Thu. Aug 6th, 2020

राजा मान सिंह हत्याकांड -डीएसपी समेत 11 पुलिस वालों को उम्र कैद

भरतपुर की जनता मनाएगी खुशी

ब्यूरो
मथुरा। एक ऐसी सजा जिसका फैसला 35 साल बाद हुआ। इस दौरान 19 जज बदल गये,1700 से अधिक तारीखें पड़ी, 18 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में लगभग 15 करोड़ खर्च हुये,सभी पुलिसकर्मियों की शरीर जर्जर हो चुकी है…। लेकिन,आखिरकार राजा मान सिंह को लंबे अंतराल के बाद न्याय मिला और अब भरतपुर की जनता इंसाफ मिलने पर जश्म मनायेगी। वहीं,राजा मानसिंह की हत्या में दोषी करार देते हुये कोर्ट ने सभी पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है। दूसरी तरफ,इस केस से बरी होने वाले पुलिसकर्मियों ने कहा कि पुलिस की नौकरी नहीं करनी चाहिये,यदि करनी भी है तो डिप्टी एसपी रैंक से ऊपर की,क्योंकि सिपाहियों की कोई नहीं सुनता…

राजा मान सिंह हत्याकांड में आठ बार फाइनल बहस हो गई थी और 19 जज भी बदल चुके थे। राजा के खिलाफ मंच और हेलीकॉप्टर तोड़ने के मामले में सीबीआइ ने एफआर लगा दी थी। 17 सौ से अधिक तारीखें भी मुकदमे में पड़ी, जबकि अनुमान के मुताबिक, मुकदमे में आराेपित बनाए गए 18 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में 15 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च भी हुआ। 35 साल बाद इस बहुचर्चित मामले में हत्‍या के दोषी करार हुए पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। राजपरिवार की तरफ से विजय सिंह, गिरेंद्र कौर, कृष्णेंद्र कौर दीपा, दुष्यंत सिंह, गौरी सिंह, दीपराज सिंह कोर्ट में मौजूद रहे। साथ ही राजस्‍थान सरकार मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को 30-30 हजार और घायलों के परिजनों को दो-दो हजार का मुआवजा देगी।

राजा मान सिंह हत्याकांड की सुनवाई जयपुर कोर्ट और उसके बाद जिला सत्र एवं न्यायाधीश की अदालत में हुई थी। करीब 35 साल तक चले इस मुकदमे को लेकर वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायण सिंह विप्लवी ने बताया कि मामले में राजा मान सिंह के खिलाफ मंच और हेलीकॉप्टर तोड़ने के मामले में सीबीआइ ने अपनी जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी थी। राजा मानसिंह के समर्थक बाबूलाल से पुलिस ने जो तमंचा बरामद दिखाया था, उसमें भी फाइनल रिपोर्ट लग गई थी। एसएचओ वीरेंद्र सिंह के बाद इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कान सिंह सिरबी ने की। इसके बाद मामला सीबीआइ को स्थानांतरित हो गया। सीबीआइ ने सिरबी समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन सीबीआइ अदालत में ये साबित नहीं कर सकी। ऐस में सिरबी समेत तीन पुलिसकर्मी दोषमुक्त हो गए। इधर, इस मामले में आठ बार फाइनल बहस को गई थी, लेकिन हर बार जज बदल गए। अब तक इस मामले में 19 जज बदल चुके हैं। जबकि 20वें जज ने इस पर अपना फैसला सुनाया है। 17 सौ से अधिक तारीखें भी पड़ीं। करीब आठ महीने तक हर 15 दिन में चार दिन लगातार इसी मुकदमे में बहस भी हुई। तब जाकर यह निर्णय आया है। अधिवक्ता के मुताबिक, राजस्थान से अभियुक्त और दोष मुक्त ठहराए गए लोगों को यहां तक लाने में अनुमान के मुताबिक पंद्रह करोड़ रुपये सुरक्षा पर खर्च हो हुए हैं।

विजय सिंह का कहना है कि मैं घटना का चश्मदीद गवाह हूं। घटना के समय में राजा साहब के साथ गाड़ी में था। मैं अकेला बचा हूं। मैंने ही इस घटना की रिपोर्ट कराई थी। मैं वादी हूं और आज तक मुकदमे की पैरवी करता रहा हूं। हमको भरोसा था कि एक न एक दिन राजा साहब का न्याय मिलेगा और आज वह मिल गया है। मैं राजा साहब का छोटा दामाद हूं और अदालत के इस फैसले से बहुत खुश हूं।

