Sun. Oct 25th, 2020

लखीमपुरखीरी कोआपरेटिव अर्बन बैंक में मंत्री,सांसद,विधायक,एआर के रिश्तेदारों की बैकडोर भर्ती क्यों नहीं हुयी निरस्त ?

आखिर क्यों बंद हो रहे हैं सहकारिता अर्बन कोआपरेटिव बैंक ? मुख्यमंत्री जी, खीरी में हुयी बैकडोर भर्ती क्यों दबा दी गयी ?

यूपी में दो दर्जन से अधिक अर्बन बैंकों में जड़ दिया गया ताला,नहीं चेत रहे सहकारिता विभाग के अधिकारी

संजय पुरबिया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा बैंक है जिसे अफसरों ने घर की खेती बना रखा है। जिसको जो मन किया बोया, ऊपरी कमाई की फसल उगाया और कमीशन का माल अपने एकाउंट में डाल लिया। लंबे समय से खेती होती चली आ रही है लेकिन अफसरों ने बिना खाद डाले खेत की इतनी जुताई की कि आखिरकार वहां पर तालाबंदी हो गयी। उस खेत का नाम अर्बन कोआपरेटिव बैंक है और यहां कमीशनखोरी की खेती तैनात अधिकारी कर रहे थे। अधिकारियों ने जमकर वित्तीय अनियमिता की,मनमानी तरीके से कर्मचारियों की भर्ती करने के साथ ही आरबीआई की गाईड लाइन को नजर अंदाज किया। यही वजह है कि मुनाफा में चलने वाली लगभग दो दर्जन से अधिक अर्बन कोआपरेटिव बैंकों पर ताला लग गया और अब लखीमपुरखीरी के अर्बन कोआपरेटिव बैंक भी उसी राह पर चलती दिख रही है। खीरी में भी बैंक के डायरेक्टर,क्षेत्रीय विधायक ने लगभग सात माह पूर्व ही शासन में लिखित शिकायत कर बैंक में बैकडोर से हुयी भर्ती सहित वित्तीय अनियमितताओं के बारे में बताते रहें लेकिन बड़े अधिकारी कान में सरसों का तेल डालकर बैठे रहें। लखीमपुरखीरी अर्बन कोआपरेटिव बैंक में सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने अपनी नातिन अंशिका गंगवार, लखीमपुरखीरी के सांसद टेनी मिश्रा की बेटी रश्मि मिश्रा, धौरहरा, खीरी के विधायक बाला प्रसाद अवस्थी का पोता अचल अवस्थी,खीरी में तैनात सहकारिता विभाग के एआर रत्नाकर सिंह के भाई खुशाल सिंह, मोहम्मदी के विधायक लोकेन्द्र प्रताप सिंह के भांजा सहित 27 लोगों की बैकडोर से भर्ती की गयी है। और दूसरी तरफ, बेरोजगार झक मारते रहें। अब इसे क्या कहा जाये,राम राज,जीरो टॉलरेंस या फिर 100 पर्सेंट करप्शन ? इसका जवाब आप ही लोग दें…

द संडे व्यूज़ ने को शीर्षक से खुलासा किया था कि 9 फरवरी 2020 को ही शीर्षक लखीमपुरखीरी अर्बन कोआपरेटिव बैंक का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला सहकारिता मंत्री की नातिन,सांसद की बेटी,विधायक के पोते और भंाजे का हुआ चयन शीर्षक से खुलासा किया था। उसके बाद सत्ता से लेकर शासन में जमकर हंगामा मचा थ। जांच बैठी लेकिन सभी जानते हैं कि मामला सरकार के मंत्री,सांसद,विधायक से के परिवार से जुड़ा था इसलिये पत्रावली दबा दी गयी। लेकिन द संडे व्यूज़ सरकार की नीति के खिलाफ चलकर बेरोजगारों का हक मारने वाले माननीयों के खिलाफ हल्ला बोल जारी रखेगा…।  यूपी की सियासत में एक बात अजीब सी लगती है। सत्ता पाने की लालसा में राजनैतिक दलों के लोग तमाम तरह के झूठे वायदे करते हैं। सरकार बनने के बाद जब ये लोग माननीय बन जाते हैं तो उन्हें अपने ही क्षेत्र के लेाग बोझ की तरह लगने लगते हैं। कोई अपना काम लेकर जाता है तो उसे ये लोग हिकारत भरी नजरों से देखते हैं मानों वे अपने दम पर चुनाव जीते औरमाननीय,सांसद या विधायक बने हों। अधिकांश का मकसद साफ होता है कि सत्ता में आ गये हैं तो पहले अपना और अपने नाते-रिश्तेदारों का भला करो…। इसी सोच ने आज यूपी के लगभग दो दर्जन से अधिक अर्बन बैंकों में ताला जड़वा दिया है। सवाल यह है कि आखिर क्यों बंद हो रहे हैं अर्बन कोआपरेटिव बैंक? इसके लिये जिम्मेदार कौन है और उनके खिलाफ क्यों नहीं सरकार करती है सख्त कार्रवाई ?

