Tue. Dec 1st, 2020

होमगार्ड विभाग: इत्तीफाक कहीं सच ना हो जाये…डीआईजी ने जिसे दिया क्लीनचीट हो गया बर्खास्त, अब किसकी बारी ?

डीआईजी ने कृपाशंकर पाण्डेय की जांच में ले-देकर फाईनल रिपोर्ट में क्लीन चीट दी,हो गये बर्खास्त ?

प्रदेश में चल रही चकल्लसबाजी: एसएसओ सुनील कुमार को क्लीन चीट दी है, कहीं ये भी तो ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। इसे इत्तीफाक कहा जाये या फिर होनी…। जब-जब साहूकारों ने गरीबों पर अत्याचार किया या उन्हें बर्बाद कर उनके हक के निवाले को डकारा,वो बर्बाद हो गये। होमगार्ड विभाग में भी सालों से एक नहीं दर्जनों साहूकार हैं,जो लूट रहे हैं और अपना खजाना भर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां महाजनों का रोल मुख्यालय से लेकर जिलों में तैनात बड़े अधिकारी अदा कर रहे हैं और गरीबों की भूमिका में होमगार्ड हैं। देर से ही सही लेकिन होमगार्डों की बद्दुवा,हाय रंग लायी और रामराज्य लाने की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजरें इन पर पड़ गयी। योगी ने ऐसा कहर ढाया कि एक नहीं दो कमांडेंट बर्खास्तगी का स्वाद चख रहे हैं। ये इस विभाग के लिये ऐतिहासिक फैसला है,इससे पहले भी महाभ्रस्टाचर होता रहा,खबरें छपती रहीं,लेकिन किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा कठोर फैसला नहीं लिया। ये राष्ट्रीय साप्ताहिक समाचार पत्र द संडे व्यूज़, इंडिया एक्सप्रेस न्यूज डॉटकॉम की बड़ी जीत है। क्योंकि मुख्यालय से लेकर जिलों में तैनात अफसरों के भ्रस्टाचर की गाथा हमेशा से लिखता रहा है। खैर, सभी को एक बात चौंका रही है। हो सकता है ये सच हो या फिर ये भी हो सकता है सच ना हो,लेकिन सभी के दिमाग में ये बात कौंध रही है। अफसरों और कर्मचारियों के बीच खुसफुसाहट चल रही है कि डीआईजी साहेब ने कृपाशंकर पाण्डेय की जांच में ले-देकर फाईनल रिपोर्ट में क्लीन चीट दे दिये,वो तो हो गये बर्खास्त ? एसओ मनोज कुमार ने एसएसओ सुनील कुमार के द्वारा कराये गये भ्रस्टाचर की शिकायत 12 पन्ने में की और इसकी जांच भी डीआईजी साहेब कर हरे हैं। डीआईजी साहेब ने इस बार भी सभी आरोप को निराधार बताते हुये एसएसओ सुनील कुमार को क्लीन चीट दे दी है, कहीं ये भी तो ? सभी को शासन के फैसले का बेसब्री से इंतजार है। बता दें कि मनोज कुमार अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री से फरियाद की है और मुख्यालय के अफसरों के घटिया चाल को नाकाम करने के लिये न्यायालय की शरण में भी चले गये हैं।

आपको बता दें कि इसी वर्ष जिला कमांडेंट, नोयडा कार्यालय में तत्कालीन कमांडेंट द्वारा दस्तावेज जलाये जाने के बाद मचे हाहाकार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई अफसरों को जेल की सलाखों में भेजा और उच्च स्तरीय जांच बिठा दी। शासन के निर्देश पर जांच अधिकारियों की टीम बनायी गयी जिसमें मुख्य जांच अधिकारी मुख्यालय पर तैनात एसएसओ सुनील कुमार,बागपत कमांडेंट नीता भारतीया,वाराणसी कमांडेंट शैलेन्द्र सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। जांच में इनलोगों ने बड़े पैमाने पर भ्रस्टाचर पाया और सैंकड़ों पन्ने की रिपोर्ट बनायी। एसएसओ ने जांच रिपोर्ट को कमांडेंट कार्यालय में अलमीरा में रखवा दिया। नियम की बात करें तो नोयडा में जांच के बाद दस्तावेज लखनऊ लाकर मुख्यालय में जमा करना चाहिये था लेकिन उसे जांच अधिकारी एसएसओ सुनील कुमार,हाथरस की कमांडेंट नीता भारतीया सहित अन्य अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। ये जांच अधिकारियों के स्तर से बड़ी चूक थी। एसएसओ सुनील कुमार ने ये चूक क्यों की ,इस पर आज तक जांच नहीं की गयी। उन्होंने लाखों रुपये की वसूली सहित अन्य फर्जीवाड़े के दस्तावेज को क्यों वहीं रखा,समझ से परे है। यदि शासन स्तर पर जांच होती तो सारे सबूतों में आग लगाने का कांड ही कोई नहीं कर पाता। खैर, शासन में बैठे तथाकथित भ्रष्टï अफसरों ने इतनी बड़ी चूक करने वाले एसएसओ सुनील कुमार सहित महिला कमांडेंट को बचा लिया। क्यों बचाया,ये भी जांच का विषय है।

