होमगार्ड वारिस अली की पत्नी की निकली आह… अल्लाह पाक मेरे पति के हत्यारे को ना बख्शे…
डीजी एम.के.बशाल का निर्देश: 15 दिनों में वारिस अली की रिपोर्ट सौंपे,पियूषकांत ने जवाब देना मुनासिब नहीं समझा
मृतक वारिस अली की पत्नी का बयान :
1- दारोगा ने कहा अपने पति का पोस्टमार्टर करा दो 35 लाख मुआवजा मिलेगा,35 रुपये नहीं मिले
2-पति की मौत को 6 माह हो गये लेकिन विभाग से कोई अफसर झांकने तक नहीं आया
3- अल्लाह पाक हैं,किसी तरह घर खर्चा चल रहा है,नईहर,सास मदद कर देती हैं…

संजय श्रीवास्तव
Homeguad waris ali news: मुख्यमंत्री जी, आपके यूपी में एक होमगार्ड वारिस अली की मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर हार्ट अटैक से मौत हो जाती है। उस होमगार्ड को ट्रेनिंग सेंटर से जबरियन, नियम विरुद्ध मुगलसराय स्टेशन पर ले जाने वाला अफसर मंडलीय कमांडेंट गिरीश चंद्र कटियार होमगार्ड की तबीयत खराब होते देख भाग निकला। उसने ये भी परवाह नहीं किया कि जिस जवान को लेकर आया है, वो उसी के विभाग का मुलाजिम है। कायर अफसर यदि होमगार्ड को तत्काल किसी हॉस्पिटल में भर्ती करा देता तो आज वो जवान ड्यटी स्थल पर बावर्दी सलामी ठोंक रहा होता… लेकिन समय पर इलाज ना मिलने से वो तड़प-तड़प कर मर गया…। एक पत्नी बेवा हो गयी…पांच मासूम बच्चे अनाथ हो गये और आज पूरा परिवार भूखमरी की कगार पर है। उस घर में इस कदर आर्थिक संकट है कि एक समय का खाना नसीब हो जाये,बड़ी बात है। ‘द संडे व्यूज़’ की टीम जब रामनगर स्थित मृतक वारिस अली के घर पहुंची तो वहां का नजारा देख सभी के होश उड़ गये। बताया गया कि इलाहाबाद परिक्षेत्र के डीआईजी पीयूषकांत को डीजी साहेब ने जांच सौंपी,वो या उनके अधिनस्थ अधिकारी आज तक झांकने नहीं आये…। किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि वारिस अली का परिवार किस हाल में है…। 6 माह गुजर गया ना तो अभी तक परिवार को कोई मुआवजा मिला और ना ही डीजी के निर्देश का पालन किया गया। बता दें कि पूर्व डीआईजी मुख्यालय विनय कुमार मिश्रा ने डीजी के निर्देश पर जांच पीयूष कांत को सौंपी और हिदायत दी थी कि 15 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश किया जाये लेकिन…4 माह बाद भी पियूषकांत ने जांच तो दूर मृतक के परिवार का बयान तक नहीं लिया। पूरा खेल इस मौत के जिम्मेदार अफसर को बचाने में किया जा रहा है। बड़ी कुर्सी मिलने की खुशी में पियूषकांत ने डीजी के आदेश की धज्जियां उड़ाने में कोई कोताही नहीं बरती। वैसे भी इस विभाग में विभागीय अफसर आईएएस के निर्देशों को सुन तो लेते हैं लेकिन बाहर निकलते ही उनकी जगहसाई करते हैं।

खैर, मुख्यमंत्री जी,मैं जानता हूं कि शासन के अलंबरदार नौकरशाह कलेजे को चीर देने वाली इस तरह की खबरों को आपके सामने पेश क्यों नहीं करते ? आपके सामने फर्जी आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर ये साबित करने में कामयाब हो जाते हैं कि यूपी में अमन-चैन कायम है…। लेकिन सच्चाई इसके विपरित है…। अफसर प्रमोशन…प्रमोशन खेल रहे हैं…बड़ी कुर्सी के मद में इतने चूर हो गये हैं कि उनकी कार्यशैली से इंसानियत शर्मसार हो गयी है…। 6 बच्चों के साथ मां भूखमरी की कगार पर है। पूरा परिवार कर्जे से लद गया है। मृतक की पत्नी अपनी व्यथा बताते हुये रोने लगी…। बच्चों ने कहा कि सर,हमलोगों को सड़क पर लाने वाले गुनहगार कटियार को सजा कब मिलेगी! मुख्यमंत्री जी,मेरा सवाल आपसे और होमगार्ड विभाग के तेज तर्रार डी.जी. एम.के.बशाल साहेब से है …। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चंद किलो मीटर दूर रामपुर ट्रेनिंग सेंटर से होमगार्ड वारिस अली को जबरदस्ती मुगलसराय रेलवे स्टेशन ले जाने वाले पूर्व मंडलीय कमांडेंट गिरीश चंद्र कटियार के खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुयी ? डीजी साहेब,सच्चाई तो ये है कि होमगार्ड वारिस अली की मौत के केस को दबाने और मंडलीय कमांडेंट गिरीश चंद्र कटियार को बचाने में नये नवेले डीआईजी पियूषकांत और उनकी टीम पूरी तरह से लग गयी है।

