एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 23 जून को शासन को सौंपी थी, जिसमें कई सिफारिशें की गई थीं। इनमें एफआईआर की सिफारिश भी शामिल थी, जिसका संज्ञान लेकर केस दर्ज कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा के अलावा निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका के बारे में भी तथ्य दिए हैं।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी, कर्मचारी आदि को क्लीनचिट नहीं दी गई है। वहीं जिस तरह से गणना के दौरान करोड़ों का चढ़ावा चोरी हुआ, वह प्रबंधन की नाकामी है। इसलिए इसके जिम्मेदार इन पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है। हालांकि एसआईटी रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। चढ़ावा चोरी केस की विवेचना सीओ अयोध्या कर रहे हैं। उनके साथ पूरी टीम लगाई गई है। आरोपियों के बैंक खाते खंगालने से लेकर गणना में लगे एक-एक कर्मी की भूमिका की जांच की जा रही है। इसमें पदाधिकारियों की भी भूमिका जांची जा रही है। जिसकी भी संलिप्तता पाई जाएगी, उस पर कार्रवाई तय है।
मामले में सीधे तौर पर अनिल मिश्रा पर चालीस फीसदी कमीशन के आरोप लगे थे। वहीं जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर चंपत राय पर आरोप हैं। इन आरोपों की जांच एसआईटी तेजी से कर रही है। कई गवाहों के बयान भी हो चुके हैं। गोपाल राव पर भी कई आरोप हैं, इसलिए वह भी जांच के दायरे में हैं।