स्वामी विवेकानंद जयंती: ‘विवेकानंद समता फाउंडेशन’ नि:स्वार्थ भाव से अवाम की सेवा कर रही है-सतीश श्रीवास्तव

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नीलांश सेलेस्ट,ऐशबाग में धूमधाम से मना स्वामी विवेकानंद की जयंती

स्वामी विवेकानंद जयंती: स्वामी जी ने हिन्दू धर्म,सनातन धर्म का संदेश विश्व में फैलाया- जस्टिस अनिल कुमार

स्वामी विवेकानंद जयंती: विवेकानंद समता फाउंडेशन नि:स्वार्थ भाव से अवाम की सेवा कर रही है-सतीश श्रीवास्तव

जब सभी जातियां एक हो गयी हैं तो कायस्थ क्यों नहीं एकजुट हो रहे हैं- सर्वेश अस्थाना

संजय श्रीवास्तव

Vivekananda Equality Foundation news : स्वामी विवेकानंद व महर्षि महेश योगी की जयंती की पूर्व संध्या पर नीलांश सेलेस्ट,ऐशबाग पर विवेकानंद समता फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक जस्टिस अनिल कुमार ने कहा कि भारत में 19वी सदी में अंग्रेजी शासन का बोल-बाला था और दुनिया हमें हेय दृष्टि से देखती थी। उस समय भारत माता ने 12 जनवरी 1863 को एक ऐसे लाल को जन्म दिया, जिसने भारत के लोगों का ही नहीं पूरी मानवता का गौरव बढ़ाया। माता- पिता ने बालक का नाम नरेन्द्र रखा, बाद वे आध्यात्म से सराबोर होकर स्वामी विवेकानंद कहलाये। वह भारत के पहले हिंदू सन्यासी थे, जिन्होंने हिंदू धर्म और सनातन धर्म का संदेश विश्व भर में फैलाया। उन्होंने विश्व में सनातन मूल्यों, हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति की सर्वोच्चता स्थापित की। इस दौरान विशिष्ट अतिथि जस्टिस राकेश श्रीवास्तव, जस्टिस महेंद्र दयाल, न्यायाधीश डी.के. श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। दीप प्रज्वलन के बाद भगवान चित्रगुप्त महाराज, स्वामी विवेकानंद एवं महर्षि महेश योगी जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की गयी। सौम्या श्रीवास्तव और सुप्रसिद्ध गायक प्रदीप अली द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी यी और जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किये गये।

 

इसी क्रम में संस्था के संयोजक मनीष हिंदवी ने विवेकानंद समता फाउंडेशन द्वारा किये जा रहे सामाजिक कार्यों और गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कोरोना के संक्रमण काल में जब लोग घरों से बाहर नहीं निकलते थे,संस्था के जांबाज सहयोगियों ने घर-घर जाकर राशन वितरण का काम किया। संस्था तब तक भोजन-राशन वितरण का काम करती रही,जब तब प्रशासन ने ये नहीं कहा कि अब कोरोना काल खत्म हो गया है आपलोग नि:स्वार्थ राशन वितरण के कार्य को बंद कर दें।

संस्था के अध्यक्ष सतीश श्रीवास्तव ने सभी का स्वागत करते हुये संस्था के भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था की सकारात्मक सोच और नि:स्वार्थ किये जा रहे कार्यों को देखकर ही मैंने पद स्वीकृत किया। मेरा मानना है पद से बड़ा नि:स्वार्थ रुप से अवाम की भलाई के लिये किये जाने वाला काम होता है। संस्था नि:स्वार्थ भाव से अवाम की सेवा कर रही है।

इस दौरान व्यंगकार,कवि व लेखक सर्वेश अस्थाना ने पूरी बेबाकी से कुछ ऐसी बातें कही कि वहां मौजूद हजारों की संख्या में कायस्थों की चेहरों पर रौनक दिखने लगी। श्री अस्थाना ने कहा कि यूपी की सियासत हो या फिर जनता की नजरिया, पूरी तरह से जातियों में बंट गयी है। जब ब्राम्हण और ठाकुर सहित अन्य जातियां एक हैं तो फिर हम कायस्थ एक जुट क्यों नहीं हो रहे हैं ? उन्होंनेये भी कहा कि सबसे बड़ी भागीदारी कायस्थों की, फिर माननीय, सांसद, विधायक, जिला पंचायत, ब्लॉक प्रमुखों की सीटों पर कायस्थ क्यों नहीं बैठ सकते ? बातों में ठीक उसी तरह की दमदारी दिखी, जैसा विवेकानंद जी सोचते थे। इस दौरान वहां मौजूद कायस्थ सोचने पर मजबूर हो गये होंगे कि हमलोगों को भी एकजुट होना पड़ेगा…।

फाउंडेशन के पदाधिकारी संतोष श्रीवास्तव, अनुराग श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार प्रकट किये। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव, उमेश श्रीवास्तव, बी.पी. श्रीवास्तव, डॉक्टर ज्योत्सना श्रीवास्तव, के. के. श्रीवास्तव,ए.के.श्रीवास्तव, रजनीश श्रीवास्तव , अजीत सिन्हा, अरविंद श्रीवास्तव, दीपक रंजन, रमेश श्रीवास्तव, तथा विवेकानंद समता फाउंडेशन  के सभी पदाधिकारी व

सक्रिय सदस्यों रत्नाकर श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास्तव, सुनील श्रीवास्तव, रतन श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, संदीप श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव, विनोद श्रीवास्तव, प्रसून माथुर, निर्मल श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, सुमित श्रीवास्तव ,आयुष बिसारिया ,मानस मित्रा, डॉक्टर सुधांशु मोहन श्रीवास्तव,अमिताभ सिन्हा, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अजीत श्रीवास्तव, अंजनी श्रीवास्तव ,सुमित नंदी, विशाल श्रीवास्तव , राहुल सक्सेना , अनुरुद्ध श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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