बता दें कि लखनऊ की सबसे बड़ी एचसीबीएल बैंक बंद हो गयी है। बताया जाता है कि यहां पर अफसरों ने जमकर वित्तीय अनियमितता की और मनमाने तरीके से खर्चे किये जिसकी वजह से बंद में तालाबंदी हो गयी। यहां पर तैनात अफसर इतने मनबढ़ थे कि उन्होंने आरबीआई की गाईड लाइन को ही नहीं माना। विशेष बात तो यह है कि इस बैंक के प्रमोटर में से एक पूर्व मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता भी प्रमोटर थे। गाजियाबाद के महामेधा बैंक में भी सात साल पहले ही आरबीआई ने कार्यप्रणाली पर आपत्ति दर्ज करायी थी लेकिन अफसरों ने कान मे कडवा तेल डाल रखा था। हाल ही में जब बैंक बंद कर दिया गया तब सहकारिता विभाग के निबंधक की आंख खुली और उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है। इसी तरह,लखनऊ का अवध बैंक,कानपुर के मर्चेंटाइल बैंक सहित तमाम बैंकों में ताला जड़ दिया गया है। कुछ इसी तरह लखीमपुर खीरी के अर्बन कोआपरेटिव बैंक में भी नियमों को दरकिनार कर लोन देना,बैकडोर से भर्ती करने सहित कई ऐसे काम किये जा रहे हैं जिससे यहां भी ताला बंदी से हालात दिख रहे हैं।

जब द संडे व्यूज़ ने खुलासा किया था तो उसके बाद लखीमपुर अर्बन बैंक में हुये भर्ती घोटाले की गूंज सत्ता के गलियारों से लेकर नौजवानों और बेरोजगारों में सुनाई दी लेकिन शायद मुख्यमंत्री जी तक यह बात नहीं पहुंच पायी है। हर जगह यही चर्चा है कि मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस की बात कर रहे हैं वहीं उनके ही सरकार के मंत्री सांसद और विधायक बेरोजगारों की किस्मत से रोजगार छीन अपने रिश्तेदारों और बिरादरी के लोगों को बांट रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकारी नौकरियों के लिये योग्यता की कोई वैल्यू नहीं है? क्या सरकारी नौकरियों पर माननीयों के रिश्तेदारों का ही हक है ? हर शिक्षित बेरोजगार आज यही सवाल पूछ रहा है, क्योंकि सभी का सपना होता है कि वह पढ़-लिख कर अधिकारी बने लेकिन जब इस तरह से भेदभाव बरता जाता है तो बेरोजगार नौजवानों के सपने चूर- चूर हो जाते हैं। मामला हाई प्रोफ़ाइल होने की वजह से बैंक के डायरेक्टर से लेकर विधायक जहां भी पत्र लिख रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं हुयी। यदि इस बैंक में हुयी भर्ती घोटाले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करायी जाये तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।

बता दें कि इस भर्ती घोटाले में लाखों रुपए का खेल हुआ है। इस मामले में जब हमारे रिपोर्टर ने लखीमपुर खीरी के एआर रत्नाकर सिंह से मोबाइल नंबर 9412977684 पर लगातार प्रयास किया लेकिन उन्होंने फ ोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। रत्नाकर सिंह ने अपने भाई खुशाल सिंह का बैक डोर से भर्ती कराने में कामयाब हो गये हैं। बता दें कि इस भर्ती में सहकारिता विभाग में लखीमपुरखीरी के एआर रत्नाकर सिंह के भाई का भी बैकडोर से भर्ती हुआ है। इसकी वजह है कि इस भर्ती में उनका भाई भी भर्ती हुआ है ऐसा सूत्रों से पता चला है लाखों रुपए केस भर्ती घोटाले की आ च आज शासन तक पहुंच चुकी है लेकिन सभी चुप्पी साधे हुए हैं अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है लगता है कि इस मामले को दबाने की जुगत में लोग लगे हुए कुल मिलाकर कहा जाए तू इतने बड़े भर्ती घोटाले में जो लोग भ्रष्टाचार में शामिल है उनकी उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता उन लोगों पर बड़ी कार्यवाही की जरूरत है जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जीरो बैलेंस मीत को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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