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विश्व नीम सम्मेलन में विद्वानों ने बताये नीम के फायदे : राम महेश मिश्र

लखनऊ।
राजधानी के कृषि भवन में विश्व नीम सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, जल शक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह, वरिष्ठ लोकसेवी व राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम नन्दन सिंह, डीएम बांदा हीरालाल एवं अनेक पर्यावरण वैज्ञानिकों सहित अनेक विद्वान इफको,नाबार्ड सहित नीम पर काम करने वाली संस्थाएं तथा किसान मौजूद रहे। ग्लोबल नीम ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉक्टर वी. के. सिंह द्वारा नीम संरक्षण एवं विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को सराहना हुई। हमें विश्व जागृति मिशन के युगऋ षि आयुर्वेद की जानकारी देने का जहां अवसर मिला, वहीं भाग्योदय फाउंडेशन द्वारा ग्रामीण अंचलों तथा नदियों के किनारे नीम सहित अन्य पर्यावरणीय वृक्षों के विस्तार की योजना पर बात करने का मौक़ा मिला।

नीम पर्यावरण की, मानव की, पशुओं की, जीव- जन्तुओं की जीवन रेखा है। एक दर्जन हानिकारक कीट और 44 तरह की फफूंद पर नीम से नियंत्रण होता है। यह औषधीय पेड़ है। पशु आहार का ज़रिया है। अनेक सौन्दर्य प्रसाधन बनने लगे हैं यह सूखे का प्रतिरोध करता है। नीम से त्वचा के रोग ठीक होते हैं। चीन ने 14 करोड़ हेक्टेयर भू-भाग में नीम के पेड़ लगा रखे हैं। भारत पिछड़ रहा है, यहां पुराने नीम वृक्ष ही दिखाई देते हैं, नया नीम वृक्षारोपण अपेक्षाकृत बहुत कम हो रहा है। औषधीय गुणों की महत्ता की स्वीकार कर मक्का-मदीना के समीप 50 हज़ार नीम के दरख़त विकसित किये गये हैं, ताकि हजयात्री उनके नीचे बैठकर छाया भी पायें तथा स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त करें।

ग्रामीण कृषक महिलाओं ने बताया कि उन्होंने निबौली, निमकौरी से बड़े पैमाने पर रोजग़ार प्राप्त किया है। मोदी सरकार द्वारा नीम क्वोटेड यूरिया भारत भर में अनिवार्य कर दिये जाने के उपरांत निबौरी भारी पैमाने पर खऱीदी जाने लगी है, जिसकी सप्लाई नहीं हो पा रही है। यूरिया निर्माता संस्था ईफको द्वारा बड़े पैमाने पर नीम का वृक्षारोपण कराया जा रहा है, जिसमें किसानों की सहायता भी ली जा रही है। बांदा के ज़िलाधिकारी द्वारा 50 हज़ार किसानों को नीम के पौधे बांटकर उनका रोपण कराया गया। जल शक्ति मंत्री ने बताया कि नीम का रोपण जल संवर्धन में भी किया जा रहा है।

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