शर्मनाक: मंत्री, डीआईजी,कमांडेंट से नहीं मिला इंसाफ, अब मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ में फरियाद लेकर जायेंगी बीओ की पत्नी वंदना

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डीआईजी और कमांडेंट ने ब्लाक आर्गनाइजर की दो माह की सैलरी रोकी,परिवार जायेगा मुख्यमंत्री से इंसाफ मांगने

मथुरा कमांडेंट शैलेन्द्र सिंह के इशारों पर डीआईजी,मुख्यालय ने रोक दी बीओ टेनपाल सिंह की दो माह की सैलरी

मंत्री धर्मवीर प्रजापति,डीआईजी संजीव शुक्ला,डीआईजी,मुख्यालय आर के वर्मा की प्रताडऩा से तंग परिवार भूखमरी की कगार पर

 संजय श्रीवास्तव

लखनऊ। विधान सभा में मानसून सत्र चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर जनता को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनकी सरकार के कर्मचारी को उनके द्वारा नामित मंत्री,डीआईजी और कमांडेंट एक ब्लाक आर्गनाइजर की जिंदगी नरक बना दिये हैं। मथुरा में तैनात कमांडेंट शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बीओ टेनपाल सिंह को कार्यालय बुलाकर सार्वजनिक बेइज्जती करते हुये कहा कि कार्यालय में आज के बाद दिखना नहीं और किसी कर्मचारी से बात नहीं करोगे। इतना ही नहीं,कमांडेंट ने बीओ की दो माह की सैलरी तक रोक दी है। बीओ ने इसकी शिकायत मंत्री धर्मवीर प्रजापति, डीआईजी संजीव शुक्ला,डीआईजती आर.के वर्मा से की लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। कमांडेंट द्वारा सार्वजनिक बेइज्जती करने से आहत बीओ टेनपाल सदमे में है। उनका कहना है कि परिवार भूखमरी की कगार पर है और यदि मेरे साथ अनहोनी होती है तो इसकी पूरी तरह से जिम्मेदार मंत्री,कमांडेंट,डीआईजी ही होंगे।

सवाल ये है कि आखिर एक राज्य कर्मचारी,जिसने नौकरी की तो उसकी सैलरी रोकने वाला कमांडेंट कौन होता है ? किसने कमांडेंट को अधिकार दिया कि बीओ की सैलरी रोके ? क्या वो डीजी,आईजी,डीआईजी,मंडलीय कमांडेेेंट से अपने को बड़ा मानकर चल रहा है ? यदि ऐसा है तो ऊपर के पदों पर वर्दी पर ‘झऊंवा’ भर स्टार लगाकर बैठे अफसरों को इस्तीफा दे देना चाहिये। कहीं ऐसा तो नहीं कि मुख्यालय पर बैठे और आगरा परिक्षेत्र के अफसर इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि बीओ टेनपाल सिंह के साथ कोई अनहोनी हो और तब जागृत हों…। बहरहाल, होमगार्ड राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति और मुख्यालय पर बैठे बड़े अफसरों की तरफ से कोई कार्रवाई ना होने पर बीओ टेनपाल की पत्नी अपने बच्चों के साथ मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ के जनता दरबार में जाने की तैयारी में हैं।  पत्नी वंदना सिंह ने बेहद मार्मिक पत्र लिखकर इस विभाग के हालात अपनी ईमानदार पति की बेबसी को बयां किया है। मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र में बीओ टेनपाल सिंह की पत्नी ने कुछ इस तरह से अपनी बेबसी व्यक्त की है…

जिला कमांडेंट, मथुरा शैर्लेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा मेरे पति के निरंतर उत्पीडऩ, वेतन रोके जाने एवं हमारे परिवार को भुखमरी, निराशा और असहनीय मानसिक पीड़ा की स्थिति में पहुंचाने के संबंध में न्याय दिलाये जाने हेतु प्रार्थना-पत्र। मैं बंदना सिंह, पत्नी टेनपाल सिंह हूँ। मेरे पति टेनपाल सिंह, होमगार्ड विभाग में राज्य कर्मचारी के रूप में ब्लॉक ऑर्गनाइजऱ के पद पर जनपद मथुरा में कार्यरत हैं। आज मैं यह प्रार्थना.पत्र एक पत्नी एक माँ और एक असहाय नागरिक के रूप में लिख रही हूँ। मेरी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। जिस परिवार ने ईमानदारी से सरकारी सेवा को अपना धर्म माना, वही परिवार आज न्याय की आस में दर-दर भटकने को विवश है। पिछले लंबे समय से जिला कमांडेंट, होमगाड्र्स मथुरा द्वारा मेरे पति का लगातार मानसिक, प्रशासनिक एवं आर्थिक उत्पीडऩ किया जा रहा है। उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है, उन्हें प्रताडि़त किया जाता है और ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। नियमित सेवा करने के बावजूद उनका दो माह का वेतन रोक दिया गया है।

