ज्योति एस.
Red Fort blast news : भारत में शरिया कानून लागू करने के लिए ‘आपरेशन हेवनली हिंद’ की साजिश का हिस्सा था लाल किला ब्लास्ट। यह बात लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में सामने आई है। एजेंसी ने इसे लेकर आतंकी नेटवर्क का खुलासा भी किया है। एनआइए के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम ‘आपरेशन हेवनली हिंद’ नामक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत में अस्थिरता फैलाना, लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करना और कथित रूप से शरिया कानून लागू करना था।

एजीयूएच और एक्यूआईएस नेटवर्क का कथित संबंध
जांच के अनुसार इस पूरे माड्यूल का संबंध अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (एजीयूएच) से था, जिसे अल-कायदा इन द इंडियन सबकान्टिनेंट (एक्यूआईएस) का सहयोगी ढांचा बताया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के बाद इस नेटवर्क को पुनर्गठित किया गया और सक्रिय किया गया।
कट्टरपंथ और भर्ती का डिजिटल नेटवर्क
एनआईए का दावा है कि इस माड्यूल ने सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन का उपयोग कर युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथीकरण किया। इसके जरिए एक संगठित डिजिटल नेटवर्क तैयार किया गया, जिसका उद्देश्य विचारधारा का प्रसार और भर्ती प्रक्रिया को तेज करना था।

विस्फोटक, हथियार और हमले की योजना
चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस नेटवर्क ने हथियारों और विस्फोटकों का संग्रह किया और ट्राइएसीटोन ट्राइपेरऑक्साइड (टीएटीपी) जैसे अत्यंत संवेदनशील विस्फोटक तैयार करने की योजना बनाई। इसके अलावा समन्वित धमाकों और ड्रोन आधारित हमलों जैसी रणनीतियों पर भी काम किया गया।
लाल किला ब्लास्ट का कथित लिंक
जांच के अनुसार 10 नवंबर 2025 को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुआ धमाका इसी ‘आपरेशन हेवनली हिंद’ की श्रृंखला का हिस्सा था। इस घटना में वाहन के माध्यम से विस्फोट किया गया, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई।
जांच की स्थिति और अगली सुनवाई
चार्जशीट में 10 से अधिक आरोपियों के नाम शामिल हैं और सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच 6 से अधिक राज्यों में फैली हुई है। मामले की अगली सुनवाई चार जून 2026 को एनआईए विशेष अदालत में निर्धारित है।












