Sun. Oct 20th, 2019

मुख्यमंत्री का ओएसडी बन ऐंठते थे रकम, अफसर भी खाते थे खौफ

व्हाट्स एप डीपी में राजकीय चिन्ह 
सचिवालय का फर्जी परिचय पत्र बनवाया था  
लखनऊ
मुख्यमंत्री का ओएसडी बनकर नौकरी, ट्रांसफर, पोस्टिंग और टेंडर दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले दो शातिर जालसाजों को क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। वह लोग माननीयों के फर्जी लेटर हेड का इस्तेमाल व सीयूजी सीरीज के नंबरों से फोन करके अफसरों पर अनर्गल काम करने का दबाव बनाते थे। इनके पास से 1 लाख 58 हजार रुपये की पुरानी करंसी, छह मोबाइल फोन व भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि जालसाजों ने खुद को मुख्यमंत्री का निजी सचिव, विशेष कार्याधिकारी बताकर डीएम बांदा और गाजियाबाद के सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) को फोन करके अवैध काम करने का दबाव बनाया था। 1 अक्टूबर को इसकी शिकायत मिलने पर गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपियों की धर-पकड़ के लिए सीओ दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम गठित की गई थी। शुक्रवार को दोनों जालसाजों को कैबिनेटगंज रेलवे क्रासिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान सुलतानपुर के अखण्ड नगर निवासी आलोक दुबे और दुर्गेश सिंह के रूप में हुई। मौजूदा समय में दोनों गोमतीनगर के विकल्पखण्ड और विजेन्द्रखण्ड इलाके में रह रहे थे। गैंग के दो सदस्य आजमगढ़ निवासी संजय चतुर्वेदी और अयोध्या के संतोष तिवारी अभी फरार हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

सीओ दीपक कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों को उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत आने वाले सभी राजकीय विभागों की जानकारी थी। उन लोगों ने सीयूजी सीरीज के मोबाइल नंबर भी ले रखे थे और इन्हीं नंबरों से अधिकारियों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वह लोग खुद को सीएम का ओएसडी बताकर अधिकारियों को अर्दब में लेते थे और मनमाफिक काम करवाने का दबाव बनाते थे। अफसर के न-नुकुर करने पर वह लोग मुख्यमंत्री के नाम की धमकी देते थे। सूत्रों की मानें तो आरोपियों ने कुछ अफसरों को झांसे में लेकर उनसे काम भी करवा लिया था। सीओ ने बताया कि ठगों ने व्हाट्स एप डीपी पर शासन के राजकीय चिन्ह की फोटो लगा रखी थी। इससे लोग आसानी से उनके प्रभाव में आ जाते थे।

आलोक और दुर्गेश ने बताया कि वह लोग संविदा नौकरी, तबादला, तैनाती और टेंडर दिलाने के नाम पर लोगों से रुपये वसूलते थे। फिर काम करवाने के लिए अलग-अलग तरीकों से सम्बंधित अधिकारी पर दबाव बनाते थे। उनके पास से भारी मात्रा में जाली आदेश पत्र और आवेदन पत्र बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने कई बार पुलिस व आरटीओ अधिकारियों को फोन करके पकड़े गए भारी वाहन भी छुड़वाए थे।

इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि फोन पर काम न होने पर आरोपी दूसरा पैंतरा अख्तियार करते थे। वह लोग सांसद, मंत्री व उ.प्र. शासन के जाली लेटर हेड का इस्तेमाल करके सम्बंधित विभाग में सिफारिशी पत्र भेजते थे। उनके पास से 9 जाली लेटर हेड बरामद हुए हैं। इसके अलावा आरोपियों ने सचिवालय के फर्जी परिचय पत्र भी बनवा रखे थे। सभी दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है।

जालसाजों के पास से 1 लाख 58 हजार रुपये पुरानी करेंसी बरामद हुई है। इसमें 164 नोट 500 रुपये के और 76 नोट 1000 रुपये के हैं। आरोपियों ने पूछताछ में कबूला कि गैंग के सदस्य संजय चतुर्वेदी ने किसी से पुराने नोट बदलवाने का ठेका लिया था। पुलिस इसकी जांच कर रही है कि गैंग को पुराने नोट किसने दिए। इंस्पेक्टर ने बताया कि जालसाजों के पास से दो डायरी मिली है। पहली डायरी में अधिकारियों और नेताओं के मोबाइल नंबर और पदनाम दर्ज हैं। वहीं, दूसरी डायरी में उन क्लाइंट्स के नाम और नंबर लिखे हैं जिनसे उन लोगों ने काम करवाने के एवज में रुपये लिए थे।

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