कमांडेंट के बीच नियम विरूद्ध लिंक जनपदों को लेने की हो रही मारामारी

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होमगार्ड मंत्री का खेला शुरु: ट्रांसफर पॉलिसी आते ही सरकारी आवास पर सजने लगा प्रमोटी कमांडेंट का दरबार

धर्मवीर प्रजापति के आवास पर प्रमोटी कमांडेंट मनचाही तैनाती के लिये ठोंकने जा रहें सलामी

पूर्व में भी मंत्री के चहेतों को नियम विरुद्ध दिया गया है चार्ज ?

     शुभम यादव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जारी ट्रांसफर पॉलिसी जारी होते ही सभी विभाग के अफसरों ने दौड़-भाग शुरु कर दी है। बाजी वही मारेगा जो शासन-सत्ता में गहरी पैठ रखता हो। अधिकारियों ने बताया कि होमगार्ड विभाग में भी मंत्री धर्मवीर प्रजापति के सरकारी आवास पर प्रदेश के छोटे जिलों में तैनात प्रमोटी कमांडेंट मीठाई के डिब्बों के साथ दूसरे डिब्बों की कीमत की बातें करने जा रहे हैं। चर्चा है कि जहां छोटे जनपदों में तैनात प्रमोटी कमांडेंट बड़े जिलों में तैनाती की चाह रखकर सलामी ठोकने जा रहे हैं वहीं बड़े और कमाऊ जिलों में तैनात कमांडेंट अपनी कुर्सी बचाने के लिये मंत्री जी के मुंह खोलने या हामी भरने में लगे हुये हैं। दूसरी तरफ,नियम विरुद्ध लिंक जनपदों को अपने कब्जे में करने के लिये भी कमांडेंट सौदेबाजी करने पर जुट गये हैं। बता दें कि तैनाती स्थल क अलावा नियम विरुद्ध लिंक जनपद मिल जाने पर कमांडेंट की कमाई लाखों रुपये अतिरिक्त हो जाती है। कुछ हिस्सा मंत्री के यहां तो कुछ हिस्सा मुख्यालय के अफसरों तक पहुंचा कर भी प्रमोटी कमांडेंट दो जनपदों से लाखों रुपये अपनी झोली में डाल रहे हैं। पूर्व में भी मंत्री ने अपने चहेते और मांग पूरी करने वाले कमांडेंटस को नियमों के खिलाफ लिंक जनपदों का काम देकर खूब कमाई करवायी है।

 

सीएम की ट्रांसफर पालिसी की धज्जियां किस प्रकार से उड़ायी जा रही है इसे देखना हो तो होमगार्ड विभाग में जा सकते हैं। क्या अफसर और क्या क्लर्क,सभी वर्षों से एक ही कुसी और एक ही शहर में खूंटा गाड़कर बैठे हैं लेकिन क्या मजाल उनका तबादता हो जाये। हकीकत ये है कि सभी दो नंबरिया मुख्यालय पर अलग-अलग बड़े अफसरों का धरकर अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। इसका खुलासा करेंगे लेकिन फिलहाल बात ट्रांसफर पॉलिसी और नियमों के खिलाफ दिये गये लिंक जनपदों की करते हैं। ट्रांसफर पॉलिसी जारी होने के बाद से ही होमगार्ड राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति के सरकारी आवास पर चहल-पहल तेज हो गयी है। कमांडेेंट औै प्रमोटी कमांडेंट ,सभी की चाहत है कि उन्हें मनचाहा जनपद मिल जाये जिससे कि एक साल में करोड़ों की अवैध कमाई कर सकें। ये तभी संभव है जब विभाग के मंत्री की मोहब्बत हो।

तीन वर्ष से अधिक समय से छोटे जनपदों में पड़े प्रमोटी कमांडेंट ने बताया कि बड़े जनपदों में मंत्री के करीबी है चार साल से जमे हैें और होमगार्डों का शोषण कर कमाई कर रहे हैं। शासन और मुख्यालय तक जवानों के पत्र जाते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। वाराणसी, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद, मेरठ जैसे बड़े जनपदों में तैनात अधिसंख्य कमांडेंट मंत्री के चहेते हैं। चहेते इसलिये नहीं कि उनके अंदर ‘टैलेंट’ का ‘च्यवनप्राश’ भरा है बल्कि वे मंत्री और उनके पीएस को धरकर उनकी ‘मांग’ पूरी करते चले आ रहे हैं। देखना है कि तीन साल से अधिक समय से बड़े जनपदों में खूुटा गाड़कर बैठे इन अफसरों की कुर्सी हिलती है या फिर मुख्यमंत्री के आदेश की धज्जियां उड़ायी जाती है।

इसी तरह,मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने नियमों के खिलाफ जाकर प्रमोटी कमांडेंट व कमांडेंट को लिंक जनपदों की अतिरिक्त तैनाती दी जो इस प्रकार से है। झांसी में तैनात कमांडेंट हरिशंकर चौधरी को हमीरपुर जनपद का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है,जो बांदा-चित्रकूट मंडल के कमांडेंट को मिलना चाहिये था। इसी प्रकार जालौन में तैनात कमांडेंट राजेश सिंह को कानपुर देहात का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है जो कायदे से कानपुर मंडल के कमंाडेंट को मिलना चाहिये था। कौशांबी के कमांडेंट बिनोद द्विवेदी को चित्रकूट का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है,जो बांदा-चित्रकूट मंडल के कमांडेंट को देना चाहिये। तीनों लिंक जनपद गलत तरीसे किया गया है। नाम न छापने की शर्त पर अफसरों ने बताया कि पूरा खेल मंत्री और मुख्यालय पर बैठे नोट बटोरने वाले कुछ अफसरों की मिलीभगत से खेला जा रहा है।

अगले अंक में :एक बाबू की मंत्री को खुली चुनौती: जहां भर्ती हुये,वहीं से होंगे रिटायर,दम है तो हाथ लगाकर देखें…

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