Wed. Oct 21st, 2020

video सचिवालय में कहीं कोई बड़ा ‘धमाका’ करने की साजिश तो नहीं !

सचिवालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की निष्ठा ‘योगी ‘ के बजाये ‘पूर्व सीएम’ पर तो नहीं ?

सचिवालय में आज दो गाडिय़ों पर फर्जी पास लगाकर प्रवेश करते दो लोग पकड़े गये

विधायक के नाम पर गाड़ी पर लगा था फर्जी प्रवेश पत्र

संदेश के दायरे में मुख्य सुरक्षाधिकारी जिलाजीत चौधरी : दोनों को क्यों छोड़ा ?

संजय पुरबिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने का कुचक्र तो नहीं रचा जा रहा है। बागपत कांड केज्ज् बाद सूबे की सियासत में मचे भूचाल के बाद आज सचिवालय के अंदर कूटरचित पास और वाहनों का नंबर डालकर प्रवेश करते दो लोगों को गेट नंबर 7 पर तैनात रक्षक अभय कुमार पाण्डेय की चौकन्नी निगाहों ने धरदबोचा। पूर्व विधायक की गाड़ी नंबर यूपी-41 ई-0205 पर लगी सचिवालय पास को कूटरचित तरीके से बनाया गया है। गाड़ी दिल्ली की है और नंबर कानपुर का पड़ा है। इसी तरह पकड़ी गयी दूसरी गाड़ी पर लगा सचिवालय वाहन पास स्कैन करके दूसरी गाड़ी में प्रयोग किया जा रहा है। इस गाड़ी को सचिवालय में लाने वाले शख्स ने अपना परिचय अभय प्रताप सिंह,समीक्षा अधिकारी संविदा,प्रमुख सचिव विधानसभा बताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि रक्षक अभय कुमार पाण्डेय ने जब फर्जी वाहन प्रवेश पत्र लेकर सचिवालय में घुस रहे लोगों को पकडक़र मुख्य सुरक्षा अधिकारी जिलाजीत चौधरी के पास ले गये तो उन्हें छोड़ क्यों दिया गया ?

 

 

 

 

सचिवालय कर्मचारी इस घटना से भयाक्रांत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यही हाल रहा तो किसी भी दिन सचिवालय के अंदर बड़ा कांड हो सकता है। चर्चा इस बात की भी जोरों पर है कि मुख्य सुरक्षा अधिकारी भाजपा सरकार में तैनात हैं लेकिन इनकी निष्ठा योगी आदित्यनाथ के प्रति नहीं बल्कि पूर्व क मुख्यमंत्री के प्रति है ? बात जो भी हो, यही हालात रहा तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कोई भी शख्य फर्जी वाहन पास बनाकर सचिवालय में बड़ा हादसा कर सकता है…। देखना है कि शासन में बैठे अफसरान घोर लापरवाही बरतने वाले सचिवालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं? सवाल यह भी है कि आखिर जब एक रक्षक ने फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को रंगेहाथ पकड़ा तो उन्हें छोड़ा क्यों गया? कहीं ये कोई साजिश तो नहीं ?

 

आज सुबह 11.15 बजे सचिवालय के गेट नंबर 7 से पूर्व विधायक की क्वालिश टोयटा गाड़ी नंबर यूपी 41 ई 0205 अंदर जा रही थी। उसी दौरान ड्यूटी पर तैनात रक्षक विधान भवन रक्षक संजीव रंजन की नजर गाड़ी पर चस्पे नंबर और प्रवेश पत्र की गहनता से जांच की। उसने देखा कि गाड़ी का प्रवेश पत्र वर्ष 2019 एवं गाड़ी एवं गाड़ी संख्या कूटरचित तरीके से लिखा गया है। रक्षक ने प्रवेश पत्र केे जब्त कर लिया लेकिन गाड़ी में बैठे पूर्व विधायक ने अपना व्यक्तिगत प्रवेश पत्र नहीं दिखाया। नवीन भवन के प्रभारी निरीक्षक सुरक्षा शिवबरन ने इसकी लिखित सूचना मुख्य सुरक्षा अधिकारी जिलाजीत चौधरी को दी। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने इनलोगों से बात करने के बाद छोड़ दिया। क्यों ?

फर्जी वाहन पास लेकर सचिवालय के अंदर घुसने वालों को पुलिस के हवाले क्यों नहीं किया? इससे पूर्व भी इन्होंने एक फर्जी विधायक की गाड़ी को लेकर अंदर आने वालों को छोड़ दिया था। एक बात तो तय है कि आज भी सचिवालय में फर्जी पास बनाने का गोरखधंधाजारी है। इस पर रोक नहीं लगा तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर सचिवालय की सुरक्षा यानि यूपी सरकार के माननीय और टॉप क्लास के अफसरों व हजारों कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कैसे अधिकारी के हांथ में दिया गया है,जो गुनहगारों पर भी मेहरबानी बरत रहा है?

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