दावेदार को परखने के बाद बनाया जा रहा कैंडिडेट2007 सरीखा रिजल्ट की 2027 में आस Akash anand news : यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में कामयाबी के लिए छटपटा रही बहुजन समाज पार्टी लगातार नई-नई रणनीति पर काम कर रही है। फिलहाल पार्टी का प्लान है कि दिल्ली और लखनऊ में कैंडिडेट चयन करने के बाद उसका ऐलान संबंधित विधानसभा क्षेत्र में किया जाएगा। इस बहाने चुनावी माहौल गरमाने के लिए एक जनसभा की जाएगी। सर्वसमाज के लोगों की इस जनसभा में भागीदारी कराई जाएगी। बसपा की नीतियों को समझाकर आमजन के काम और लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देकर उनको साथ जोड़ा जाएगा ताकि 2007 सरीखा रिजल्ट 2027 में मिल सके।
बसपा के प्रदेश स्तरीय नेता की माने तो पार्टी सुप्रीमो की रणनीति है कि कैंडिडेट का चयन दावेदार की उनसे मुलाकात होने, बसपा के कैडर पर खरा उतरने, जनता में स्वीकार्यता होने, सीट के जातिगत आंकड़े फिट बैठने, विवादित न होने, साफ सुधरी छवि होने और क्षेत्र में सक्रिय होने आदि बिंदुओं पर खरा उतरने के बाद किया जाएगा। उसके बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र में एक तिथि तय कर जनसभा की जाएगी। कुछ जगह आकाश आनंद और कुछ जगह जोनल प्रभारी कैंडिडेट का एलान करेंगे। जनसभा में ताकत लगाकर भीड़ जुटाई जाएगी ताकि आमजन में संदेश जाए कि सर्वसमाज बीएसपी के साथ खड़ा हैं। अभी तक यूपी में करीब 25 कैंडिडेट घोषित किए जा चुके हैं।
एक मंडल कोर्डिनेटर की माने तो मायावती दिल्ली और लखनऊ में होने वाली हर बैठक में संगठन से पदाधिकारियों को जीत का गणित समाझा रही हैं। बता रही हैं कि यूपी में बीजेपी की दो बार की सरकार के जनविरोधी काम से आमजन परेशान हैं। जनता खफा इस कदर है कि बीजेपी का खास वोट बैंक भी अब जुबान पर नाराजगी बयां कर रहा हैं।
समाजवादी पार्टी के बारे में बताया जा रहा कि उनकी सरकार रहते हुए भी और मौजूदा वक्त में भी जनता उन पर भरोसा नहीं करती। तर्क दिया जा रहा है कि सपा राज में कानून व्यवस्था खराब हो जाती है। जमीन पर कब्जे करने की होड़ पार्टी पदाधिकारियों में लग जाती है। कांग्रेस के बारे में बताया जा रहा है कि करीब चार दशक से अधिक वक्त से सत्ता से बाहर पार्टी यूपी में आमजन को अभी भी नहीं जोड़ पा रही हैं। कांग्रेस के किसी भी आयोजन में आमजन का समर्थन नहीं मिलता बल्कि वर्करों की भागदारी गिनती की होती हैं। बाकी छोटे दलों के बहकावे में आने से सावधान रहने की हिदायत जा रही है।
इस मंडल कोर्डिनेटर की माने तो मीटिंग में भरोसा दिया जा रहा है कि इस चुनाव में पार्टी को सर्वसमाज का साथ 2007 की तरह मिलने जा रहा हैं। तर्क दिया जा रहा है कि जिस तरह 2027 के लिए टिकट हासिल करने को सर्वसमाज के लोग बसपा में दिल्ली और लखनऊ के साथ कोर्डिनेटरों के पास पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि सर्वसमाज की स्वीकार्यता बसपा के लिए बढ़ रही है। खासकर ब्राह्मण , मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग बसपा की तरफ मजबूती से नजर लगाए हैं। कहा जा रहा है कि दलित समाज तो पार्टी की रीढ़ है। दलित समाज किसी के बहकावे में नहीं आएगा। दलित समाज के दुख-दर्द में हर बसपा पदाधिकारी को भागीदार बनने की हिदायत देकर कहा जा रहा कि उनका दिल जीते ताकि वह चुनाव में और मजबूती से साथ खड़ा दिखे।