ब्यूरो, लखनऊ। बंगाल और असम में प्रचंड जीत से उत्साहित भाजपा ने अब उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव को नाक का सवाल बना लिया है। पार्टी ने हर बूथ जीतकर प्रदेश में तीसरी बार चुनावी पताफा फहराने का लक्ष्य तय किया है।अध्यक्ष पंकज चौधरी एवं संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने मंगलवार को प्रदेश मुख्यालय पर सभी 98 संगठनात्मक जिलाध्यक्षों एवं प्रभारियों की बैठक लेकर बूथों पर जीत के कारकों की थाह ली। हर बूथ के जातीय एवं क्षेत्रीय समीकरणों को मथा गया। वहीं, बूथ कमेटियों के भौतिक सत्यापन से संदेश दिया गया कि अब कागजी नहीं, सिर्फ जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रशंसा का पटका पहनाया जाएगा। 2024 लोकसभा चुनाव की तरह कोई चूक नहीं की जाएगी।

बैठक के मद्देनजर साढ़े 10 बजे तक सभी 45 प्रदेश पदाधिकारी, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं सभी जिलाध्यक्ष व प्रभारी हाथ में फाइलों का बंडल लेकर प्रदेश मुख्यालय पहुंच गए। 1918 मंडलों के 27633 शक्ति बूथों समेत कुल 162459 बूथों को मथकर रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य था। भाजपा कार्यालय के अंदर से बाहर तक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ व वाहनों से आसपास की सड़कों पर जाम लग गया।
पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह ने बैठक में बूथ प्रबंधन का महत्व बताते हुए इसे जीत का आधार बनाने के लिए कहा। सभी जिलों से 24 मई को शक्ति केंद्रों पर आयोजित होने वाली संगठनात्मक बैठक के लिए प्रवासी कार्यकर्ताओं की सूची मांगी। फिर मंडल प्रवास एवं इसकेे सत्यापन, नई बूथ समितियों के गठन, जिलों में बूथ प्रभारियों एवं पालकों के साथ ही बूथों के दो वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की सूची मांगी और जांची गई। कई अध्यक्षों का काम अधूरा मिला, जिन्हें चुनाव को देखते हुए तत्परता से काम पूरा करने के लिए कहा गया। जिलों की कोर कमेटियों, प्रस्तावित प्राधिकरण सदस्यों, उपभोक्ता फोरम एवं जेल विजिटर कमेटियों का पैनल मांगा गया।
इस दौरान विधानसभा सीटों के राजनीतिक चरित्र पर अध्ययन कर जीत के सबसे महत्वपूर्ण कारकों पर मंथन किया गया। विधान सभा चुनाव की सीटों को कई श्रेणियों में बांटा गया है, इसलिए सीटों की सामाजिक स्थिति, राजनीतिक चाल और भूगोल की जानकारी माहभर में प्रदेश इकाई को भेजी जाएगी। विपक्षी दलों एवं उनके संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक स्थिति पर भी रिपोर्ट बनेगी। बूथ प्रबंधन के दौरान यह भी पता किया जाएगा कि 2022 विधानसभा एवं 2024 लोकसभा चुनाव में चुनिंदा सीटों पर भाजपा का वोट घटने की क्या वजह थी। यहां पर ग्राफ बढ़ाने के लिए पार्टी को क्या करना होगा। यह रिपोर्ट मतदान केंद्र प्रभारी के जरिये शक्ति केंद्र होते हुए जिला इकाई और फिर प्रदेश संगठन तक पहुंचेगी।












