Tue. Mar 2nd, 2021

यूपी: भाजपा नेता कबीर ने देखा विधायकी का सपना और भून दिया गया गोलियों से…

बस्ती में मारे गये कबीर को इंसाफ दिलाने लखनऊ पहुंची बहन रंजना तिवारी,नहीं मिला इंसाफ

छात्र राजनीति में उभरते कबीर की दिनदहाड़े कर दी गयी हत्या

भाजपा नेता कबीर ने देखा विधायकी का सपना और भून दिया गया गोलियों से…

कबीर की बहन रंजना तिवारी का सवाल –

1- पुलिस ने दो हत्यारों को गिरफ्तार किया,क्यों नहीं लिया रिमांड पर?

2- मुख्य आरोपियों में भाजपा नेता अभिजीत सिंह को किसके कहने पर छोड़ रहे हैं बस्ती के कप्तान ?

3- आखिर पुलिस क्यों नहीं उगलवा पा रही है मास्टर माइंड का नाम?

4- जेल में बंद हत्यारे अनुराग तिवारी,अभय तिवारी से क्यों नहीं पुलिस पूछ रही साजिशकर्ताओं का नाम ?

5-आखिर किसके इशारे पर पुलिस कप्तान हेमराज मीणा नामजद अभियुक्तों पर बरत रहे हैं नरमी ?

6-सांसद हरीश द्विवेदी ने किया था दावा,करायेंगे एसआईटी जांच, हुआ क्या ?

7- अखिलेश यादव से मांग:जाति विशेष के अपराधियों को बचा रही सरकार,मुझे न्याय चाहिये ? 

अनंत सक्सेना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार में उभरते भाजपा नेता एवं एपीएनपीजी कॅालेज के पूर्व अध्यक्ष आदित्यनारायण तिवारी उर्फ कबीर की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है। खूब हंगामा,शोर-शराबा मचा और भाजपा सरकार के सांसद सहित कानून मंत्री ने इस हत्याकांड का खुलासा शीघ्र कराने और एसआईटी से जांच कराने की बातें कहीं। इस हत्याकांड में पुलिस ने दो अभियुक्त अनुराग तिवारी और अभय तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दूसरी तरफ,परिजनों द्वारा धरना-प्रदर्शन करने व भूख हड़ताल पर बैठने से दबाव में आयी पुलिस-प्रशासन एक अभियुक्त अभिजीत सिंह भाजपा नेता को गिरफ्तार कर लिया। खास बात तो यह है कि अभिजीत सिंह को एसटीएफ और पुलिस ने हत्या के मामले में नहीं बल्कि आशियाना थानाक्षेत्र में कट्टा के साथ गिरफ्तारी दिखाने की बहादुरी की और जेल भेज दिया। बताया जाता है कि अभिजीत ङ्क्षसह बेल पर छूट गया और कबीर के परिजनों को जान से मारने की धमकी भी दे रहा हे। चौंकाने वाली बात यह भी है कि भाजपा सरकार में जब कानून मंत्री से लेकर बस्ती के सांसद ने इस हत्याकांड का खुलासा करने के लिये एसआईटी जांच बिठाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाने की बात कही थी तो एक साल तीन माह गुजरने के बाद अभी तक जांच क्यों नहीं शुरु की गयी ? जब परिवार वालों से एसआईटी से जांच कराने की बात कही गयी तो सीबीसीआईडी में मामला क्यों भेज दिया गया ? सवाल यह भी है कि जब दो हत्यारे गिरफ्तार कर लिये गये तो पुलिस ने उन्हें रिमांड पर लेकर इस हयाकांड के मास्टर माइंड का नाम अभी तक क्यों नहीं उगलवाया? बहुतेरे सवाल है लेकिन यही कहुंगा कि जब भाजपा सरकार में जहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, कबीर हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने अभी तक क्यों नहीं किया,क्योंकि इस सरकार और शासन के अफसरानों ने न्याय ना मिलने पर मृतक कबीर की बहन रंजना तिवारी सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पत्र लिखकर इंसाफ की गुहार लगा रही है। रंजना का यह भी आरोप है कि कबीर की हत्या एक पॉलीटिकल मर्डर है…। इसीलिये सरकार इसका खुलासा नहीं कर रही है।

 

कबीर की बहन रंजना तिवारी ने  2 जनवरी 2020 को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखा,जिसमें कबीर हत्याकांड की पूरी दास्तां है। पत्र में लिखा है कि 9 अक्टूबर 2019 को दिन-दहाड़े सुबह 10.30 बजे एपीएन कॅालेज के  पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आदित्य नारायण तिवारी उर्फ कबीर की हत्या कर दी जाती है। हत्या ने मानों यूपी में भूचाल सा ला दिया।  मौके पर वारदात करके भाग रहे दोनों भाड़े के हत्यारों अनुराग तिवारी व अभय तिवारी को लोगों ने पकडक़र पुलिस को सौंप दिया लेकिन तत्कालीन एसएसपी,बस्ती पंकज ने इन पेशेवर हत्यारों को मासूम बच्चा बता कर बचाने की भरपूर कोशिश की लेकिन जनता के आक्रोश को देख व एसएसपी की भूमिका संदिग्ध लगने पर शासन को उन्हें कुर्सी से हटाकर उनकी जगह हेमराज मीणा को बस्ती का एसएसपी बनाया गया। पकड़े गये अपराधियों से प्रशासन आज तक उन अज्ञात अपराधियों एवं साजिशकर्ता के बारे में नाम नहीं उगलवा पायी और ना ही नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर पायी है। पत्र में आरोप है कि श्री मीणा ने भी जानबूझ कर नामजद अभियुक्तों के साथ लगातार नरमी बरती लेकिन दबाव बढऩे पर प्रशासन ने हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में एक आरोपी जो कि बीजेपी युवा मोर्चा का महामंत्री अभिजीत सिंह बताया जाता है, को लखनऊ में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कोई कार्रवाई ना होते देख परिवार न्याय की खातिर आमरण अनशन पर बैठ गये। आमरण अनशन के तीसरे दिन सरकार के न्याय मंत्री बृजेश पाठक बस्ती पहुंचे और उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुये घोषणा की कि कबीर हत्याकांड की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवायेंगे और जांच एसआईटी करेगी ताकि जल्द पर्दाफाश हो सके। उसके बाद पांचवे दिन बीजेपी सांसद हरीश द्विवेदी,एसएसपी हेमराज मीणा पहुंचे। सांसद ने यह कहकर हमलोगों का अनशन खत्म कराया कि योगी सरकार इस मामले की एसआईटी जांच कराने जा रही है। वहीं एसएसपी ने दावा किया कि 15 दिनों में पूरी साजिश से पर्दा उठा देंगे लेकिन हुआ वही ठाक के तीन पात…।

खास बात तो यह है कि पीडि़त पक्ष द्वारा अनशन खत्म करने के बाद ना तो सरकार ने एसआईटी का गठन किया और ना ही सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश, बल्कि मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने की सिफारिश कर दी जिसकी मांग पीडि़त पक्ष ने कभी की ही नहीं। इससे साबित होता है कि सरकार की तरफ से इस मामले में फंस रहे बड़े नाम को दबाने का इशारा शासन के अफसरों को कर दिया गया है। यही वजह है कि हत्यारों का मनोबल इतना बढ़ गया कि उनके गुर्गों ने मामले की पैरवी कर रहे कबीर के बड़े भाई विवेक नारायण तिवारी उर्फ  तुलसी को भी दो बार जान से मारने की कोशिश की। तुलसी के ऊपर 25 जुलाई 2020 एवं 5 जनवरी 2021 को दो बार प्राणघातक हमला किया गया लेकिन पुलिस मौन धारण कर बैठी है। शायद इस बार भी कबीर की तरह किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही हो। आज लगभग एक साल तीन  महीने बाद भी कबीर हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता एवं आरोपी स्वतंत्र घूम रहे हैं एवं पीडि़त परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

कबीर हत्याकांड एक उभरते हुए  ऊर्जावान युवा नेतृत्व  एवं  देश के  राजनीतिक भविष्य का भी कत्ल है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन एवं सरकार के द्वारा दिखायी जा रही उदासीनता प्रदेश में कानून व्यवस्था पर एक प्रश्न चिन्ह लगाती है। कबीर के पिता शिव प्रसाद तिवारी  द्वारा उप- मुख्यमंत्री को इस हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश करने के लिये 30 अक्टूबर 19 को पत्र लिखकर निवेदन किया था। कबीर के बड़े भाई विवेक तिवारी पर दो बार जानलेवा हमला करने के संबंध में कबीर की बहन रंजना तिवारी द्वारा पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की गयी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस हत्याकांड में फंस रहे बड़े नाम को दबाने के लिये खुलासा नहीं करा रही है। मुझे पूरी संभावना है कि कबीर की हत्या साधारण नहीं बल्कि पॉलीटिकल मर्डर है, इसमें मास्टर माइंड का नाम सबके सामने खुलना चाहिये। रंजना ने यह भी सवाल उठाया कि जब योगीराज में भाजपा कार्यकर्ता ही सुरक्षित नहीं हैं तो फिर जनता कैसे सुरक्षित रहेगी। यही वजह है कि किसी तरह से इंसाफ ना मिलने पर मैंने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को 3 जनवरी 2019 को पत्र लिखकर इंसाफ की गुहार की थी

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