Wed. Jan 29th, 2020

वैभव कृष्ण की रिपोर्ट को शासन ने ढाई माह तक क्यों दबाये रखा ?

वैभव कृष्ण की रिपोर्ट को शासन ने ढाई माह तक क्यों दबाये रखा ?

क्या अपर मुख्य सचिव,गृह और डीजीपी भ्रस्टाचार को दे रहे हैं बढ़ावा

गैंग बनाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का गेम खेलने वाले आईपीएस की गूंज सुन सीएम ने बिठायी जांच

क्या यूपी में 80 लाख रुपए में हो रहे हैं आईपीएस का ट्रांसफर !

शेखर यादव

लखनऊ। गौतमबुद्धनगर,नोयडा के तेज तर्रार एसएसपी वैभव कृष्ण एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया जो खाकी पहनकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का बड़ा गेम खेल रहे थे। इस गेम में करोड़ों का वारा-न्यारा हो रहा था और इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम पांच जिलों के आईपीएस दे रहे थे। अपनी ईमानदार छवि के लिये मशहूर वैभव कृष्ण ने ढाई माह पहले अपर मुख्य सचिव,गृह और डीजीपी को पत्र लिखकर रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजयपाल शर्मा,गाजियाबाद के पुलिस अधीक्षक सुधीर सिहं,बांदा के पुलिस अधीक्षक गणेश साहा,कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक राजीव नारायण मिश्रा और सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक हिमांशु के खिलाफ दस्तावेज के साथ सारे सबूत सौंपते हुये कार्रवाई की मांग की थी। एक आईपीएस द्वारा पांच आईपीएस के खिलाफ करोड़ों रुपए के वारा-न्यारा का दस्तावेज देख शासन और डीजीपी के होश फाख्ता हो गये।

सूत्रों ने बताया कि इनलोगों ने जानबूझ कर इस मामले को दबा दिया क्योंकि उनमें से कई डीजीपी के करीबी हैं और वे ये भी जानते थे कि यदि इस मामले में जांच शुरू हुयी तो भूचाल आ जायेगा। अधिकारी ये भी जानते थे कि मामला उछला तो सरकार की जमकर किरकिरी होगी। यही वजह है कि अपर मुख्य सचिव,गृह ने मामले को दबा दिया लेकिन नोयडा से तूफानी रफ्तार से चले इस पत्रावली को एसएसपी वैभव कृष्ण ने मीडिया के सामने खुलासा कर दिया। फिर क्या,विरोधियों ने ‘छपाक ’ से इसे मुद्दा बनाया और लगे यूपी की सियासत और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने। जैसे ही इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हुयी तो उन्होंने सख्त तेवर अपनाते हुये पांचों आईपीएस का तबादला कर दिया है, वहीं वैभव कृष्ण को मीडिया में खुलासा करने पर निलंबित कर दिया गया है। इस पर आईपीएस जसबीर सिंह ने सरकार की नीति पर ही सवाल उठा दिया है। उन्होंने कहा कि क्या भ्रस्टाचार का खुलासा करने वाले यूपी कैडर के आईपीएस हाशिये पर ही रहेंगे ?

नोयडा की ग्रहदशा खराब चल रही है। पहले एसएसपी वैभव कृष्ण ने ही होमगाड्र्स विभाग में करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश किया,फिर पांच आईपीएस द्वारा गैंग बनाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग कर काली कमाई करने के कारनामों का खुलासा। लेकिन इस बार का मामला हाईप्रोफाइल था जिसकी खुलासा करना वैभव कृष्ण को भारी पड़ गया। बता दें कि लगभग ढाई माह पूर्व 2019 में गौतमबुद्धनगर, नोयडा के एसएसपी वैभव कृष्ण ने यूपी के अपर मुख्य सचिव,गृह और डीजीपी को पत्र लिखा जिसमें बताया गया कि पत्रकारिता की आड़ में पांच पत्रकार मिलकर एक संगठित गिरोह चलाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग का बड़ा खेल खेला जा रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार चारों अभियुक्त में से एक चंदन राय द्वारा अतुल शुक्ला नाम के एक व्यक्ति के साथ आईपीएस अजय पाल शर्माकी पोस्टिंग कराने के एवज में मोबाइल पर बात की गयी है। पोस्टिंग कराने के लिये 80 लाख रुपए खर्च करने की बात कही गयी है। जब अतुल शुक्ला से सख्ती से बात की गयी तो पता चला कि उसका लखनऊ में एक फर्म है जिसका काम उत्तर प्रदेश सरकार की परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है।

