Thu. Aug 6th, 2020

होमगॉर्ड्स विभाग :फर्जी मस्टर रोल बनाने, गबन करने वाले कृष्ण कुमार मिश्रा किसकी शह पर कर रहा है नौकरी ?

आखिर मुख्यालय के किन-किन अफसरों तक पहुंचता है कृष्ण मिश्रा का दक्षिणा…

क्या योगीराज में वर्ष 2002 में फर्जी मस्टर रोल की नींव रखने वाले कृष्ण कुमार मिश्रा को मिलेगा अभयदान ?

क्या पूर्व डीजी सूर्य शुक्ला का रिश्तेदार होने की वजह से बच रहा है भ्रष्ट अवैतनिक कंपनी कमांडर ?

विदेशों में भी भ्रस्टाचार को लेकर छाया होमगार्ड विभाग

शेखर यादव

इटावा। यूपी के होमगाड्र्स विभाग की सुर्खियां विदेशों तक पहुंच गयी है। योगी राज में हुए महा भ्रस्टाचार के खुलासे के बाद देश-विदेश के लोग वर्दीधारियों के कंधे पर लगे बैज को देखते हैं और जहां उन्हें होमगार्ड लिखा दिखता है तो सभी के चेहरे पर कुटील मुस्कान के साथ-साथ चेहरे की भाव-भंगीमा बदली नजर आती है। शायद लोग सोचते होंगे कि ये वर्दी भ्रस्टाचार के आकंठ में तैर रही उसी होमगार्ड विभाग की है जिसमें जवानों के खून-पसीने की कमाई को अधिसंख्य अफसर लुटेरों की तरह लूटते रहे हैं। शब्द और भाषा में कडवाहट जरूर है लेकिन सच्चाई की दास्तां भी बयां करने की कोशिश कर रहा हूं। वैसे भी सच हमेशा कडुवा होता है। आज हमलोग कानपुर,नगर के एक ऐसे अवैतनिक कंपनी कमांडर की घटिया करतूत का खुलासा करेंगे जिसने वर्ष 2002 में ही फर्जी मस्टर रोल की पटकथा लिख डाली थी। तात्कालीन कमांडेंट संतोष कुमार सुचारी ने उसका पर्दाफाश भी किया लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई मुख्यालय स्तर पर नहीं की गयी। सीधी बात करें तो अवैतनिक कंपनी कमांडर के आगे मुख्यालय के अफसर नतमस्तक हैं। उसके लिये न्यायालय का आदेश मायने नहीं रखता। अवैतनिक कंपनी कमांडर कृष्ण कुमार मिश्रा पर आरोप फर्जी मस्टर रोल बनाने, जवानों से अवैध वसूली करने सहित गबन का आरोप साबित हो गया और तात्कालीन कमांडेंट ने उसे निष्कासित कर दिया था। उल्टे वो न्यायालय की शरण में चला गया और बहाल हो गया। फिर कानपुर, नगर के कमांडेंट ने उसके खिलाफ अनुशासनहीनता और भ्रस्टाचार का वाद दायर किया। श्री मिश्रा ने एक बार फिर कमांडेंट द्वारा लगाये गये आरोप को न्यायालय में चुनौती दी लेकिन न्यायालय ने कृष्ण कुमार मिश्रा द्वारा दायर को खारिज कर दिया।

सवाल यह है कि जब न्याायालय ने मामले को खारिज कर दिया तो अवैतनिक कंपनी कमांडर कृष्ण कुमार मिश्रा किसके आदेश से विभाग में काम कर रहा है? कानपुर,नगर के कमांडेंट की मानें तो इसके ऊपर मुख्यालय के अफसरों की मेहरबानी है। उनकी शह पर कानपुर, नगर में टिका है। खास बात यह भी है कि कृष्ण कुमार मिश्रा होमगार्ड विभाग के पूर्व डीजी सूर्य कुमार शुक्ला और फैजाबाद के मंडलीय कमांडेंट संजीव शुक्ला का रिश्तेदार बताया जाता है। जांच का विषय यह है कि आखिर मुख्यालय पर तैनात कौन-कौन से अफसर कृष्ण कुमार मिश्रा से किस तरह का लाभ उठाते हैं? जांच का विषय यह भी है कि कानपुर,नगर से होने वाली भारी-भरकम वसूली में से कितना पैसा मुख्यालय तक पहुंचाता है ? सवाल यह है कि वर्ष 2002 में ही कानपुर,नगर में फर्जी मस्टर रोल की पटकथा लिखने वाले कृष्ण कुमार मिश्रा को आखिर मुख्यालय के अफसर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं ?

