Video सिंचाई विभाग के एक्सीयन हेमंत वर्मा और खनन माफिया खारजा नहर की मिटटी,बालू का कर रहें अवैध कारोबार

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सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर के इशारे पर एक्सीयन हेमंत वर्मा  खारजा नहर से करा रहें अवैध मिटटी खनन 

चिनहट के लौलाई क्षेत्र में खारजा नहर से प्रतिदिन निकल रहा 150 डंफर मिट्टी,गोकुल धाम रियल एस्टेट में खपा रहें

मिट्टी एक्सीयन अवैध कमाई के चक्कर में मिटटी की क्वांटिटी छिपाने के लिये डंफरों की रायल्टी नहीं काट रहें

टेण्डर में 25000 घन मिटटी निकालने की हिदायत लेकिन खनन माफिया प्रतिदिन चार से पांच हजार घन मीटर निकाल रहा मिट्टी

मनचाही जगह पोस्टिं कराने के लिये एक्सीयन बटोर रहा अवैध धन,हफ्ते में मिल रहा एक से डेढ़ लाख रुपये

सवाल:जब द संडे व्यूज़ ने चार माह पूर्व चीफ इंजीनियर को अवैध खनन से अवगत कराया तो उन्होंने क्यों नहीं लिया एक्शन ?

 

संजय श्रीवास्तव

लखनऊउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास से लगभग 20 किलो मीटर दूर सिंचाई विभाग के अफसरों की मिलीभगत से खनन माफिया रोहित यादव कर रहा है खारजा नहर से अवैध कारोबार। चिनहट के लौलाई क्षेत्र में पडऩे वाली खारजा नहर में सफाई का काम रान्या सन्स एण्ड कंपनी फर्म को दिया गया। फर्म का ठेकेदार यादव सिंचाई विभाग के एक्सीयन वर्मा के साथ मिलकर अवैघ खनन के कारोबार को अंजाम दे रहा है। विभागीय टेण्डर में 25000 घन मीटर मिटटी निकालने का परमीशन था लेकिन गत छह माह से प्रतिदिन चार से पांच हजार घन मीटर का खनन हो रहा है। मिट्टी की क्वांटिटी छिपाने के लिये मिट्टी निकालने वाले डंफरों की रायल्टी नहीं काटी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इससे अधिशासी अभियंता और ठेकेदार जहां प्रतिदिन राजस्व विभाग को लाखों की चपत लगा रहे हैं वहीं विभागीय मंत्री की साख भी खराब करने का काम कर रहे हैं। चर्चा है कि एक्सीयन अवैध कारोबार से इकटठा धन से मनचाही जगह पोस्टिंग कराने की जुगत में है। खास बात तो ये है कि इस बात की जानकारी चीफ इंजीनियर, शारदा सहायक प्रभाकर प्रसाद को ‘द संडे व्यूज़’ ने खुद दिया था लेकिन उन्होंने कार्रवाई तो दूर जांच कराने की भी जहमति नहीं उठायी। इससे साबित होता है कि चीफ इंजीनियर भी भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल हैं। इस बात की जानकारी विभागीय मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को भी नहीं दी गयी। यदि उनकी जानकारी में नहर से निकाली गयी करोड़ों की मिटटी, बालू खनन की जानकारी होती तो अब तक खनन माफिया जेल की सलाखों में होता और एक्सीयन सस्पेंड़…।

‘द संडे व्यूज़’ की टीम 19 मई की दोपहर चिनहट के लौलाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग की परिसंपत्ति,खारजा नहर पहुंची जहां पर मिट्टी और बालू का खनन जोरों से चल रहा था। देखा कि गोमती एस्केप खारजा की सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग लखनऊ के अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है अवैध मिट्टी का व्यापार। मानक के विपरीत कराया जा रहा है खरजा की सफाई। मिट्टी की निकासी, सफाई के नाम पर हो रही खुली लूट। सीधी बात करें तो मुख्यमंत्री के नाक के नीचे सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर और एक्सीयन की मिलीभगत से चल रहा है अवैध खनन का कारोबार। सिंचाई विभाग के मुख्यालय पर संबद्ध अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार वर्मा को दिया गया है चार्ज। सवाल यहीं से उठता है कि जब हेमंत कुमार वर्मा भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यालय से सम्बद्ध किये गये हैं तो उन्हें खरजा नहर की सफाई का इंचार्ज क्यों बनाया गया? इससे साबित होता है कि चीफ इंजीनियर की शहर पर पूरा खेल खेला जा रहा है।

आधिकारिक सूत्रों से पता चला है कि अभियंता इस कारोबार से कहीं अच्छी जगह पोस्टिंग में भी लगे हैं। विभागीय मंत्री और सरकार की छवि को खऱाब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं चीफ इंजीनियर और एक्सीयन। बता दें कि विभागीय टेंडर में 25000 घन मीटर की थी परमिशन लेकिन विगत 6 माह से प्रतिदिन 4 से 5 हज़ार घन मीटर की हो रही है खनन। अब तक लाखों घन मीटर की हो चुकी है मिट्टी की निकासी। चौंकाने वाली तो ये है कि क्वांटिटी छुपाने के लिए मिट्टी निकालने वाले डंफरो की रॉयल्टी नहीं काटी जाती। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पर्यावरण और राजस्व को भी पहुंचाई जा रही है भारी क्षति। इतना ही नहीं, टेंडर मानक से अधिक गहराई और चौड़ाई में कराया कराया जा रहा है खनन।

अवैध खनन को निजी प्लाटिंग में मिट्टी की की जा रही है सप्लाई। विगत महीनों में विभागीय मिलीभगत से मिट्टी को निकालकर निजी प्लाटिंग गोकुल धाम में मिट्टी की की गई है सप्लाई। निजी प्लाटिंग पर मिट्टी को डंप करके जेसीवी से करवाया गया है बराबर ताकि किसी को पता ही ना चले। खनन माफि या द्वारा गोमती एस्केप की सफाई कर मिट्टी डंपिंग के नाम पर रोजाना 100 से 150 डंपर का क्रय-विक्रय किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि लौलाई क्षेत्र में गोमती नदी के एस्केप की सफाई के लिए टेंडर का कार्य हुआ था, जिससे निकाली हुई मिट्टी को विभाग के द्वारा चिन्हित स्थान पर करना था डंपिंग लेकिन अधिकारियों के मिलीभगत से खनन माफि या रोजाना अवैध खनन का क्रय- विक्रय कर रहे हैं।

सवाल ये है कि जब नहर से मिटटी बालू की निकासी होती है तो उस वक्त मौके पर सिंचाई विभाग,राजस्व विभाग,खनन विभाग और डीएम द्वारा नामित अधिकारी क्यों नहीं रहते ? संदेह इस बात का भी है कि कहीं उक्त सभी विभाग के अफसरों को भी खनन माफिया यादव खरीद तो नहीं लिया ? खैर, ये जांच का विषय है और मंत्री स्वतंत्र देव को मामले की गंभीरता को देखते हुये जांच कराकर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिये।

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