ट्रेनिंग सेंटर छोड़ लखनऊ परिक्रमा करने वाले मंडलीय कमांडेंटों की अब खैर नहीं…

संजय श्रीवास्तव
Dig Ajay Pandey in action mode : होमगार्ड विभाग में हाल ही में नवनियुक्त डीआईजी, प्रशिक्षण अजय कुमार पाण्डेय ‘एक्शन मोड’मोड में आ गये हैं। ‘अनुशासन तोडऩे’ और मुख्यालय के अफसरों को ‘हल्के’ में लेने वाले ट्रेनिंग सेंटर के अफसरों को ‘सिस्टम’ में लाना शुरु कर दिया है। गोरखपुर के मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र पर तैनात मंडलीय कमांडेंट गिरीश चन्द्र कटियार कल यानि 5 जनवरी को लखनऊ स्थित होमगार्ड मुख्यालय पर ‘टहलते’ दिख गये। फिर क्या था, डीआईजी पाण्डेय जी की गिद्ध नजर जैसे ही उन पर पड़ी पारा गरम…। पाण्डेय जी ने उसी समय ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर पूछा गया कि ‘आप किसके निर्देश पर ट्रेनिंग सेंटर छोड़ लखनऊ घूम रहे हैं ‘? ‘आपने लखनऊ आने से पूर्व मुझसे अनुमति क्यों नहीं ली’? बात जो भी हो,डीआईजी अजय पाण्डेय ने एक पत्र जारी कर सभी अफसरों तक संदेश पहुंचा दिया कि अब पहले वाली बात नहीं,सिस्टम से सभी को काम करना होगा वर्ना…।

गिरीश चंद्र कटियार को दिये गये पत्र में डिप्टी कमांडेंट जनरल,प्रशिक्षण,उ.प्र. अजय कुमार पाण्डेय ने निर्देशित किया है कि 5 जनवरी को आप होमगार्ड मुख्यालय परिसर में देखे गये हैं। जबकि होमगार्ड मुख्यालय द्वारा स्पष्ट निर्देश निर्गत किये गये हैं कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी सक्षम स्तर से बिना पूर्वानुमति के शासन द्वारा होमगार्ड मुख्यालय पर उपस्थित नहीं रहेगा। इस पर श्री कटियार से स्पस्टिकरण मांगा गया है। पत्र में लिखा है कि आप किसकी अनुमति से होमगार्ड मुख्यालय पर उपस्थित हुये? यदि आपने मुख्यालय पर उपस्थित होने हेतु कोई अनुमति प्राप्त नहीं किया है तो आपका यह कृत्य आदेश के खिलाफ, स्वेच्छाचारिता,मनमानेपन का दर्शाता पाया जायेगा। यदि आपका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आपके खिलाफ नियमानुसार अग्रेतर कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।
पत्र जारी होते ही प्रदेश के सभी अफसरों में हड़कम्प मच गया क्योंकि इससे पूर्व किसी सीनियर अफसर ने ऐसा एक्शन नहीं लिया था। सीधी बात करें तो प्रदेश के कोने-कोने में तैनात मंडलीय कमांडेंट हों या जिला कमांडेंट, सभी लखनऊ को सैरगाह बना रखे थे। कई मंडलीय कमांडेंट तो ऐसे हैं,जिन्होंने पूरी नौकरी लखनऊ अपने निजी आवास पर या फिर मुख्यालय,शासन की परिक्रमा करते बिता दी। शासन स्तर के अफसर या डीजी कभी भी औचक निरीक्षण कर लें तो 60 प्रतिशत मंडलीय कमांडेंट और जिला कमांडेंट अपने-अपने जिले से गायब मिलेंगे। लेकिन लगता है अब ऐसा नहीं होगा…।












