सहसपुर में 2027 की सियासी जंग: पुंडीर के सामने आर्येंद्र और अब हरक सिंह रावत की एंट्री से बढ़ा ट्विस्ट!

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 मैथिली आनंद

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में अगर इस वक्त किसी विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा हैं, तो उनमें देहरादून की सहसपुर विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है। एक तरफ लगातार तीन चुनाव जीत चुके भाजपा विधायक सहदेव सिंह पुंडीर हैं, जो एक बार फि र चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ , कांग्रेस के आर्येंद्र शर्मा जो पहले से ही अपनी दावेदारी और चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रिय हैं। लेकिन अब कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आता दिखाई दे रहा है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत का नाम सहसपुर से जुडऩे लगा है। हरक सिंह रावत ने सहसपुर में चुनाव लडऩे को लेकर संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान जिस सीट से चुनाव लडऩे के लिए कहेगा, वह वहां से चुनाव लडऩे को तैयार हैं।

सहसपुर का नाम भी उनके विकल्पों में सामने आया है। हाल के दिनों में सहसपुर में उनके समर्थन में नारेबाजी की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि अभी कांग्रेस ने सहसपुर से किसी उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। यानी कांग्रेस के भीतर अभी से एक सवाल खड़ा हो गया है कि सहसपुर में चेहरा कौन होगा? आर्येंद्र शर्मा, जो 2022 में सहदेव पुंडीर के सामने कांग्रेस के उम्मीदवार थे और 55,653 वोट हासिल कर चुके हैं, या फि र उत्तराखंड की राजनीति के पुराने और चर्चित चेहरे हरक सिंह रावत? 2022 का चुनाव देखें तो सहदेव पुंडीर ने 64,008 वोट हासिल करके आर्येंद्र शर्मा को 8,355 वोटों से हराया था। यानी कांग्रेस ने इस सीट पर भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। अब 2027 से पहले समीकरण इसलिए भी दिलचस्प हैं क्योंकि भाजपा के सामने भी सिर्फ विपक्ष की चुनौती नहीं है। पार्टी के भीतर टिकट को लेकर कई नामों की चर्चा चल रही है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या भाजपा लगातार तीन बार जीत चुके सहदेव पुंडीर पर ही भरोसा जताएगी या सहसपुर में किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा। और कांग्रेस की तस्वीर इससे भी ज्यादा दिलचस्प है।

एक तरफ आर्येंद्र शर्मा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, दूसरी तरफ हरक सिंह रावत जैसे अनुभवी नेता का नाम सहसपुर से जुड़ रहा है। हरक सिंह रावत का राजनीतिक सफर भी इस पूरे समीकरण को खास बनाता है। वे लंबे समय तक कोटद्वार की राजनीति से जुड़े रहे हैं। अब अगर कांग्रेस उन्हें सहसपुर से मैदान में उतारने का फैसला करती है, तो यह सिर्फ उम्मीदवार बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाएगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल भी है कि क्या सहसपुर में कांग्रेस अपने पुराने चेहरे पर भरोसा करेगी या अनुभवी हरक सिंह रावत के नाम के साथ नया प्रयोग करेगी? और दूसरी तरफ भाजपा के सामने भी सवाल होगा कि क्या सहदेव पुंडीर को चौथी बार मौका मिलेगा या पार्टी सहसपुर में नया चेहरा उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश करेगी ? स

हसपुर में पिछले चार विधानसभा चुनावों में भाजपा लगातार जीतती रही है। 2012, 2017 और 2022 में सहदेव पुंडीर ने लगातार जीत दर्ज की, जबकि 2007 में भाजपा के राजकुमार ने यह सीट जीती थी। यानी 2027 में कांग्रेस के सामने सिर्फ भाजपा को चुनौती देने का सवाल नहीं है, बल्कि सही उम्मीदवार चुनने का सवाल भी उतना ही बड़ा है। फि लहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। टिकट घोषित नहीं हुए हैं, उम्मीदवार तय नहीं हुए हैं और चुनाव में अभी वक्त बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि सहसपुर में सियासी बिसात बिछ चुकी है। एक तरफ सहदेव पुंडीर का अनुभव और लगातार जीत का रिकॉर्ड तो दूसरी तरफ आर्येंद्र शर्मा की दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी और अब तीसरी तरफ हरक सिंह रावत के नाम की गूंज।

ऐसे में 2027 का सहसपुर सिर्फ एक विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि टिकट से लेकर चेहरे तक और रणनीति से लेकर समीकरण तक कई सवालों का चुनाव बनता दिखाई दे रहा है। अब देखना यही होगा कि आने वाले महीनों में सहसपुर की इस सियासी शतरंज में कौन सा मोहरा कहां चलता है और किस चेहरे पर पार्टी अपना भरोसा जताती है।

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