराधा टी.के. : अनुराधा जियोसेट प्रोग्राम डायरेक्टर के तौर पर इसरो में सबसे वरिष्ठ महिला अधिकारी हैं। उनकी उम्र लगभग 9 साल रही होगी, जब उन्होंने यह जाना कि चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग थे। बस यही था एक अंतरिक्ष यात्री बनने का उनका पहला पाठ, जिससे वे सम्मोहित हुईं। एक वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते वे इसरो की हर महिला वैज्ञानिक के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। विद्यार्थी जीवन में उन्हें तार्किक विषयों को पढऩे में अधिक रूचि थी, बजाये रटने  या याद करने वाले विषयों के। आज वे इसरो के बेहद महत्वपूर्ण विभाग की प्रमुख होते हुये भी अपना वही तार्किक दिमाग लगाती हैं। उनका कहना है कि यहां समानता के व्यवहार के चलते कई बार उन्हें याद नहीं होता कि वे एक महिला हैं या अलग हैं।

एन. वलारमथी: भारत के पहले देशज राडार इमेजिन उपग्रहए रिसेट वन की लांचिंग का एन. वलारमथी ने प्रतिनिधित्व किया है। टी.के अनुराधा के बाद वे इसरो के उपग्रह मिशन की प्रमुख के तौर पर वे दूसरी महिला अधिकारी हैं। 52 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने प्रदेश तमिलनाडु को गौरवान्वित किया है। एनण्वलारमथी ऐसी पहली महिला हैं जो रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट में प्रयुक्त मिशन की प्रमुख हैं।

 

मीनल संपथ : मंगलयान कक्षीय मिशन के लिए दिन में 18 घंटे काम करने वाली मीनल संपथ, इसरो की सिस्टम इंजीनियर के तौर पर 500 वैज्ञानिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं। पिछले दो सालों में उन्होंने रविवार और शासकीय अवकाशों को लगभग अलविदा की कह दिया। लेकिन इस समझौते का फ ल भी उन्हें मंगल मिशन की सफ लता के तौर पर सबसे बड़ी खुशी के रूप में मिला। अब उनका अगला लक्ष्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान में पहली महिला डायरेक्टर बनना है।

 

कीर्ति फौजदार : कीर्ति फौजदार इसरो की कम्प्यूटर वैज्ञानिक हैं जो उपग्रह को उनकी सही कक्षा में स्थापित करने के लिये मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी पर काम करती हैं। वे उस टीम का हिस्सा हैं, जो उपग्रहों एवं अन्य मिशन पर लगातार अपनी नजर बनाए रखती है। कुछ भी गलत होने पर सुधार का काम वही करती हैं। उनके काम का समय कुछ अनियमित सा है, कभी दिन में तो कभी रात भर। वे बिना डरे शांति से काम करती हैं क्योंकि उन्हें बस अपने काम से प्यार है। कीर्ति भविष्य में इसरो की बेहतर वैज्ञानिक बनने के लिए एम.टेक करना चाहती हैं।

टेसी थॉमस : टेसी, भारत की वह मिसाइल महिला हैं जिसने अग्नि4 और अग्नि 5 मिशन में प्रमुख सहभागिता दी। टेसी थॉमस इसरो के लिये नहीं बल्कि डीआरडीओ के लिए तकनीकी काम करती हैं। लेकिन वे इस लिस्ट में शामिल होने योग्य हैं। यह उनका परिश्रम और समर्पण ही है जो भारत को आईसीबीएमएस के साथ अन्य देशों के खास समूह का हिस्सा बनाने में सहयोगी रहा। अपनी उपलब्धियों के कारण ही वे मीडिया में अग्निपुत्री के नाम से भी जानी गयीं। वर्तमान में 16 हजार से भी ज्यादा महिलाएं इसरो के लिए काम कर रही हैं और प्रगति कर रही हैं। इस बात की कल्पना आसान है कि इसरो में पूरी तरह से पुरुषों का समावेश हैए क्योंकि अब तक इसरो के सभी 7 प्रमुख पुरुष ही रहे। लेकिन सच तो यह है कि हजारों महिलाएं हमारे प्रमुख अंतरिक्ष संस्थान के लिए कठिन परिश्रम कर रही हैं।

 

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