 

आज हमारा परिवार ऐसी आर्थिक तंगी में पहुँच गया है कि दवा, भोजन और बच्चों की पढ़ाई तक संकट में पड़ गई है। मैं स्वयं बीमार हू, मेरे ससुर भी अस्वस्थ हैं, लेकिन इलाज कराने तक के साधन नहीं बचे हैं। मैं रोज़ अपने पति को टूटते हुए देखती हूँ। कई- कई रात वे सो नहीं पाते। चुपचाप बैठकर रोते हैं, किसी से कुछ नहीं कहते। एक पत्नी होने के नाते उनका दर्द मैं अपनी आँखों से देख रही हूँ, पर उनके लिए कुछ भी नहीं कर पा रही हूँ। इससे बड़ा दुर्भाग्य मेरे लिए क्या होगा? हम न्याय की आशा लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों के पास भी गए। हमने सोचा था कि वहाँ हमारी बात सुनी जाएगी, लेकिन हमें कोई प्रभावी राहत नहीं मिली। हमें ऐसा महसूस कराया गया कि इस प्रकरण में प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप है, इसलिए कोई भी अधिकारी खुलकर कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। यह सुनने के बाद ऐसा लगा कि अब हमारे लिए न्याय के सभी दरवाजे बंद हो चुके हैं।

आज हमारी स्थिति ऐसी हो गई है कि अब बच्चों के हाथ से कलम छिन गया है और अब वह मजदूरी कर अपने घर का चूल्हा जलता देख रहे हैं। मैं इस वेदना में हूं कि जिन बच्चों की पढऩे की उम्र है , आज वह बच्चे मजदूरी करने जा रहे हैं। हमें समझ नहीं आ रहा कि हम कहाँ जाए। न कोई सहारा दिखाई देता है, न कोई सुनवाई। हमारे बच्चे भय, अभाव और असुरक्षा के वातावरण में जी रहे हैं। एक पत्नी होने के नाते हर पल मुझे अपने पति की मानसिक स्थिति की चिंता सताती रहती है। मुझे भय है कि यदि यह अन्याय और उत्पीडऩ इसी प्रकार चलता रहा, तो हमारा परिवार किसी गंभीर अनहोनी का शिकार हो सकता है।

महोदय, मैं आपके चरणों में हाथ जोड़कर केवल न्याय की भीख माँग रही हूँ। यदि एक ईमानदार राज्य कर्मचारी और उसका परिवार भी न्याय पाने के लिए इस प्रकार विवश हो जाए, तो फि र हम जैसे सामान्य नागरिक किसके पास जाएं? अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, मेरे पति को तत्काल संरक्षण प्रदान किया जाए, उनका रोका गया वेतन दिलाया जाए तथा यदि जांच में आरोप सही पाए जाए तो दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। इस प्रार्थना- पत्र में वर्णित प्रत्येक तथ्य मेरे व्यक्तिगत अनुभव एवं उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। आवश्यकता पडऩे पर हम प्रत्येक बिंदु के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।

वंदना सिंह एक पत्नी,एक मां होमगार्ड विभाग के सड़े-गले सिस्टम से हार चुकी है। अपने ईमानदार पति की बेबसी और हालात देखकर इतनी सहमी है कि वो इस विभाग के सभी अफसरों से उम्मीद छोड़ चुकी है। जान गयी है कि यहां पर भ्रष्टïाचार के आकंठ में अधिकांश अफसर पूरी तरह से डूब चुके हैं। बच्चे चिंतित हैं कि जब ईमानदार पिता की सैलरी को भ्रष्टï अफसर डकार जायेंगे तो उनका भविष्य कैसे बनेगा ? इसीलिये वंदना सिंह ने विभागीय अफसरों से उम्मीद छोड़ अब उत्तर प्रदेश के मुखिया ईमानदार,सभी पीडि़तों को न्याय दिलाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी व्यथा व्यक्त कीं। उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी जाना पड़ा तो इंसाफ के लिये अपने बच्चों के साथ जायेंगी।

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