होमगार्ड विभाग के अफसरों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘फर्जी’ राजपत्रित अधिकारी को अवार्ड दिलाया

संजय श्रीवास्तव
Home Guard officers get a fake gazetted officer honoured by the UP CM: उत्तर प्रदेश में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। होमगार्ड विभाग के अफसरों ने होमगार्ड दिवस पर अपने ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक ‘फर्जी’ राजपत्रित अधिकारी को राष्ट्रपति अवार्ड दिलवा दिया। होमगार्ड मुख्यालय पर तैनात डीजी के स्टेनो के.सी.गौतम राजपत्रित अधिकारी (जिला कमांडेंट) की तरह अपनी वर्दी पर तीन स्टार लगाते हैं। डीजी, होमगार्ड से लेकर सूबे के सभी अधिकारी जानते हैं कि श्री गौतम नियम विरुद्ध अपनी वर्दी पर स्टार लगा रहे हैं, लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई करने की जुर्रत कोई नहीं कर पाता है। हद तो तब हो गयी जब होमगार्ड दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही फर्जी राजपत्रित अधिकारी श्री गौतम को अवार्ड दिलवा दिया गया। उस दौरान मंत्री धर्मवीर प्रजापति सहित मुख्यालय के सभी अधिकारी वहां मौजूद थे। सवाल उठ रहा है कि सब कुछ जानने के बाद भी आखिर डीजी एम.के.बशाल और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से फर्जी स्टार लगाने वाले स्टेनो को क्यों सम्मानित कराया ? डीजी साहेब, यदि स्टेनो को आप राजपत्रित अधिकारी (कमांडेंट) मानते हैं तो क्या उन्हें राज्यपाल या उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का पत्र मिला है ? यदि हां तो उसे सार्वजनिक करें,क्योंकि यहां पर मामला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा है,जो ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीतियों को तोडऩे वालों के लिये सख्त माने जाते हैं।

ध्यान से देखिए इस शख्स के हंसते हुये चेहरे को… ये सरकार और ब्यूरोक्रेट्स पर हंस रहा है… अपने मंत्री और डी.जी. पर भी हंस रहा है… क्योंकि इसने साबित कर दिया कि किस तरह से अफसरों की आंख में धूल झोंक कर जीरो टॉलरेंस की धज्जियां उड़ायी जाती है। जी हां,इस शख्स का पद स्टेनो का है लेकिन राजपत्रित अधिकारी (जिला कमांडेंट )की वर्दी और स्टार लगाकर नौकरी कर रहा है। यानि,राजपत्रित अधिकारी का फर्जी वर्दी और फर्जी स्टार लगाने की हिमाकत कर रहा है। डीजी,होमगार्ड एम.के.बशाल के चैम्बर के बाहर शानदार कमरे में बैठने वाले स्टेनो का नाम के.सी.गौतम है। शर्मनाक बात तो ये है कि होमगार्ड दिवस, 6 दिसंबर को होमगार्ड राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने इस फर्जी राजपत्रित अधिकारी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अवार्ड भी दिलवा दिया। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि स्टेनो के.सी.गौतम राजपत्रित अधिकारियों का स्टार लगाकर अवार्ड ले रहा है।
इस मामले को अधिवक्ता एस.सी.श्रीवास्तव ने अपर मुख्य सचिव, गृह को पत्र लिखकर डीजी,होमगार्ड के स्टेनो के.सी.गौतम द्वारा फर्जी तौर पर राजपत्रित अधिकारी बनकर किये जा रहे फर्जीवाड़ा के खिलाफ मामला उठाया है। 31 जनवरी को अपर मुख्य सचिव,गृह,प्रमुख सचिव,होमगार्ड और डी.जी. श्री बशाल को भेजे गये पत्र में श्री श्रीवास्तव ने मुद्दा उठाया है कि राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया शासन द्वारा स्पष्टï रूप से निर्धारित है लेकिन डीजी एम.के.बशाल के स्टेनो के.सी.गौतम द्वारा फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनकर वर्षों से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। श्री गौतम स्टनो संवर्ग के अधिकारी हैं। उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नत के लिये कभी शासन स्तर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अधियाचन के लिये नहीं भेजा गया। उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर प्रोन्नत हेतु कभी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा डीपीसी की बैठक भी नहीं हुयी। इसीलिये उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उनकी राजपत्रित अधिकारी के पद पर पदोन्नति का कोई आदेश जारी नहीं है।