राजा साहब की सबसे छोटी बेटी कृष्णेंद्र कौर दीप का कहना है कि  हमने न्याय के लिए 35 साल तक संघर्ष किया। हमें देर से न्याय मिला है, लेकिन हम इस अदालत के फैसले से खुश है। भरतपुर की जनता भी इस फैसले से खुशी मनाएंगी। आज वह सभी इस फैसले खुश होंगे, जो राजा मानसिंह से लगाव रखते हैं। कहते हैं कि देर हैं पर अंधेर नहीं हैं।

गोविंद प्रसाद रिटायर्ड कॉन्स्टेबल का कहना है किपुलिस की नौकरी कभी नहीं करनी चाहिए। अगर पुलिस में नौकरी करनी है तो डिप्टी एसपी से ऊपर का अधिकारी बने। पुलिसकर्मियों की सुनवाई कहां होती है। मेरी तो सीबीआइ ने सुनी ही नहीं। इसी तरह से विकास दुबे के मामले में भी पुलिसवालों की सुनवाई नहीं होगी। अदालत ने न्याय किया है। 35 बरस किसी तरह काटे, अब सुकून मिला है।35 साल तक धक्के खाए हैं। तमाम परेशानियां झेली हैं। सीबीआइ ने भी कुछ गलतियां की हैं। मैं इस मुकदमे में बरी हो गया हूं। मेरे साथियों को ताे सजा हुई है। पुलिस की नौकरी इसलिए नहीं की थी कि ड्यूटी के दौरान मिले आदेश का पालन करने के बदले में इतने कष्ट झेलने होंगे।

35 साल का लंबा वक्त। इस दौरान बहुत कुछ बदल गया। जब राजा मान सिंह और उनके दो साथियों की हत्या हुई, तो दोषी राजस्थान पुलिस और आरएसी की नौकरी कर रहे थे। मुकदमे के ट्रायल के दौरान ही सीबीआइ की चार्जशीट में शामिल 18 पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए। अब उम्र के आखिरी पड़ाव में हैं। ज्यादातर की उम्र सत्तर बरस पार कर गई है। ऐसे में कई दोषियों का शरीर भी साथ नहीं दे रहा। मंगलवार को कोर्ट लाए गए, तो एसटीएफ और पुलिस ने उन्हें सहारा दिया।राजा मान सिंह हत्याकांड में दोषी पाए गए तत्कालीन डीएसपी कान सिंह भाटी की उम्र अब 82 बरस की हो गई है। वहीं, तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र सिंह 78 साल के हैं। सुखराम की उम्र 72 है। अन्य दोषियों की उम्र भी 7 दशक पार कर चुकी है। ऐसे में दोषी करार दिए गए,कई मुल्जिम तो ठीक से चल भी नहीं सकते। मंगलवार को एसटीएफ वज्र वाहन से सभी मुल्जिमों को लेकर कोर्ट परिसर पहुंची। एक मुल्जिम वाहन से उतरते ही लड़खड़ाने लगे, ऐसे में उन्हें एसटीएफ ने सहारा दिया। वह चलने की स्थिति में नहीं थे, तो उन्हें बैठाया, पानी पिलाया, फिर सहारा देकर कोर्ट रूम तक ले गए। यही हा

इनको हुई सजा :

-तत्कालीन सीओ डीग कान सिंह भाटी निवासी हड्डा हाउस, एनवर्सर बीकानेर

-तत्कालीन एसएचओ डीग वीरेंद्र सिंह निवासी बहरोर जाट थाना मंडावर अलवर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल सुखराम निवासी भूडा दरवाजा थाना डीग, भरतपुर।

-तत्कालीन हैड कांस्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन जीवनराम निवासी गांव बरानेकुर्द भोपालगढ़ जोधपुर

-तत्कालीन हेड कॉन्स्टेबल आरएसी बी कंपनी छठवीं बटालियन भंवर सिंह निवासी गांव चांदनी थाना शंकरा जोधपुर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन हरी सिंह निवासी ग्राम धीरा थाना ढांचू जोधपुर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन शेर सिंह निवासी गांव निम्बारा थाना सुरणलिया नागौर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन छत्तर सिंह निवासी गांव कटूकाला थाना शेरगढ़ जोधपुर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन पदमाराम निवासी सुखमंडला थाना देवू जोधपुर

-तत्कालीन कॉन्स्टेबल आरएसी ई कंपनी छठवीं बटालियन जगमोहन निवासी गांव खाकावाली थाना नगर भरतपुर

-इंस्पेक्टर, सेकंड एसपी ऑफिस रवि शेखर मिश्रा निवासी 44 संजय कॉलोनी मेहरू नगर जयपुर

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