थानों के चप्पे-चप्पे पर रखी जाएगी नजर, लगेंगे कैमरे, थानेदार से लेकर जिले के कप्तान तक देख सकेंगे फुटेज

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प्रदेश भर के लगभग 1700 थानों को तीन श्रेणियों में बांटकर कैमरे लगाने की योजना है

बड़े थानों में 16 कैमरे, मध्यम श्रेणी के थानों में 12 और छोटे थानों में 8 कैमरे लगाए जाने हैं

इस साल के अंत तक सभी थानों में कैमरे लगाने का लगाने का प्रयास किया जा रहा है

इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा

ब्यूरो

लखनऊ। प्रदेश भर में थानों के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देश भर में सभी थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसी आदेश के अनुपालन में यूपी में भी थानों में कैमरे लगाए जाने का डीपीआर तैयार किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों के संरक्षण और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए निर्देश दिए थे। इसके तहत प्रत्येक थाने में एक से दो कैमरे लगाकर खानापूरी की गई थी। जिन दो स्थानों पर कैमरे लगाए गए थे, उनमें थाना कार्यालय और हवालात शामिल हैं। अब पूरे थाने परिसर को कवर करने के लिए कैमरे लगाए जाएंगे। इसके तहत प्रदेश भर के लगभग 1700 थानों को तीन श्रेणियों में बांटकर कैमरे लगाने की योजना है। बड़े थानों में 16 कैमरे, मध्यम श्रेणी के थानों में 12 और छोटे थानों में 8 कैमरे लगाए जाने हैं। इसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों का कहना है कि इस साल के अंत तक सभी थानों में कैमरे लगाने का लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।

सूत्रों ने बताया कि कैमरों की फीड क्लाउड स्टोरेज पर उपलब्ध होगी। इसे थाने के इंस्पेक्टर, सर्किल के सीओ, अपर पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक लाइव देख सकेंगे। वहीं पुलिस आयुक्त प्रणाली वाले जिलों में थाना प्रभारी, सहायक पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस आयुक्त या संयुक्त पुलिस आयुक्त और पुलिस आयुक्त थाने की लाइव फीड देख सकेंगे। वहीं, कैमरे की रिकार्डिंग तीन माह तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि यह निर्णय नहीं हो सका है कि रिकार्डिंग को जिला स्तर पर या प्रदेश स्तर पर सुरक्षित रखा जाएगा।

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