पत्र में यह भी लिखा है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा समय-समय पर राजपत्रित अधिकारियों की नियमावली जारी की जाती है,जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित अधिकारियों के पदों का विवरण दिया जाता है। शासन द्वारा होमगार्ड विभाग के राजपत्रित अधिकारियों की नवीनतम नियमावली में भी के. सी. गौतम के पद को राजपत्रित नहीं दिखाया गया है। यानि, डीजी के स्टेनो श्री गौतम स्वयं-भू राजपत्रित अधिकारी बनकर बैठे हैं। स्टेनो के.सी.गौतम फर्जी राजपत्रित अधिकारियों की वर्दी भी पहनते हैं,जबकि फर्जी वर्दी पहनना कानूनन गंभीर अपराध है। ये अपराध डीजी की नाक के नीचे, उनके ही कार्यालय में उनके ही स्टाफ द्वारा वर्षों से किया जा रहा है। पत्र में लिखा गया है कि स्टेनो के.सी.गौतम द्वारा फर्जी वर्दी पहनकर,फर्जी राजपत्रित अधिकारी बनने का आपराधिक कृत्य वर्षों से किया जा रहा है इसलिये इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई बिठाते हुये कानूनी कार्रवाई की जाये।
जिलों में कमांडेंट के पास गाड़ी नहीं,स्टेनो को मिला लाल-नीली बत्ती लगी एक्बेसडर कार यूपी के कई जिलों में तैनात जिला कमांडेंट एक अदद सरकारी गाड़ी के लिये शासन से लेकर मुख्यालय तक पत्राचार कर रहे हैं लेकिन उन्हें चार पहिया गाड़ी नसीब नहीं हो पा रही है,वहीं मुख्यालय पर बैठे स्टेनो के.सी.गौतम पर पूर्व से लेकर वर्तमान डीजी इतने मेहरबान हैं कि उन्हें लाल-नीली बत्ती लगी टाटा सूमो यूपी 32 बीजी 8370 दी गयी है। बता दें कि पूर्वांचल के मऊ, आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर के जिला कमांडेंट के पास अभी तक चार पहिया सरकारी गाड़ी नही है। क्या मुख्यालय के अफसरों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि जिलों को चलाने वाले कमांडेंट को सरकारी गाड़ी मुहैया करायी जाये ?
बता दें कि ये वही के.सी.गौतम हैं ,जिसका प्रदेश के मंडलीय कमांडेंट और जिला कमांडेंटों पर रौला दिखता है। मजाल है जो कोई इसकी बात को काट दे। मुख्यालय पर तैनात सभी अफसर इसके आगे नत मस्तक रहते हैं, क्योंकि सभी जानते हैं कि यदि श्री गौतम के खिलाफ मुंह खोले तो वो इनलोगों का राजफाश कर देंगे। आगरा में हुये लाखों रुपये के मस्टर रोल घोटालेबाज को भी श्री गौतम ने ही पूर्व डीजी को गुमराह कर बचा लिया है। जिलों में तैनात कमांडेंटों के खिलाफ शिकायत आती है तो श्री गौतम की मेज पर ही दबा दी जाती है। डीजी के चैम्बर में वही फाईल पहुंचती है जो उनकी बातों को…।

खैर, अधिवक्ता द्वारा लगाये गये गंभीर आरोपों की बाबत होमगार्ड राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पाण्डेय से कुछ सवाल किये गये, जिस तरह गौतम 3 स्टार लगाते हैं, वैसे ही मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भी 3 स्टार वाले हैं, लेकिन अकेले के.सी. गौतम ही राजपत्रित बना घूमता है और अपने को कमांडेंट बताता है? इस पर श्री पाण्डेय ने बताया कि उनका एसोसिएशन उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित अथवा पदोन्नत अधिकारियों का समूह है। उसमें स्टेनो संवर्ग का कोई कार्र्मिक शामिल हो ही नहीं सकता, जब तक कि हमलोग उसे आमंत्रित न करें। डी.जी. का स्टेनो होने के नाते कोई भी अधिकारी उसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता।
पता चला है कि मुख्यालय के बाबुओं को श्री गौतम चपरासी जैसे ट्रीट करते हैं ? श्री पाण्डेय ने बताया कि कमलेश चंद्र गौतम डीजी के स्टेनो हैं। हां, वे सपरिवार मेस नाइट आदि आयोजनो में शामिल होते हैं, उन्हें अवश्य ही मुख्यालय के अधिकारी आमंत्रित करते होंगे। क्या उन्हें शासन से राजपत्रित अधिकारियों का स्टार मिला है ? इस पर श्री पाण्डेय ने बताया कि श्री गौतम के स्टार और वर्दी की शासन से स्वीकृति का प्रकरण मुझे नहीं मालूम है। राजपत्रित अधिकारियों की वर्दी और स्टार तो उत्तर प्रदेश शासन से स्वीकृत है। कुल मिलाकर मुख्यालय पर वो भी डीजी के चैम्बर के बाहर जब उनका ही स्टॅाफ राजपत्रित अधिकारियों का फर्जी तरीके से वर्दी और स्टार लगाने का दुस्साहस कर रहा है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो पूरे प्रदेश के अफसरों पर किस तरह से अपनी हुकूमत चला रहा होगा।
बहरहाल अधिवक्ता के इस पत्र ने शासन में भूचाल ला दिया है। देखना है कि इस फर्जीवाड़े पर विभागीय मंत्री धर्मवीर प्रजापति और डीजी एम.के बशाल सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर अन्य घोटालों की तरह स्टेनो कमलेश चंद्र गौतम प्रकरण पर भी भ्रष्टाचार का कंबल ओढ़ा दिया जाता है।












