Sun. Oct 20th, 2019

सुनील कुमार ने जीएल मीणा को किया गुमराह : कई कर्मचारियों का गृह जनपद में ही किया तबादला

वाह रे, डीजी साहेब, आपने सीएम की नीति को ही बना डाला कामेडी का मंच, तबादला नीति का उड़ा रहे हैं मजाक

डीजी जीएलमीना के भरोसे का एसएसओ सुनील कुमार ने किया ध्वस्त

डीजी ने तबादले की सूची पर आंख बंद कर बिठाई चिडिय़ा,गृह जनपद में मौज कर रहे कर्मचारी

गृह जनपद में तैनात इंस्पेक्टर और बीओ को आखिर क्यों बख्शा गया ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगीराज है। मुख्यमंत्री भ्रस्टाचार और क्राईम पर रोक लगाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में हैं। भ्रष्ट अफसरों को वे किसी भी सूरत में बख्शने के मूड में अब नहीं दिख रहे हैं। होमगार्ड विभाग में मुख्यालय पर बैठे अफसरों ने मिलकर सीएम की नीति और शिद्धांतों को कामेडी का मंच बनाकर रख दिया है। तबादला नीति में कई कर्मचारियों का तबादला उनके गृह जनपद में ही कर दिया। इतना ही नहीं, कई ऐसे भी हैं जो वर्षों से मुख्यालय के सीटीआई पर जमे हैं। और सुनिए, कई इंस्पेक्टर और बीओ ऐसे भी हैं जो पहले से ही गृह जनपद में तैनात हैं। साहेब,आखिर इन लोगों पर इतनी मेहरबानी क्यों ?

अब आते हैं सवाल पर…। सवाल यह है कि आखिर मुख्यालय पर बैठे डीजी क्या कर रहे हैं? उनके ही एसएसओ उन्हें गुमराह कर रहे हैं और वे बबुआ की तरह भरोसा करते चले जा रहे हैं ? क्या डीजी बिना पड़ताल किए सभी दस्तावेजों पर चिडिय़ा बिठा रहे हैं ? यदि ऐसा है तो शायद उन्हें नहीं मालूम कि इस विभाग के घाघ चंद अफसरों ने पूर्व की सरकार में अपने ही विभाग के मंत्री को नाको-चना चबवा दिया था…।

चर्चा जोरों पर है कि मुख्यालय के चाटुकार अफसरों का चरण वंदना करो, कुछ चढ़ावा चढ़ाओ, मिल जाएगी मनचाही ट्रांसफर और पोस्टिंग। सवाल यह है कि आखिर होमगार्ड विभाग के भ्रष्टï अफसरों के खिलाफ योगी जी कार्रवाई क्यों नहीं करते? सरकार की साख पर बट्टा लगाने वालों पर आखिर सीएम इतने मेहरबान क्यों हैं? होमगार्ड विभाग में पुलिस विभाग के आईपीएस व होमगार्ड विभाग के पीपीएस तैनात हैं जो सूबे के एक लाख से अधिक होमगार्डों का नेतृत्व करते चले आ रहे हैं। खैर,अब आते हैं मुद्दे पर…

22 जून 2019 को होमगार्ड मुख्यालय से कर्मचारियों के तबादला की एक सूची जारी की गई। सूची में देवेन्द्र ब्लॅाक आर्गनाइजर देवेन्द्र कुमार त्रिपाठी का तबादला प्रयागराज से प्रतापगढ़ किया गया है। भर्ती के दस्तावेजों में देवेन्द्र त्रिपाठी ने अपना गृह जनपद प्रतापगढ़ भरा है। इसी तरह संजय सिंह का तबादला प्रयागराज से उनके गृह जनपद जौनपुर में, मोहम्मद इस्लाम अंसारी का तबादला गाजीपुर से गृह जनपद जौनपुर किया गया है। अब थोड़ा नियमावली की बातें भी की जाए। जब भी कर्मचारियों की तबादला सूची बनती है,मुख्यालय पर तैनात एसएसओ,वरिष्ठ स्टॉफ अधिकारी सूची बनाते हैं और उसे डीजी तक पहुंचाते हैं। डीजी से अनुमोदन मिलने के बाद आखिर में डीआईजी तबादला सूची का पत्र सूबे के सभी मंडलयीय कमांडेंट,कमांडेंट को जारी करते हैं।

बीओ की सूची बनाते वक्त क्या एसएसओ सुनील कुमार को नहीं दिखा कि वे जिन बीओ का तबादला कर रहे हैं उनका गृह जनपद कहां है? क्या एसएसओ को नहीं दिखा कि वे डीजी को जो तबादला सूची दे रहे हैं,वो गलत है ? दो बातें हो सकती है। या तो मुख्यालय पर बैठे घाघ बाबूओं ने गृह जनपद तैनाती पाने की लालसा रखने वाले बीओ से माल लेकर जानबूझ कर सुनील कुमार के सामने गलत सूची भेजी। या फिर सुनील कुमार ने सब कुछ जानते हुए डीजी के भरोसे को ध्वस्त किया। दोनों में से एक बात तो जरूर सौ फीसदी सटिक है क्योंकि डीजी को क्या उनके पास तो अफसर कोई पत्रावली लेकर जाएगा,चिडिय़ा बिठा देंगे। ये सोचना तो अफसरों का काम है कि वे डीजी के सामने जो पत्रावली दे रहे हैं उसमें उनसे कोई चूक तो नहीं हो रही।

एसएसओ साहेब, पहले से ही अपने गृह जनपदों में कई इंस्पेक्टर और बीओ तैनाती पाकर मौज कर रहे हैं, आखिर इन पर आपकी नजरें क्यों नहीं पड़ती? समूह ग में तो इंस्पेक्टर,पीसी,बीओ,हवलदार प्रशिक्षक आते हैं तो फिर लगभग 15 वर्षो से एक ही जगह पर ट्रेनिंग सेंटरों पर हवलदार प्रशिक्षक जमे हैं,इनका तबादता क्यों नहीं करते? मुख्यालय के सीटीआई और डीटीसी पर छह वर्ष पूरा कर चुके बीओ,पीसीपी व इंस्पेक्टर का तबादला करने के बारे में क्यों नहीं सोचते ? बात जो भी हो तबादला नीति की तो एसएसओ ने धज्जियां उड़ा ही दी है अब देखना है कि

                                 द संडे व्यूज़ के खुलासे के बाद डीजी साहेब जागते हैं या फिर वे भी यहां के लापरवाह अफसरों की तरह बोलेंगे… जाने दो यारों,ये तो होता ही रहता है…

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