पब्लिसीटी के अलावा अतुल शुक्ला स्काई स्कैनर टूरिज्म नाम से ट्रैवेल एण्ड टूर एजेंसी भी चला रहा है और कुछ समय पहले ही अतुल ने क्रेक्सा बीवेरेज नाम से बीयर का प्लांट लगाने का रजिस्ट्रेशन भी कराया है। वैभव कृष्ण के पत्र में लिखा है कि पूछताछ के दरम्यान अतुल शुक्ला ने बताया कि उसका आरएसएस के कार्यकर्ता चंदन शुक्ला के करीबी संबंध है। चंदन शुक्ला आरएसएस के क्षेत्रीय सह संगठन,अवध प्रांत हैं। अतुल शुक्ला ने जो कंपनी बनायी है उसमें चंदन शुक्ला का पैसा लगा है। उक्त फर्म का कतरनिया,बहराइच में वर्ष 2019 में सडक़ निर्माण के लिए 11 करोड़ के वर्कआर्डर दिये गये हैं। पत्र में यह भी लिखा है कि अतुल शुक्ला के मोबाइल फोन पर व्हाट्सअप चैट में चंदन शुक्ला के साथ कई ट्रांसफर-पोस्टिंग के चैट उपलब्ध है। जिसमें अतुल शुक्ला द्वारा हॉस्पिटलों में नर्स,वार्ड ब्वाय और पीसीएस अधिकारी गुलशन कुमार को ईओ,बड़ौत,बागपत दिलाने सहित कई मसले है। इसी पत्र में चंदन राय और अतुल शुक्ला द्वारा पांचों आईपीएस के साथ की गयी सभी वे बातें है जिससे साबित होता है कि ये लोग गिरोह बनाकर बड़े पैमाने पर तबादले का गेम खेल रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि एसएसपी नोयडा वैभव कृष्ण ने लगभग ढाई माह पहले पत्र लिखकर पांचों भ्रष्टï आईपीएस के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन अपर मुख्य सचिव,गृह और डीजीपी ओ.पी.सिंह ने पत्रावली को दफन कर दिया था। शासन स्तर पर कोई कार्रवाई ना होते देख वैभव कृष्ण ने पत्रकारवार्ता कर इस मामले का खुलासा कर दिया। मीडिया में पांचों भ्रष्टï अफसरों के कारनामे आने के बाद इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हुयी। उन्होंने आनन-

फानन में शासन के अफसरानों की बैठक बुलायी और जांच बिठा दी। जांच में सहयोग के लिए एसटीएफ को भी लगाया गया। रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री ने नोयडा के एसएसपी वैभव कृष्ण को मीडिया में मामले को उजागर करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया वहीं पांचों भ्रष्टï आईपीएस का तबादला कर दिया गया ताकि वे जांच को प्रभावित ना करें। आखिर में सवाल यह उठता है कि भ्रस्टाचार के खिलाफ पुख्ता सबूत देने वाले एसएसपी,नोयडा वैभव कृष्णा को क्यों निलंबित किया गया ? उसका गुनाह यही था कि उसने जो खुलासा किया उसका नेटवर्क आरएसएस कार्यकर्ता और आईपीएस के बीच चल रहे ट्रांसफर-पोस्टिंग का गठजोड़ था ?

इस मसले पर आईपीएस जसबीर सिंह ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि आखिर मुख्यमंत्री की नीति क्या है? मुख्यमंत्री के नीति के मुताबिक तो पांचों आईपीएस को निलंबित कर जेल भेज देना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जसबीर सिंह यह भी लिखा कि आखिर पांचों का तबादला कर मामले का खुलासा करने वाले वैभव कृष्ण का निलंबन कर सूबे के आईपीएस लॉबी में क्या देना चाहते हैं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *