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शहर मुझे चच्चू के नाम से जानता है…अधिवक्ताओं के हित के लिए कुछ भी कर गुजरूंगा

प्राथमिकता:

1 दुर्घटना में मरने वाले अधिवक्ताओं के परिजनों को सरकार के साथ-साथ बार काउंसिल भी देगी पांच लाख रुपए

2 देश के अधिवक्ताओं को सम्मान मिले इसके लिए प्रधानमंत्री से बात करेंगे

3 टोल टैक्स पर अधिवक्ता अपना सीयूपी नंबर दिखाएंगे तो टैक्स नहीं देना पड़ेगा

5 अधिवक्ताओं की हत्या पर सरकार और बार काउंसिल सत्यापन कराएगी

6- केन्द्र हो या फिर यूपी,अधिवक्ता जिसकी चाहते हैं सरकार उसी की बनती है

संजय पुरबिया

लखनऊ। लखनऊ बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद पर कई दिग्गज वरिष्ठ अधिवक्ताओं के उतरने से जहां नवाबों के शहर में तपीश बढ़ गयी है वहीं वादों की बौछारों के बीच अधिवक्ताओं की बांछें खिल गयी है। अध्यक्ष पद के दावेदारों में से एक हैं जी.एन. शुक्ला जिन्हें पूरा शहर प्रेम से चच्चू कहता है। ये वही चच्चू हैं जो अधिवक्ताओं की लड़ाई के लिए कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखते हैं। ये वही हैं, जो बसपा सरकार में मायावती के खिलाफ 100 पुतले फूंक कर हंगामा बरपा दिया था। इतना ही नहीं,चच्चू ने मुलायम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कर सनसनी फैला दिया था। ये लखनऊ बार एसोसिएशन में चार बार महामंत्री रह चुके हैं। चच्चू यानि जी.एन. शुक्ला इस बार अध्यक्ष पद पर चुनावी ताल ठोंकने उतरे हैं।

अधिवक्ताओं के हितों में बात करने पर जी.एन. शुक्ला उर्फ चच्चू ने खुलकर द संडे व्यूज़इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ से कहा कि वे अधिवक्ताओं के हित के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्हें अन्याय बर्दाश्त नहीं है और कभी नहीं चाहेंगे कि उनके रहते अधिवक्ता मायूस हों।

चुनावी वादों के बीच उनकी क्या प्राथमिकता है ?

इस पर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी जीएन शुक्ला ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले अधिवक्ताओं के हित में पांच लाख रुपए की व्यवस्था कराऊंगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिवक्ता की दुर्घटना में मौत हो जाती है तो अभी तक सरकार पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद करती है लेकिन नई व्यवस्था के बाद पांच लाख रुपए बार काउंसिल भी देगी।उन्होंने कहा कि देश की आजादी में अधिवक्ताओं का बहुत बड़ा सम्मान रहा है लेकिन सरकारें अधिवक्ताओं के सम्मान के लिए कोई काम नहीं कर रही है। केन्द्र सरकार से बात करेंगे कि देश के अधिवक्ताओं के हित के लिए फंड जारी किया जाए।

श्री शुक्ला ने यह भी कहा कि टोल प्लाजा पर अधिवक्ताओं को टैक्स अदा करने के बाद जाने दिया जाता है लेकिन मेरी कोशिश रहेगी कि अधिवक्ता अपना सीयूपी नंबर दिखाए और आसानी से जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिवक्ता डिग्री लिए हैं उन्हें अभी तक सीयूपी नंबर नहीं मिला है लेकिन जो प्रैक्टिस कर रहे हैं उन्हें सीयूपी नंबर जारी किया गया है। साथ ही शहर के जितने स्टैंड हैं,ऐसी व्यवस्था करेंगे कि वहां भी कार्ड दिखाने के बाद अधिवक्ताओं से पैसा ना देना पड़े।

देश में आए दिन अधिवक्ताओं की हो रही हत्या पर चच्चू ने कहा कि इसके लिए भी ठोस उपाय करेंगे ?

मुख्यमंत्री इसकी जिम्मेदारी लें और किसी अधिवक्ता की हत्या हो तो उसका सत्यापन किया जाए। कई बार राजनीतिक विशेष हत्याएं हो रही है। बार काउंसिल भी अधिवक्ताओं की हत्या पर जिम्मेदारी लेगा।हत्या के मामले में अधिवक्ता यदि दोषी है तो उसका भी साथ देंगे ? इस पर चच्चू ने बेबाकी से कहा कि हमलोगों के बीच में भी कम लोग नहीं है। जब किसी का मकान कब्जा हो जाएगा,जब किसी को बेवजह परेशान कोई करेगा तो आजिज आकर आदमी क्या करेगा। वैसे,ऐसे अधिवक्ता चिन्हित हैं। हमलोग ऐसे लोगों का साथ किसी सूरत में नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद सभी अधिवक्ताओं की आम सभा खुले मैदान में की जाएगी।

आपलोगों का इतना बड़ा वोट बैंक है,क्या सरकार से अपनी जायज मांगों को नहीं मनवा सकते ?

इस पर अध्यक्ष पद प्रत्याशी ने कहा कि अधिवक्ता जिसे चाहता है वही नेता बनता है,चाहें केन्द्र की सरकार हो या फिर यूपी की…। 2007 में जब बसपा की सरकार थी, मैंने मायावती के खिलाफ 100 पुतला फूंका था। उन्होंने बुलाया और कहा शुक्ला.. तू मेरा पुतला क्यों फूंकता है… मेरा यह जवाब था कि मुझे पुतला फूंकना अच्छा लगता है। मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मुकदमा मैंने ही दर्ज कराया था। मैं प्रदेश में चच्चू के नाम से मशहूर हूं…। चाहें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों,यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या फिर केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह,सभी मुझे चच्चू ही कहते हैं…कैबिनेट मंत्री भी मेरे सामने आ जाए पसीना निकाल देता हूं… क्योंकि मैं अन्याय बर्दाश्त नहीं करता हूं।

जमाना तो जी.एन.शुक्ला को चच्चू कहता ही है,अधिवक्ताओं के बीच भी ये इसी नाम से लोकप्रिय हैं। यानि,जिम्मेदारी बढ़ गयी है। देखना है परिणाम किसके पक्ष में आता है। जीते कोई लेकिन वोट बैंक माने जाने वाले अधिवक्ताओं की इस बार चांदी है। क्योंकि,उनकी सारी मांगें पूरी जो होने वाली है।

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