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सहकारिता विभाग: अपर आयुक्त एवं अपर निबंधन,प्रशासन जमुना प्रसाद पाण्डेय शुरु किया सांसद को गुमराह करने का खेल

सहकारिता विभाग: घोटाले का पर्दाफाश करने पर सांसद कौशल किशोर को गुमराह करने में जुटे शासन के अफसर

जब सांसद ने जांच की सीएम से मांग की है तो इसकी जांच सरकारी पत्रावलियों में क्यों नहीं कर रहें अफसर ?

शिकायत करने वाले क्यों देंगे साक्ष्य ?

यदि सरकारी रिकार्ड में आरोप गलत हो,तो करें शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई ?

यदि आरोप सही है तो सारे अफसरों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करेंगे साहेबान ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। मोहनलालगंंज के सांसद कौशल किशोर ने माह दिसंबर में सहकारिता विभाग में शासन और मुख्यालय के अफसरों की मिलीभगत से किये गये अरबों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। पत्र को गंभीरता से लेते हुये मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जांच बिठा दी गयी। शासन में बैठे सहकारिता विभाग के घाघ अफसरों ने जांच करने के बजाय मुख्यमंत्री और सांसद को गुमराह करने की जुर्रत कर रहे हैं। 24 दिसंबर को नियुक्ति विभाग के अनुसचिव प्रवीण कुमार सिंह व सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक,प्रशासन जमुना प्रसाद पाण्डेय ने शिकायतकर्ता जय सिंह को पत्र लिखकर अरबों रुपये के घोटाले का साक्ष्य मांगा है। सवाल यह है कि जब भाजपा सरकार के ही सांसद कौशल किशोर ने अपने पत्र पर लिखित शिकायत की है तो फिर शासन के अफसर विभाग में मौजूद दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं कर रहे हैं? पत्र में सहकारिता विभाग में वर्ष 2019-2020 में हुयी धान खरीद घोटाला,भर्ती घोटाला,ट्रांसपोर्ट घोटाला सहित कई अन्य फर्जीवाड़े के बारे में जिक्र था। पत्र में लगाये गये गंभीर आरोप पर सांसद कौशल किशोर ने अपने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जांच कराने का आग्रह किया था। इसका खुलासा द संडे व्यूज वेब न्यूज चैनल पर 24 दिसंबर को किया गया है


अपने पत्र में जमुना प्रसाद पाण्डेय ने शिकायतकर्ता जय सिंह को लिखा है कि आपके द्वारा 1 दिसंबर 2020 का पत्र जिस पर मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने 2 दिसंबर 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित किया है,शोसल मीडिया पर भ वायरल हो रहा है। जिसमें आपने आरोप लगाया है कि आप द्वारा सहकारिता विभाग के विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें की गयी हैं। पत्र में नियमों का हवाला देते हुये कहा गया है कि एक शपथ पत्र व शिकायतों की पुष्टि हेतु समुचित साक्ष्य प्रत्येक दशा में एक सप्ताह में अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध करा दें ताकि प्रशासन प्रकरण में अग्रिम कार्रवाई कर सके।

द संडे व्यूज़ का सवाल है कि जब शिकायतकर्ता ही सारे साक्ष्य दे देगा तो आपलोग क्या करेंगे? क्यों नहीं आप शासन और सरकारी विभाग में दबाये गये दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं? पाण्डेय जी, सरकार के सांसद ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुये ईमानदार मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है…। क्या आपको ईमानदार सांसद कौशल किशोर की निष्ठा पर शंका है या फिर आपलोग षडय़ंत्र के तहत मामले पर पर्दा डालने का कुचक्र रच रहे हैं ? ये मामला युवाओं के रोजगार से जुड़ा है,ये मामला सूबे के किसानों के हक पर डाका डालने से जुड़ा है,ये प्रकरण सरकारी व्यवस्था को अपने स्वार्थ के लिये ध्वस्त करने से जुड़ा है,फिर शिकायतकर्ता से दस्तावेज क्यों मांग रहे हैं? शिकायतकर्ता यानि सांसद से साक्ष्य मांगकर एक तरह से उनकी शिकायत को ही निराधार बताने का खेल क्यों खेल रहे हैं पाण्डेय जी ?

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