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सहकारिता भर्ती घोटाला: एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट में अनियमितताओं का खुलासा, योगी के कहर से नही बचेंगे कई बड़े अफसर …

एसआईटी ने सौंपी गृह विभाग को दूसरी जांच रिपोर्ट : कई घाघ अफसरों की फंस गयी है गर्दन

एसआईटी की रिपोर्ट में कई अफसर पाये गये दोषी,शीघ्र हो सकता है उनके खिलाफ मुकदमा 

उ.प्र.सहकारी बैंक लि. के बाद अन्य सहकारी संस्थाओं में हुयी भर्ती की जांच रिपोर्ट एक माह के अंदर देगी एसआईटी

योगी के राडार पर सहकारी ग्राम्य विकास बैंक,राज्य भंडारण निगम,पीसीएफ,यूपी कोआपरेटिव यूनियन

संजय पुरबिया

लखनऊ। राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र द संडे व्यूज़ ने 16 अगस्त 2020 को ही शीर्षक नीति की राह पर कौन ? योगी या रेड्डी -गोस्वामी की जोड़ी ? में खुलासा कर दिया था कि उत्तर प्रदेश के सहकारिता विभाग में विभिन्न पदों पर 5127 पदों की भर्ती में बंपर घोटाला किया गया है। हमने ये भी सवाल उठाया था कि आखिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी ने ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी भर्ती घोटाले से पर्दा क्यों नहीं उठाया। सच तो यह है कि चाहें एसआईटी हो या फिर सहकारिता विभाग के अपर प्रमुख सचिव एम.वी.एस.रेड्डी,सभी ने भर्ती घोटाले में योगी के सपनों को ध्वस्त कर,भर्ती नियमावली को दरकिनार कर अपने चहेतों से मोटी रकम लेकर किये गये भर्ती में कई सौ करोड़ रुपये की बंदरबांट कर चुके थे। कोई नहीं चाहता था कि वर्ष 2012 में हुयी 5127 पदों की जांच हो। चौंकाने वाली बात यह भी थी कि भर्ती तो 5127 पदों की हुयी थी लेकिन एसआईटी को श्री रेड्डी ने सिर्फ 2324 पदों में से केवल 50 पदों की जांच करने के लिये रिपोर्ट सौंपी थी,क्यों ? हमने यह भी सवाल उठाया था कि अपर प्रमुख सचिव अपने चहेते अधिकारी,जो वर्तमान में उ. प्र. राज्य भंडारण निगम के एमडी हैं,ने 2301 सचिवों की भर्ती की थी,उसकी रिपोर्ट एसआईटी को क्यों नहीं सौंपी थी। बता दें कि श्रीकांत गोस्वामी वे अधिकारी हैं, आवास विकास से लेकर जहां भी एम.वी.एस.रेडडी तैनात थें,उनके साथ रहें और बहुत काम किये…। द संडे व्यूज़ की खबर का असर ही है कि एसआईटी ने समाजवादी पार्टी की सरकार में हुयी भर्ती घोटाले की अपनी दूसरी जांच भी पूरी कर ली है और जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी ने अपनी जांच में कई अफसरों को दोषी पाया है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनमुति मांगी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर एसआईटी ने अप्रैल 2018 में इस भर्ती घोटाले की जांच शुरू की थी। सपा के शासनकाल में 2012 से 2017 के बीच सहकारिता विभाग की विभिन्न संस्थाओं में 2324 पदों पर नियुक्तियों की गई थीं। एसआईटी ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक लिमिटेड में सहायक प्रबंधक के 50 पदों पर हुई भर्तियों की जांच पूरी की थी। शासन की मंजूरी मिलने के बाद एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष राम जतन यादव समेत मामले से संबंधित कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। यह जांच पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री ने अन्य सहकारी संस्थाओं में हुई भर्तियों की जांच भी एक माह के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया था। शासन में बैठे अफसरों ने बताया कि एसआईटी ने अपनी दूसरी जांच रिपोर्ट में भी भर्तियों में अनियमितताओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट का शासन स्तर पर परीक्षण हो रहा है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद दोषी अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जायेगी। दूसरी जांच रिपोर्ट में सहकारी ग्राम विकास बैंक, राज्य भंडारण निगम, पीसीएफ और यूपी कोआपरेटिव यूनियन जैसी संस्थाओं में हुई भर्तियों का मामला शामिल है। इन भर्तियों में सबसे ज्यादा 1018 पद ग्राम्य विकास बैंक के हैं।

बहरहाल, द संडे व्यूज़ में खुलासा होने के बाद शासन से लेकर सहकारिता विभाग में हडक़म्प मच गया। एसआईटी भी पूरी तरह से सक्रिय हुयी और जांच की रफ्तार तेज होने लगी। इसी बीच योगी सरकार के ही ग्राम्य विकास मंत्री मोती सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सहकारिता विभाग में हुयी भर्ती घोटाले पर एसआईटी की जांच के प्रति निष्क्रियता पर सवाल उठा दिया। मोती सिंह ने पत्र में लिखा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल में सहकारिता विभाग की विभिन्न संस्थाओं में मानकों की अनदेखी कर की गई 5127 पदों पर भर्ती की जांच दो साल बाद भी पूरी नहीं की जा सकी है। पत्र में यह भी लिखा कि जिस जांच को पूरा करने के लिए एसआईटी को दो माह का समय दिया गया था, वह दो साल बीत जाने पर भी पूरा नहीं किया जा सका है। यह शासकीय आदेश की अवहेलना है। मोती सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि 27 अप्रैल 2018 को गृह पुलिस अनुभाग- तीन ने सहकारिता विभाग और उसके अधीनस्थ संस्थाओं में हुई भर्तियों की जांच एसआईटी से कराने का निर्णय लिया था, जिसमें एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 तक की गई नियुक्तियों में योग्यता के आंकलन में पक्षपात और भेदभावपूर्ण कार्यवाही किए जाने के मामले की जांच करने का आदेश दिया गया।

जांच की परिधि में उ .प्र. सहकारी संस्थागत सेवा मंडल द्वारा सहकारी समितियों, उ . प्र. कोआपरेटिव बैंक लि. उ . प्र . राज्य निर्माण सहकारी संघ और जिला सहकारी बैंकों में कुल 5127 पदों पर नियुक्तियां 2012 से 2017 के बीच की गई थी। इतने पदों पर की गई नियुक्तियों में से एसआईटी द्वारा केवल 50 पदों की जांच ही की गई है। मंत्री ने लिखा है कि उनके संज्ञान में यह लाया गया है कि इन 50 पदों की जांच के आधार पर ही निर्णय लिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। शेष नियुक्तियों की जांच अभी तक शुरू भी नहीं की गई है। सिर्फ 50 पदों की जांच करना तथा शेष नियुक्तियों की जांच शुरू तक नहीं किया जाना शासकीय आदेश की अवहेलना है। मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि शासनादेश के मुताबिक सभी नियुक्तियों की जांच पूरी कर एक साथ निर्णय लिए जाने का आदेश संबंधित अधिकारियों को दें।

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