होमगार्ड विभाग- ‘फर्जी’ मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा कर खेला गया ‘याचना’ का खेल

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डीआईजी और एसएसओ ने ‘याचना’ को बनाया जादुई खेल

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा कर खेला गया ‘याचना’ का खेल

   शुभम यादव

लखनऊ। होमगार्ड विभाग में वर्ष 2026-27 के तबादला सीजन में ‘नोटों’ की खूब बारिश हुयी। मुख्यालय पर तैनात डीआईजी आर.के.वर्मा और सीनियर स्टाफ आफिसर आर.के.आजाद, रतिया में आंख ‘मिच’ कर ट्रांसफर गेम की स्टैजडी बनायी। इस खेल में इनके ‘सिपहसलार’ विजय पाल सिंह, दिनेश वर्मा ने जनपदों से कर्मचारियों को बुला-बुलाकर ज्ञान दिया, कहीं से भी मेडिकल बनवा लो और साथ में ‘दक्षिणा’ की व्यवस्था कर लो, मनचाही जगह तैनाती मिल जायेगी। फिर क्या, शुरु हुयी ‘याचना’ और ‘जनहित’ का खुला खेल। ‘फर्जी’ मेडिकल लगाकर अधिसंख्य वैतनिक प्लाटून कमांडर, वैतनिक कंपनी कमांडर, बीओ, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक,चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ट्रांसफर कर दिया गया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईजी,पुलिस ने डीआईजी और एसएसओ के सभी ट्रांसफर पर अपनी ‘सहमति’ दी और हो गया सभी का ‘वारा-न्यारा’।

ये कोई नई बात नहीं है, इसकी जानकारी शासन स्तर तक है,फिर भी ‘द संडे व्यूज़’ लेन-देन की पुष्टि नहीं करता। हर साल की तरह इस साल भी होमगार्ड मुख्यालय के ‘ईमानदारी का चोला’ ओढ़कर बैठे भ्रष्ट अफसरों ने ट्रांसफर, पोस्टिंग में ‘याचना’ का ‘करिश्माई’ खेला किया। मुख्यालय के अधिकारियों के ‘सिपहसालार‘ विजय पाल सिंह, दिनेश वर्मा ने जनपदों से लोगों को फंसाकर उनसे ‘फर्जी मेडिकल’ बनवाकर लंबी उगाही करके अपने अधिकारियों डीआईजी और एस.एस.ओ.को उपकृत किया।

‘चार फुटिया’ राजपत्रित अधिकारी, जिसने वर्दी पर फर्जी स्टार लगाकर मुख्यमंत्री से अपने को सम्मानित भी करा लिया, ‘कमाऊ’ मसीहा निकला। उसने लगभग 50 कर्मचारियों से ठीक- ठाक वसूल कर आईजी धर्मवीर से सबका ट्रांसफर कराया। बता दें कि 29 और 30 तारीख को ‘रतजग्गा’ कर डीआईजी आर.के.वर्मा और सीनियर स्टाफ अफसर आर.के.आजाद ने ‘याचना’ और ‘जनहित’ के नाम पर पूरी मजबूती से अपना ‘हित’ साधा।

लिस्ट की बात करें तो डीआईजी श्री वर्मा ने ‘याचना’ के नाम पर 5 वैतनिक कंपनी कमांडर,8 वैतनिक प्लाटून कमांडर,18 ब्लाक आर्गनाइजर एवं  4 वैतनिक प्लाटून कमांडर एवं 17 ब्लाक आर्गनाइजर व 18 ब्लाक आर्गनाइजर को ‘जनहित’ के आधार पर ट्रांसफर किया है।

ठीक इसी तरह, सीनियर स्टाफ आफिसर आर.के.आजाद नेयाचना’ के आधार पर 10 चतुर्थ श्रेणी एवं ‘जनहित‘ के आधार पर 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का ट्रांसफर किया। इसी तरह, कनिष्ठ सहायक संवर्ग के 10 कर्मचारियों का ‘याचना’ के आधार पर,कनिष्ठ  सहायक (जनपद संवर्ग) के 4 कर्मचारियों का ‘जनहित’ के आधार पर, कनिष्ठ सहायक (मुख्यालय संवर्ग) के 2 कर्मचारियों का ‘याचना’ के आधार पर,वरिष्ठ सहायक (जनपद संवर्ग) के 3 कर्मचारियों का ‘याचना’ के आधार पर एवं वरिष्ठ सहायक (जनपद संवर्ग) के एक कर्मचारी का ‘जनहित‘ के आधार पर ट्रांसफर किया है।

मुख्यालय पर तैनात आधिकारिक सूूत्रों ने बताया कि ऊपर ‘चरण वंदना’ करने में माहिर डीआईजी ने बेखौफ होकर मनमाफिक ट्रांसफर कर साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री की पॉलिसी टूटे उससे उन पर कोई असर नहीं पडऩे वाला। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में ही नियमों को धता बताते हुये 13 वर्ष से अधिक समय से जिला कमांडेंट कार्यालय पर बीओ,रनर तैनात हैं। इसी तरह पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक 20 से 30 साल से एक ही मंडल में कर्मचारी तैनात हैं लेकिन डीआईजी आर.के.वर्मा को नहीं दिखा। इन्हें तो जिसने झोली भरा,उसे मनचाही जगह तैनाती दे दी।

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