होमगार्ड विभाग : डीआईजी आर.के.वर्मा की शह पर सीएम के शहर में तबादला नीति में हो रहा खेल

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होमगार्ड विभाग : मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में उड़ रही ट्रांसफर पॉलिसी की धज्जियां

होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने की आंखें बंद, डीआईजी ने गोरखपुर में ही सीएम की छवि करा रहें खराब

1995 से तैनात हैं नंद कुमार चौधरी और संतराम चौधरी,क्यों नहीं हो रहा ट्रांसफर ?

 पीयूष सिंह

गोरखपुर। मंत्री जी, विभाग का भट्टा बिठाकर ही दम लेंगे क्या ? अपने बारे में ना सही कम से कम भाजपा सरकार पर तो कुछ रहम करिये। 2027 करीब है और आपके विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। चलिये भाजपा को छोडिय़े कम से कम अपने मुख्यमंत्री की सोच और नीतियों की प्रतिष्ठïा तो बचाने के बारे में सोच ही लीजिये। तबादला नीति की रेलगाड़ी चल रही है और आपके होमगार्ड विभाग में कोई बाबू 40 साल से एक ही जनपद में तैनात है तो कोई चतुर्थ श्रेणी में भर्ती हुुआ,पदोन्नति पाकर क्लर्क बना और उसी जनपद में 21 साल से तैनात है। ‘द संडे व्यूज़’ का सवाल है कि आखिर मुख्यालय पर बैठे डीआईजी, होमगार्ड आर.के. वर्मा सिस्टम सुधारने के लिये तैनात हैं या फिर बाबूओं को शह देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिये तैनात हैं ? शर्मनाक बात ये है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में ही दो क्लर्क नंद कुमार चौधरी औै संतराम चौधरी (दोनों रिश्तेदार) हैं 1995 से तैनात हैं। मंत्री जी और डीआईजी साहेब से सवाल है कि आखिर चौधरी साहेब पर इतनी मेहरबानी क्यों है ? अरे,जब मुख्यमंत्री के शहर में ही ट्रांसफर पालिसी की आपलोग धज्जियां उड़वा रहे हैं तो प्रदेश के बाकी जनपदों के बारे में कुछ कहना बेमानी ही होगा।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो होमगार्ड विभाग में अनगिनत संख्या में क्लर्क 20 से लेकर 40 वर्ष से तैनात हैं। ऐसा लगता है मानों इनलोगों ने भर्ती होते समय प्रतिज्ञा ली हो कि मैं शपथ लेता हूं कि आज इस विभाग में भर्ती हो रहा हूं और वर्दी की गरिमा को तार-तार करने, धज्जियां उड़ाने और भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोडऩे के लिये एक ही जनपद में भर्ती और रिटायर होऊंगा। इस अंक में बताते हैं मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर की। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय पर बैैठे डीआईजी आर.के. वर्मा को सब मालूम है लेकिन उन्होंने चुप्पी साध ली है। यानि कंबल ओढ़कर घी पी रहे हैं और मंत्री जी को भी अपने झांसे में ले रखे हैं।

गोरखपुर में नंद कुमार चौधरी 1995 में चतुर्थ श्रेणी के पद पर भर्ती हुआ। 2003 में पदोन्नति पाकर क्लर्क बन गया किन्तु उसका अन्य जनपद में ट्रांसफर नहीं किया गया। नंद कुमार चौधरी आज भी मंडलीय कमांडेंट कार्यालय,गोरखपुर में ही तैनात है।

इसी तरह, नंद कुमार चौधरी का रिश्तेदार संत राम चौधरी भी जिला कमांडेंट कार्यालय,गोरखपुर में ही तैनात है। खास बात ये है कि शुरु से ही संतराम ड्यूटी लगाने का काम करता चला आ रहा है। ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार हर तीन साल में पटल परिवर्तन हो जाना चाहिये लेकिन संतराम कमांडेंट का कमाऊ पूत है और नंद कुमार की शह होने के कारण हमेशा डयूटी लगाने का काम करता रहा है।

डयूटी लगाने के नाम पर सभी होमगार्डों से प्रति माह 3000 रुपये बटोरता हैअब कमांडेंट उस अवैघ वसूली की रकम को अपने मंडलीय और मुख्यालय में डीआईजी तक पहुंचाने का काम करते हैं।

कुल मिलाकर जब मुख्यमंत्री के शहर में ही शासन द्वारा बनायी गयी नियमावली की धज्जियां उड़ायी जा रही है तो आगे क्या कहना। इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती कि मंत्री धर्मवीर प्रजापति को सब कुछ मालूम होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जहां तक डीआईजी आर.के.वर्मा की बात करें तो,उन्होंने पूरे प्रदेश के कमांडेंट को अपने सिस्टम में ले लिया है और भीषण गर्मी में नोटों की हसीन वादियों का परमानंद ले रहे हैं। अब मुख्यमंत्री जी जानें कि जब उनका ही शहर बदनाम हो रहा है तो मंत्री और डीआईजी पर मेहरबानी बरतना चाहिये या ?

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