देवरिया का डॉन है क्लर्क कुंवर बहादुर चंद : 40 साल से देवरिया में है तैनात, धमकी देता कि दम हो तो मंत्री हटाकर देखें
देवरिया में क्लर्क के धौंस का असर: महिला उत्पीडऩ,बीओ का पैसा डकारे,मुख्यालय पर दबा दी जाती है शिकायतें
मई में क्लर्क कुंवर बहादुर चंद का मुख्यालय आगमन,एक अफसर को ट्रांसफर रोकने के लिये दिया भरा लिफाफा
कौन है वो अफसर जिसने ट्रांसफर रोकवाने के लिये क्लर्क मुन्ना से 20 हजार और रनर अवनीश मल्ल का 25 हजार रुपये थामा
मुख्यालय का धंधा-जनपदों से आने वाली शिकायतों को अफसर दबाने के नाम पर करते हैं जमकर…

शुभम यादव
लखनऊ। होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति को ठोंक कर सलामी देने और जय हिन्द कहने वाले मुख्यालय के तथाकथित अफसर इमेज खराब कर रहे हैं। मंत्री जी इसी में खुश हैं कि मुख्यालय का फलां अफसर सबसे तेज सलामी ठोंका दिया लेकिन उन्हें ये नहीं भान की उनकी साख पर बट्टा भी वही अफसर लगा रहा है। ट्रांसफर सीजन में बाबूओं,रनर के नाम पर मुख्यालय पर कमाने की होड़ मची है। मुख्यालय पर विभागीय आईजी,डीआईजी और एसएसओ का जलवा होता है। मुख्यालय की देन है कि जनपदों में 40 साल से लेकर 20-22 सालों से अनगिनत क्लर्क तैनात हैं। देवरिया की बात करें तो यहां पर लगभग 40 साल से क्लर्क कुंवर बहादुर चंद उर्फ मुन्ना तैनात है। रनर में भर्ती हुआ और पदोन्नति पाकर क्लर्क बना लेकिन किसी ने इसका तबादलना करने की जहमत नहीं उठायी। मुख्यालय के डीआईजी,एसएसओ की कुर्सी बदलती रही लेकिन मुन्ना भाई जमे रहें। वजह, सभी की जेब को ट्रांसफर सीजन आते ही भर देता था। इस बार भी मई माह में मुन्ना भाई मुख्यालय आये।

मुन्ना भाई एक अफसर के कमरे गए, जाकर जबरदस्त सलामी ठोंकी। ऐसा लगा मानों वो अफसर वर्षों से उसके आने का इंतजार कर रहे थे, उसे देखते ही अफसर मुस्कराये और फाईलों को किनारे फेंक लगे हालचाल लेने। उसके बाद मुन्ना भाई ने अपना भरा लिफाफा और देवरिया के ही रनर अवनीश मल्ल का ट्रांसफर रोकवाने के लिये 25 हजार रुपये का लिफाफा थमा दिया। साहेब ने थूक लगाकर नोटों की गिनती की और आशीर्वाद दिया कि जाओ मस्त रहो,काम हो जायेगा। यही वजह है कि देवरिया की धरती पर कदम रखते ही मुन्ना भाई डॉन के स्टाईल में कुर्सी पर बैठे और धमक दी कि कोई बाल बांका नहीं कर पायेगा…। सेटिंग हो गयी है अब तो मंत्री जी भी कुछ नहीं कर पायेंगे।
हालांकि ‘द संडे व्यूज़’ रुपये देने का दावा तो नहीं करता लेकिन अपने सूत्रों पर जबरदस्त भरोसा है इसलिये सच्चाई यही हो सकती है। मंत्री जी यदि आपको सच्चाई की जांच करानी हो तो जांच करा लें कि क्या क्लर्क कुंवर बहादुर सिंह उर्फ मुन्ना और रनर अवनीश मल्ल का ट्रांसफर रोकवाने के लिये मुख्यालय का कौन अफसर पैरवी कर रहा है। दूध का दूध पानी का पानी दिख जायेगा। पैरोकार अफसर ही थामे होगा नोटों की गड्डी से भरा लिफाफा ? गोरखपुर की कहानी तो आपलोगों ने सुन ली और जान ली लेकिन दावे के साथ बताता हूं कि वर्षों से जमे उन बाबूओं के खिलफ कुछ नहीं होगा क्योंकि मंडलीय कमांडेंट, गोरखपुर तेज प्रकाश के पास पहुंचने वाली अवैध वसूली की कमाई का एक बड़ा हिस्सा मुख्यालय तक पहुंचाया जाता है। हां इस बात का दावा करते हैं कि जिला कमांडेंट, गोरखपुर मारकंडेय सिंह निहायत ही ईमानदार अधिकारियों में गिने जाते हैं।

देवरिया की बात करें तो यहां तैनात क्लर्क कुंवर बहादुर चंद के खिलाफ कंपनी गौरीबाजार,देवरिया का बीओ बिनोद कुमार वर्मा ने मई माह में डीजी और मंडलीय कमांडेंट,गोरखपुर को लिखित शिकायत किया था। इसी तरह,महिला रमावति देवी पत्नी स्व. रामगौड़ ने भी शिकायत की के लड़के को मृतक आश्रित के नाम पर नौकरी दिलाने के नाम पर 10 हजार रुपये ले लिया। फिर हाई स्कूल पास करवाने के नाम पर पैसा लिया और अब पैसा मांगने पर जान से मारने की धमकी देता है। मुन्ना भाई के खिलाफ दर्जनों शिकायतें मुख्यालय गयी लेकिन सब गायब। देखना है कि मंत्री जी को धौंस देकर देवरिया में 40 साल से भौकाल काटने वाले क्लर्क कुंवर बहादुर चंद का साम्राज्य हिलता है या फिर मुख्यालय के लिफाफाबाज अफसर की जीत होती है।












