Asha Bhosle news:महान गायिका आशा भोसले के रविवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन के बाद लखनऊ में उनसे जुड़ी 18 वर्ष पहले की बात याद आ रही है। आशा भोसले ने भोजपुरी फिल्मों में गाना बंद कर दिया था, लेकिन वर्ष 2008 में उन्होंने भोजपुरी फिल्म ”नेहिया-सनेहिया” के तीन गानों में अपना सुर दिया था।

मीडियाकर्मियों ने इसके बाद उनसे पूछा कि आपने संकल्प लिया था कि अब भोजपुरी फिल्मों में नहीं गाएंगी, फिर ऐसा क्यों किया। आशा ने कहा कि मुझे भोजपुरी फिल्म ”गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबै” के संगीतकार चित्रगुप्त के बाद कोई संगीतकार पसंद आया है तो वो हैं केवल कुमार। इसलिए मैं उन्हें मना नहीं कर पाई।
तब उन्होंने कहा कि आपकी इतनी अच्छी आवाज है आपको तो फिल्मों में गाना चाहिए। आपको प्ले बैक सिंगर (पार्श्वगायक) होना चाहिए। इस पर मैंने कहा कि आशा जी अगर मैं प्ले बैक सिंगर होता तो आपको गवाने का फख्र कहां से पाता। फिर पांच-10 मिनट में हमसे बात कर वह इतनी सहज हो गईं कि अपने घर-परिवार की सब बातें बताने लगीं। वृद्धाश्रम जाने से लेकर अपने परिवार के अनेक किस्से बताए।
मैंने उनसे कहा कि आपने अपने भाई की फिल्म में जो गाना गाया वो कमाल का है। तब उन्होंने बताया कि जिस दिन रिकार्डिंग थी, उस दिन वह बाहर आयीं तो भाई ने उन्हें बहुत डांटा। उन्होंने डरते-डरते वो गाना गाया था। केवल कुमार कहते हैं कि हजारों वर्षों में भी आशा भोसले जैसी गायिका होना मुश्किल है। मैं छोटा सा संगीतकार हूं, मुझे आशा जी ने कहां से कहां पहुंचा दिया। उनके जाने का बहुत दुख है। भजन गायिका स्वाती रिजवी ने बताया कि मैंने मुंबई में आशा भोसले के साथ एक बार मंच साझा किया था। इसमें उत्सव फिल्म का गाना- ”दिल क्यूं बहका रे बहका रे बहका आधी रात को गाया” तो आशा भोसले ने मेरी तारीफ की थी।
आशा ने गाए थे ”उमराव जान” के हिट गाने
मुजफ्फर अली की 1981 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म ”उमराव जान” की मुख्य गायिका आशा भोसले थीं। उन्होंने इस फिल्म के लगभग सभी सुपरहिट गानों में अपनी आवाज दी। इस फिल्म के गाने ”दिल चीज क्या है”, ”इन आंखों की मस्ती के”, और ”ये क्या जगह है दोस्तों” गाने आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं। फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली ने इस फिल्म की मलिहाबाद, चिड़ियाघर की ऐतिहासिक बारादरी और शहर के अन्य हिस्सों में शूटिंग की थी।