सूबे में होमगार्ड विभाग एक ऐसा विभाग है जिसमें अगर आपने ईमानदारी दिखाने की कोशिश की या भ्रष्ट अधिकारियों के सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश की तो आप का निष्कासन हो ही जाएगा। उस ईमानदारी की सजा आपका परिवार और आपके बच्चे उठाएंगे। अगर आप भ्रष्ट अधिकारियों का साथ देंगे और उनके वसूली मैन के रूप में कार्य करेंगे तो चंद दिनों में ही आप करोड़पति और मालामाल हो जाएंगे। हम आपको कानपुर नगर के भ्रष्टï कंपनी कमांडर कृष्ण कुमार मिश्रा के बारे में बता रहे हैं। कृष्ण कुमार मिश्रा कानपुर के तमाम वसूलीमैनों में से एक हैं जिनका आज तक कानपुर नगर का कोई भी कमांडेंट बाल बांका नहीं कर पाया। मिश्रा ने वर्ष 2002 में ही फ र्जी मस्टररोल की पटकथा लिख दी थी। फ र्जी मस्टररोल और गबन के मामले में कानपुर नगर के तत्कालीन कमांडेंट संतोष कुमार सुचारी ने कृष्ण कुमार मिश्रा को विभाग से निष्कासित कर दिया था। उसके बाद मिश्रा अपने निष्कासन के विरुद्ध हाईकोर्ट, इलाहाबाद से स्थगन आदेश ले आया और मुख्यालय ने उसे पुन: बहाल कर दिया। उसके बाद तो कृष्ण कुमार मिश्रा ने आतंक मचा दिया। कमांडेंट और मंडलीय कमांडेंट के आदेश को ताख पर रखकर वसूली का खेल खेलने लगा। उसने अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं किया और हुआ यह कि 7 अप्रैल 2003 को कृष्ण कुमार मिश्रा की सेवाएं पुन: समाप्त कर दी गयी।

बताया जाता है कि 7 अप्रैल 2003 के निष्कासन आदेश में वहां के तत्कालीन कमांडेंट ने घोर अनुशासनहीनता और जवानों से अवैध वसूली के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इस निष्कासन के विरुद्ध एक बार फिर अवैतनिक कंपनी कमांडर कृष्ण कुमार मिश्रा इलाहाबाद हाईकोर्ट गया और उन्होंने एक प्रत्यावेदन बहाली के लिए उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग लखनऊ को दिया। उसके बाद 7 अप्रैल 2003 के निष्कासन के प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए होमगार्ड विभाग के तात्कालीन डीजी ने पत्र लिखा जिसमें 7 जुलाई 2004 का उल्लेख करते हुए पुन: नियुक्ति दी गई।

8 मई 2018 को हाईकोर्ट इलाहाबाद में कृष्ण कुमार मिश्रा की याचिका को खारिज कर दिया गया। नियम की बात करें तो जब हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया तो कृष्ण कुमार मिश्रा को दी गई सशर्त बहाली जो तात्कालीन डीजी द्वारा दी गई थी स्वयं समाप्त हो जाती है। 7 अप्रैल 2003 का जिला कमांडेंट का निष्कासन आदेश स्वत: प्रभावी हो जाता है लेकिन आज तक कृष्ण कुमार मिश्रा को विभाग से बाहर निकालने की किसी ने हिम्मत नहीं की। क्यों ? यदि इस जगह पर कोई ईमानदार जवान होता तो वह कभी भी विभाग में बहाल नहीं हो सकता था। यह बात मैं दावे के साथ कहता हूं क्योंकि होमगार्ड विभाग में अवैतनिक अधिकारी एवं कर्मचारी की बहाली को गुण और दोष के आधार पर किया जाता है।

द संडे व्यूज ने जब कानपुर के अधिकारियों से बात की तो वह बहुत ही मजबूर नजर आये। उन्होंने कुछ भी खुलकर जवाब देने से इंकार कर दिया। आखिर ऐसी क्या वजह है कि जब अवैतनिक कंपनी कमांडर वर्ष 2002 में ही विभाग में फ र्जी मस्टररोल और गबन के मामले में दबोचा गया उसके बाद भी विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने रहें ? इससे साफ तौर पर मैं यह कह सकता हूं की कानपुर नगर की यदि जांच कराई जाए तो यहां पर निश्चित तौर पर बड़ा फर्जीवाड़ा निकलेगा।

यही वजह थी कि जब 2017 में उत्तर प्रदेश होमगार्ड मुख्यालय से एडीजी जसबीर सिंह निरीक्षण पर गये थे तो कानपुर नगर के कमांडेंट, मंडलीय कमांडेंट सहित सभी अधिकारी भाग गये थें। जसबीर सिंह शाम तक कार्यालय में बैठे रहें लेकिन कोई भी अधिकारी अपने कार्यालय में वापस नहीं आया था। जसवीर सिंह ने वर्ष 2017 में ही उत्तर प्रदेश में फ र्जी मस्टररोल का खुलासा कर दिया था जिसकी रिपोर्ट उन्होंने डी.जी. सूर्य कुमार शुक्ला, होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर को दी थी और उसके बदले में दोनों ने मिलकर उनका ही तबादला करवा दिया।

                                                              अगले अंक में कृष्ण कुमार मिश्रा के अकूत संपत्यिों का करेंगे खुलासा…

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