Thu. Aug 6th, 2020

यूपी में भ्रष्टाचार: ‘सपा’ सरकार में सहकारिता के ‘पाप’ पर चटख रंग चढ़ा रही ‘भाजपा सरकार’

सहकारिता,पीसीएफ में अरबों रुपये का भ्रष्टाचार,सारी पत्रावलियां सौदेबाजी कर, कर दी गयी दफन

भर्ती में घनघोर अनियमितता,करोड़ों रुपए लेकर अफसरों ने बनायी अकूत संपत्ति

जांच एजेंसियों को बिठाया गोद में,नोटों की गड्डियां फेंक दबवायी बड़ी जांच

मिल मालिक,खाद्यान्न माफियाओं और अफसरों के कॉकटेल से होता है घोटाला

द संडे व्यूज़ 2011 से अब तक पीसीएफ,सहकारिता में हुये घोटालों,भर्ती में गोल-माल का करेगा पर्दाफाश

संजय पुरबिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव बाद जिस तरह से सरकारी इमारतों का रंग बदल जाता है,सत्ता में आने वाली दल के दफ्तरों पररौनक मौज करने लगती है,ठीक उसी समय नौकरशाहों की फौज नये मंत्रियों के साथ याराना सा संबंध बनाकर लाखों नहीं करोड़ों का सब्जबाग दिखाकर उन्हें सोते-जागते कई करोड़ के मालिक होने का अहसास कराने लगते हैं। नौकरशाह और माननीयों के काकटेल के बाद इसमें शामिल होने लगते हैं,उनके वे गुर्गे जो होते तो निचले स्तर के अधिकारी यानि एलायड पीसीएस,पीसीएस वगैरह-वगैरह ये लोग टीम का चयन करते हैं कि कौन,कैसे कितना लाभान्वित करा सकता है। अब आते हैं कि ऐसा कौन-कौन सा विभाग है जहां एक से लेकर 10 करोड़ घोटाले की कोई अहमियत नहीं है। प्रमुख तौर पर सहकारिता,पीसीएफ,एफसीआई,पीसीयू,उत्तर प्रदेश भंडारण निगम सहित कई एजेंसियां हैं।


द संडे व्यूज़ ने लखीमपुरखीरी  में 100 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश क्या किया,विभाग के अफसरों,खाद्यान्न माफियाओं और सहकारिता विभाग के अधिकारी इस तरह से मातम मना रहे हैं मानों किसी सगे की मौत हो गयी हो। खासकर लखीमपुरखीरी में तैनात अफसर जो इस घोटाले में 5 रुपये से लेकर 10 रुपये प्रति कुंतल का घूस लिये हैं,वे खीरी छोड़ लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं और लखनऊ के अफसर शासन की परिक्रमा। सभी की मंशा है कि किसी तरह से जांच ना हो और उनकी नौकरी बची रहे। वहीं खाद्यान्न माफिया लामबंद होकर मैनेज गेम खेल रहे हैं लेकिन द संडे व्यूज़ की निगाहें,पूरे घटनाक्रम पर लगी है और जब तक घोटाले की पटकथा अंजाम तक नहीं पहुंच जाती,लिखाड़ जारी रहेगी।
शुरूआत करते हैं लखीमपुरखीरी में तैनात सहायक आयुक्त,सहायक निबंधक रत्नाकर सिंह जिन्होंने धान खरीद में खूब नोट बटोरे। अब मामला खुल गया तो मानों उनकी रातों की नींद हराम है। भागम-भाग मचाये हुये हैं। किसी तरह उनकी नौकरी बच जाये। दरअसल, भ्रष्टाचार की रकम जब आती है तो अफसर भूल जाते हैं कि इस पैसे के पीछे किसानों की हाड़तोड़ मेहनत है। किसान दिन-रात एक कर खेतों में गेहूं उगाता है ताकि देश का पेट भर सके लेकिन भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी ये भूल जाते हैं,और देने लगते हैं खाद्यान्न माफियाओं का साथ…। लखीमपुर खीरी में अफसरों की मिलीभगत से ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है।

इस बाबत जब लखीमपुरखीरी  के सहायक आयुक्त रत्नाकर सिंह से बात की गयी तो उन्होंने उल्टे सवाल दागा कि लखीमपुरखीरी में कब और कितने का घोटाला हुआ ? मुझे तो मालूम ही नहीं ? एक माह पहले जांच हुयी थी,जिसकी रिपोर्ट अधिकारियों ने प्रमुख सचिव,सहकारिता को दे दी है। एफसीआई और सहकारिता विभाग में खाद्यान्न का काम करने वाले ठेकेदारों को खाद्यान्न माफिया कहा जाता है। माफिया शब्द ऐसे लोगों के खिलाफ करना उचित नहीं है क्योंकि इस तरह के लोगों की सोच बहुत ही निम्र स्तर के होती है…। इनकी सोच सिर्फ सरकारी योजनाओं को लूटना होता है। इन्हें नहीं मतलब, देश का किसान धनवान हो,उसका परिवार सुखी रहे,इन्हें तो बस लालची अफसरों के मुंह पर नोटों की गड्डियां मार कर घोटाले को अंजाम देना होता है। वैसे भी भाजपा राज में किसी घोटालेबाजों की नौकरी जाती नहीं,बल्कि विभाग का जो मुखिया होता है,उससे हो जाती है सौदेबाजी…। जैसा की विभागीय अफसरों ने बताया है। लखीमपुरखीरी में धान खरीद घोटाले में भी यही हो रहा है।

चर्चा इस बात की भी है कि कल शासन को कुछ रिपोर्ट भेजी गयी है। रिपोर्ट में क्या है,गोपनीय है। इन विभागों में चाहें बसपा की सरकार हो,सपा की या फिर भाजपा की,जमकर घोटाले हुये हैं और हो भी रहे हैं। अफसरों ने सारी पत्रावलियों को दबा रखा है। इस खेल में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी मिले हैं। अफसरों को मालूम है कि जांच करोड़ों कमा चुके हैं तो लाखों खर्च करने में कोई हर्ज नहीं है। जांच एजेंसियों का भी मुंह बंद कर दिया जाता है। बड़े पैमाने पर भर्तियां भी निकाली गयी,नियमों को तार-तार कर चहेतों का चयन किया गया। ये बताना जरूरी नहीं समझता कितना रेट चला होगा, आपलोग समझदार हैं।

खैर, भ्रष्टाचार तो अनवरत जारी रहेगा। क्योंकि जब तक कमीशनखोरी की नीति चलती रहेगी भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे लोग इसे अंजाम देते रहेंगे। फिलवक्त द संडे व्यूज़ का स्टिंग ऑपरेशन जारी है और खबरों की धार तेज रहेगी। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को भरोसा है कि जो खबर कहीं ना छपे,वो द संडे व्यूज़ में छपेगा…। लोग सारे दस्तावेज भेज रहे हैं। द संडे व्यूज़ वेब न्यूज चैनल,दसंडेव्यूज़डॉटकॉम, इंडियाएक्सप्रेसन्यूजडॉटकॉम में सहकारिता,पीसीएफ,पीसीयू में हुये 100 नहीं 400 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश करने जा रहा है।
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