दुनिया भर में धूमधाम से मनाया गया भारत का 77वां गणतंत्र दिवस

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नई दिल्ली। भारत ने 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया, जिसका जश्न देश की सीमाओं के बाहर भी देखने को मिला।  दुनिया भर में स्थित भारतीय मिशनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों, राजनयिक मुलाकातों और सामुदायिक भागीदारी के जरिए इस अवसर को बड़े उत्साह के साथ मनाया।
मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा मॉस्को में भारतीय दूतावास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस का जश्न मनाने के लिए एक रिसेप्शन का आयोजन किया। राजदूत विनय कुमार और मुख्य अतिथि, रूसी संघ के उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको ने सभा को संबोधित किया। दूतावास ने आगे बताया कि पद्म श्री पुरस्कार विजेता ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा को राजदूत कुमार द्वारा सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में रूसी सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, राजनयिक कोर के सदस्यों और भारतीय प्रवासियों ने भाग लिया।
श्रीलंका के जाफना स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने इंडिया हाउस में महावाणिज्य दूत साई मुरली के नेतृत्व में और भारतीय प्रवासियों की उपस्थिति में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। यहां इंडिया कॉर्नर के छात्रों ने देशभक्ति गीत गाकर वंदे मातरम के 150वें वर्ष को भी चिह्नित किया। वहीं मालदीव में भारतीय उच्चायोग ने एक राष्ट्रीय रिसेप्शन का आयोजन किया, जिसमें विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील मुख्य अतिथि थे। इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति को दर्शाया गया और साथ ही भारत और मालदीव के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने का भी जश्न मनाया गया।
बर्लिन में भारतीय दूतावास ने इस अवसर पर जीवंत सांस्कृतिक समारोहों का आयोजन किया। इस दौरान राजदूत अजीत गुप्ते ने भारत-जर्मनी संबंधों में बढ़ती गति पर बात की और भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।
इसके अलावा अमेरिका के शिकागो स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में ध्वजारोहण समारोह आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन का पाठ भी शामिल था। कार्यक्रम में वंदे मातरम के 150वें वर्ष को याद करते हुए शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति भी देखने को मिली।
इस बीच, पेरू में भारतीय दूतावास ने एक “इंडिया फेस्ट” का आयोजन किया, जिसमें एक ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें भारत के विभिन्न जिलों के अनोखे प्रोडक्ट्स शामिल थे।विदेश में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर राजनयिक स्वागत समारोहों में बड़ी संख्या में शामिल हुए भारतीय मूल के लोगों के लिए यह एक गर्व का क्षण था, जिसने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्ध विरासत और महाद्वीपों में लोगों से लोगों के बीच और राजनयिक संबंधों को गहरा करने पर जोर दिया।

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