खैर, इसी कड़ी में जांच लखनऊ के प्रमोटी कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय के खिलाफ भी की गयी। गुडम्बा थाने में होमगार्डों का ना लगाने , उनके नाम पर फर्जी तरीके से मस्टर रोल बनाकर पैसा डकारने की जांच की गयी। डीआईजी, मुख्यालय रंजीत सिंह ने जांच बिठायी। जांच की जिम्मेदारी इलाहाबाद के डीआईजी संतोष कुमार सुचारी को सौंपी गयी। पहली जांच में संतोष सुचारी ने कृपाशंकर पाण्डेय को बरी कर दिया। मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जब किसी अधिकारी को जांच दी जाती है तोउसे मौके पर जाकर मुआयना करना चाहिये लेकिन संतोष सुचारी गुडम्बा थाना नहीं गये बल्कि इलाहाबाद में ही अपने कार्यालय में बैठकर जांच की इतिश्री कर दी। इसी के आधार पर कृपाशंकर पाण्डेय कोर्ट की शरण में चले गये। अगले माह तारीख पड़ी है। जांच से डीआईजी,मुख्यालय रंजीत सिंह संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने छह बिंदुओं पर दुबारा जांच बिठा दी जिसमें जांच फिर संतोष सुचारी को मिली। द संडे व्यूज़ हमेशा से भ्रस्टाचर के खिलाफ खबरें लिखता रहा है इसलिये इस मामले की गूंज मुख्यमंत्री तक पहुंची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 अक्टूबर को कमांडेंट कृपाशंकर पाण्डेय को बर्खास्त कर दिया है।

अब आते हैं दूसरे मुद्दे पर…। होमगार्ड मुख्यालय पर सालों से जमे एसएसओ सुनील कुमार के खिलाफ छह माह पूर्व तैनात एसओ मनोज कुमार ने भ्रस्टाचर के कई गंभीर आरोप लगाते हुये मुख्यमंत्री,शासन को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने पेट्रोल-डीजल की चोरी करने,चुनाव बाद सरकारी धन को मुख्यालय पर ही दबाये रखने सहित कई गंभीर आरोप हैं। जांच बिठायी गयी। इस बार भी जांच अधिकारी इलाहाबाद के डीआईजी संतोष सुचारी ही बनें। श्री सुचारी ने जांच के बाद एसएसओ सुनील कुमार को भी क्लीन चीट थमा दिया। समझ रहे हैं ना…। इसका खुलासा अगली कड़ी में करेंगे,तब आप सब बुझ जायेंगे कि मामला का बा…।

खैर,हम बात ये कर रहे थें कि डीआईजी साहेब ने कमांडेंट कृपााशंकर पाण्डेय को क्लीन चीट दिया,हो गये बर्खास्त और अब एसएसओ सुनील कुमार को भी क्लीन चीट दे दिया,क्या ये भी…। चर्चा का बाजार पूरे प्रदेश में गरम है। इस विभाग को होमगार्डों ने नहीं बल्कि अफसरों ने डुबोने का काम किया है। जब मुख्यालय पर ही तथाकथित भ्रष्ट अफसर तैनात होंगे तो उस विभाग की साख मिट्टी में मिलना तय है। आखिर में यही कहेंगे कि ये योगी राज है, भ्रस्टाचर करोगे तो होगे बर्खास्त….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *