मुख्य सचिव के आवास पर फर्जी होमगार्ड लगाने वाले रणधीर सिंह को मुख्यालय के अफसरों ने किया बहाल
लखनऊ में हुआ फर्जी मस्टर रोल घोटाला, तो लखनऊ के मंडलीय कमांडेंट संजय सिंह को क्यों दी गयी जांच?
मुख्यालय के अफसरों ने सोची-समझी रणनीति के तहत संजय सिंह को बनाया जांच अधिकारी
आखिर ड्यूटी लिपिक लक्ष्मी यादव के खिलाफ क्यों नहीं हुयी कार्रवाई ? फर्जी मस्टर रोल तो इसने भी बनाता था…

संजय श्रीवास्तव
लखनऊ। डीजी होमगार्ड एम. के. बशाल फरवरी में रिटायर हो रहे हैं। ये काफी सख्त अफसर माने जाते हैं,जिसकी वजह से होमगार्ड अफसर परेशान रहते हैं। लेकिन अब खुश हैं, क्योंकि सभी ने मन बना लिया है कि उनके रिटायरमेंट की तैयारी करो…क्योंकि डीजी साहेब के पास अब कुछ करने का समय नहीं बचा है…। घोटालों और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने के बजाये वे छुट्टी लेकर अपना समय काट रहे हैं। ये सच भी है, क्योंकि नोयडा से लेकर गाजियाबाद तक के मस्टर रोल घोटालों सहित लखनऊ में हुये मस्टर रोल घोटाले के आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाये हैं…। हास्यापद बात तो ये है कि इनके नाक के नीचे बैठे मुख्यालय के अफसरों ने नियमों को तार-तार कर मुख्य सचिव के यहां फर्जी मस्टर रोल बनाने वाले वरिष्ठ लिपिक रणधीर सिंह सिंह को बहाल कर दिया है। उस पर किसी की निगाह ना पड़,े इसलिये उसका ट्रांसफर सीतापुर कर दिया। चौंकाने वाली बात ये है कि रणधीर सिंह की तैनाती सीतापुर में है लेकिन जिला कमांडेंट कार्यालय,लखनऊ में काम कर रहा है। इसी तरहड्यूटी लिपिक लक्ष्मी यादव,जो इस फर्जीवाड़े में शामिल था, उसके खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गयी।
‘द संडे व्यूज़’ डीजी एम. के. बशाल और विभागीय मंत्री धर्मवीर सिंह से सवाल करता है कि जिन कर्मचारियों ने मसलन बीओ सुरेश सिंह,वरिष्ठ लिपिक रणधीर सिंह और ड्यूटी लिपिक लक्ष्मी यादव ने मुख्यालय के अफसरों की मिलीभगत से मुख्य सचिव के आवास पर फर्जी मस्टर रोल से होमगार्डों की तैनाती दिखायी। करोड़ों रुपये कमाये,इनके खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें जेल की सलाखों में क्यों नहीं भेजा गया ? सवाल ये है कि जब साफ तौर पर दोषी पाये जाने पर क्लर्क रणधीर सिंह को विभाग ने निलंबित कर दिया था तो उसे दो माह बाद बहाल किस आधार पर किया गया? सवाल ये भी है कि लखनऊ में हुये मस्टर रोल घोटाले के आरोपियों के खिलाफ जांच इसी मंडल के मंडलीय कमांडेंट संजय सिंह से क्यों करायी गयी ? क्यों नहीं दूसरे मंडल के मंडलीय कमांडेंट से जांच करायी गयी ? सवाल ये है कि चीफ सेके्रटरी के यहां फर्जी ड्यूटी लगाने वाले ड्यूटी लिपिक लक्ष्मी यादव के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गयी ?
सच तो ये है कि मुख्यालय पर बैठे तथाकथित अफसरों ने डीजी श्री बशाल को गुमराह कर पूरा खेल कर ठीक-ठाक माल कमा लिया। कोई बात नहीं द संडे व्यूज़ का भ्रष्टाचार के खिलाफ मिशन चलता रहेगा और बतायेंगे किस अफसर ने किसके साथ मिलकर फर्जी मस्टर रोल बनाने वालों को बहाल किया और ये भी बतायेंगे कि फर्जी मस्टर रोल के मास्टर माइंड बीओ सुरेश सिंह को भी बहाल करने के लिये पूर्व डीजी के यहां पत्रावली लगाने का कुचक्र रचा गया था लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
अगले अंक में कैसे और किस अफसर के इशारे पर रची गयी थी भ्रस्टाचार की कहानी और आरोपी के बहाली में कौन अफसर है शामिल