चौंकाने वाली बात ये है कि डीजी ने 15 दिनों में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया लेकिन अभी तक पियूषकांत ने मृतक के परिजनों का बयान तक नहीं लिया, क्योंं ? ‘द संडे व्यूज़’ की टीम रामनगर पहुंची तो परिजनों ने कातर निगाहों से देखते हुये बताया कि साहेब इलाहाबाद परिक्षेत्र के डीआईजी के कार्यालय से 20 दिसंबर को फोन आया था कि साहेब मिलना चाहते हैं। एक दिन बाद जब गरीब परिवार बस से इलाहाबाद के लिये रवाना हुआ तो आधे रास्ते में ही इलाहाबाद कार्यालय से कॉल आया कि साहेब व्यस्त हैं अभी काम नहीं हो पायेगा,8 को बतायेंगे…जब बुलाया जायेेगा,तब आना…। उसके बाद से ना तो कॉल आया और ना ही बुलाया गया…।
मृतक की पत्नी सीमा बेगम ने बताया कि छह बच्चों के साथ किस तरह गुजर-बसर कर रही हूं,मैं ही जानती हूं…। पति के मौत के बाद पूरा परिवार खाने के लिये तरस रहा है…। उन्होंने बताया कि अल्ला पाक की रहमत है,किसी तरह घर खर्चा चल रहा है। मेरी सास कुछ सपोर्ट कर देती हैं और नईहर से भी सहयोग मिल जाता है…।मेरे पति ने पूरी नौकरी ईमानदारी से की लेकिन विभाग ने उनके गुजरने के बाद रत्ती भर सम्मान नहीं दिया। वारिस अली के मौत के लिये किसे जिम्मेदार मानती हैं? इस पर सीमा बेगम ने कहा कि उन्हें स्टेशन ले जाने वाला जिसका फोटो अखबार में छपा है बता दें कि द संडे व्यूज़ के पेज वन पर वारिस अली और गिरीश चंद्र कटियार की फोटो छपी है। मृतक की पत्नी नाम नहीं बता पा रही थी,तभी पीछे से उनका बेटे ने नाम बताया गिरीश कटियार और अजय यादव जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी कमांडर भी उस समय साथ में थे,उन्होंने कुछ भी नहीं बताया। चार बजे भोर में मेरे बेटे के फोन पर कॉल आया कि वारिस अली की तबीयत खराब है,तुरंत मुगलसराय पहुंचो। उसके बाद उनका फोन किसी ने लॉक कर दिया। जब हमलोग मुगलसराय के हॉस्पिटल पहुंचे तो देखें कि वे लेेटे हुये हैं,जब झकझोरा गया तो पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। दारोगा ने कहा कि अपने पति का पोस्टमार्टम करा दो तो 30-35 लाख रुपये मिल जायेगा। साहेब 35 लाख तो छोडिय़े 35 रुपये तक नहीं मिले। मैं अल्लाह से दुआ करती हूं कि मेरे पति को मारने वाला अफसर बे-मौत मारा जाये…। आखिर मेरे पति जब ट्रेनिंग सेंटर पर रात की डयूटी कर रहे थे तो उनको मुगलसराय स्टेशन क्यों ले गया ?

विभाग में चर्चा जोरों पर है कि स्टाफ ऑफिसर विनय मिश्रा ने जांच अपने चहेते पीयूष कांत को जानबूझ कर दिलाया था। शर्मनाक बात तो ये है कि रामनगर जाकर पियूषकांत को जांच करनी चाहिये थी लेकिन वे गरीब लोगों को पत्र लिखकर बुला रहे हैं प्रयागराज। वारिस अली को दिवंगत हुए बीते 6 माह हो गये लेकिन होमगार्ड मुख्यालय अब भी लगा हुआ है लीपापोती कर अपने शातिर कमाऊ खेल में। कायदे से जांच अधिकारी और होमगार्ड मुख्यालय को तो रेलवे से सीसीटीवी फु टेज लेना चाहिए था। वारिस अली और गिरीश कटियार का सीडीआर निकलवाना चाहिए था। दोनों के मोबाइल की उस समय की लोकेशन निकलवाना चाहिए था, किंतु लग गए लीपापोती में। स्टाफ ऑफि सर साहेब और अपने चहेते को बचाने के लिए शुरू कर दिए जांच का गंदा खेल। परिवार का बयान लेकर पीयूष कांत क्या सिद्ध करना चाहते हैं,् क्या परिवार का मुखिया वारिस अली मरा नहीं था? वारिस अली के साथ न्याय तो हुआ नहीं, उल्टे जांच के नाम पर परेशान करने के लिए बुलाया जा रहा प्रयागराज। गरीब, बेसहारा परिवार अब जांच के नाम पर उधार लेकर जाये प्रयागराज और संतुष्ट करे डीआईजी साहेब को ?
‘द संडे व्यूज़’ के पास शब्द कम पड़ रहे हैं…।एक पत्नी और छह अनाथ बच्चों को देख सिर्फ यही कह सकता हूं कि कटियार साहेब आप या जांच करने वाले डीआईजी पियूषकांत साहेब, भले ही आपलोग सरकार,शासन या फिर अपने डीजी को ताख पर रखते हों लेकिन ईश्वर से डरिये…क्योंकि उसकी लाठी में बहुत दमदार दम होता है…। आखिर में बड़का डीआईजी पियूषकांत से ‘द संडे व्यूज़’ का सवाल है…। डीजी के निर्देश के बाद आप रामनगर मृतक वारिस अली के घर गये थे, नहीं तो क्यों ? डीजी ने 15 दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी थी, आपने दिया,नहीं तो क्यों ? क्या आप डीजी एम.के.बशाल को हल्के में लेते हैं ? हां या ना?











