Thu. Aug 6th, 2020

सवाल: बुलेरो गाड़ी यूपी-62-बीए का जब टैक्सी परमिट नहीं तो कैसे अटैच है जल निगम में

जल निगम में अधिकारियों के लिये लगायी गयी गाडिय़ों में हो रहा फ्राड

आशियाना पुलिस ने कल शाम जौनपुर के इंजीनियर की पकड़ी बुलेरो सरकारी गाड़ी

बुलेरो गाड़ी नंबर यूपी-62-बीए का टैक्सी परमिट,सर्विस टैक्स,इंकम टैक्स नहीं है जमा

जौनपुर के सहायक अभियंता एस सी त्रिपाठी थे बुलेरो में सवार

संजय पुरबिया
लखनऊ। जल निगम विभाग में अफसरों के आवागमन के लिये लगायी गयी चार पहिया वाहन में बड़ा फ्राड किया जा रहा है। निजी लाइसेंस वाली गाडिय़ों को टैक्सी कोटा बताकर लगाया गया है। आशियाना पुलिस कल शाम को चेकिंग के दौरान जौनपुर की बुलेरो नंबर की सरकारी गाड़ी नंबर यूपी 62 बीए को बंगला बाजार में धर दबोचा। चालक से जब गाड़ी के कागजात मांगे गये तो टैक्सी परिमिट सहित अन्य कागजात कम होने की वजह से गाड़ी को थाने में बंद कर दिया गया। वहीं, गाड़ी में सवार निर्माण खंड,उ.प्र. जल निगम, जौनपुर के सहायक अभियंता एस सी त्रिपाठी से भी पुलिस ने पूछताछ की लेकिन उन्हें लगा कि अधिकारी की जानकारी में गाडिय़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं है इसलिये उन्हें जाने दिया।


बता दें कि पूर्वांचल के जौनपुर में सरकारी विभाग में कई गाडिय़ां चल रही हैं जिनका ना तो टैक्सी परमिट है और ना ही कागजात पूरे सही हैं। सरकारी विभाग का ठप्पा लगने से जहां पुलिस वाले उन गाडिय़ों की जांच नहीं करते इसीलिये वे सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं। 30 जुलाई की शाम आशियाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान जल निगम,जौनपुर में अटैच बुलेरो नंबर यूपी 62 बीए की चेकिंग की तो मालूम चला कि सभी कागजात चालक के पास नहीं था। निजी वाहन होते हुये,उसे टैक्सी कोटे में दिखाकर विभाग में लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि पिछले तीन साल से ये गाड़ी जल निगम विभाग में चल रही है और गाड़ी मालिक संजय यादव ने तीन वर्ष से ना तो टैैक्सी कोटा का एमाउंट परिवहन विभाग में जमा किया और ना ही सर्विस टैक्स,इंकमटैक्स जमा किया है। इस बात की जानकारी जौनपुर के वरिष्ठï अधिकारियों को नहीं है।

खास बात यह है कि ये गाड़ी गत मार्च 2020 से कंपनी टेक्रो कंट्रक्शन द्वारा अटैच करायी गयी है,उससे पूर्व लगभग ढाई वर्ष से पूर्व अधिशासी अभियंता एस के यादव ने बुलेरो का भगुतान सरकारी मद से किया है। यदि लॉगबुक की जांच करा ली जाये तो उसमें बुलेरो के मालिक संजय यादव का हस्ताक्षर मिल जायेगा। सवाल यह है कि जिस गाड़ी के कागजात पूरे नहीं हैं,टैक्सी परमिट नहीं है, आखिर पूर्व अधिशासी अभियंता उस बुलेरो का भुगतान सरकारी मद से कैसे कर दिया? बहरहाल,यही हाल रहा तो जल निगम के अधिकारी गाडिय़ों के फ्राड में कभी भी फंस सकते हैं।

इस बाबत जल निगम, जौनपुर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संजय गुप्ता से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि अभी मेरी नयी तैनाती हुयी है और बुलेरो को टेक्रो कंट्रक्शन नाम की कंपनी ने लगाया है। इस बात की जानकारी मुझे नहीं है लेकिन मैं पता लगाऊंगा कि आखिर कंपनी ऐसी गाडिय़ों को क्यों अधिकारियों के साथ अटैच किया। उन्होंने यह भी कहा कि बुलेरो को हटा देंगे ताकि भविष्य में विभागीय अधिकारियों की इमेज खराब ना हो पाये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *