क्या भरत तिवारी की पिस्टल ‘आउट ऑफ रेंज’ थी ? जानिए वीडियो के पीछे की हकीकत 

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क्या भरत तिवारी की पिस्टल ‘आउट ऑफ रेंज’ थी? जानिए वीडियो के पीछे की हकीकत

धनीश श्रीवास्तव
Bihar News: आरा जनपद के‌ शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला कानूनी और सामाजिक गलियारों में बड़ा सवाल बन चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फेसबुक लाइव वीडियो सबसे बड़ा डिजिटल साक्ष्य है। पहली नजर में यह वीडियो एक अपराधी के दुस्साहस की कहानी बयां करता है, लेकिन जब इस फुटेज का गहन बैलिस्टिक और तकनीकी विश्लेषण किया जाता है, तो कहानी पूरी तरह पलट जाती है। विज्ञान के नियम और हथियारों की क्षमता इस पूरे घटनाक्रम पर एक ऐसा गंभीर संशय खड़ा करते हैं, जो जांच एजेंसियों के दावों की चूलें हिला सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या छत से नीचे खड़ी जीप पर किया गया वह फायर वाकई किसी की जान ले सकता था, या वह सिर्फ हवा में विलीन हो जाने वाली एक बेअसर कोशिश थी ?
दूरी बनाम हथियार की क्षमता: बैलिस्टिक मिसमैच का पहला सुराग
वीडियो साक्ष्य के मुताबिक भरत तिवारी एक ऊंचे मकान की छत पर खड़ा है और नीचे सड़क पर पुलिस की जीप व जवान मौजूद हैं। यदि दावों के आधार पर यह मान लिया जाए कि भरत के हाथ में .32 कैलिबर (7.65 एमएम) की पिस्तौल थी, तो सबसे पहला विरोधाभास दूरी को लेकर आता है। एक मानक .32 कैलिबर पिस्तौल की अधिकतम प्रभावी मारक क्षमता महज 25 से 40 मीटर होती है। वीडियो में दिख रही मकान की ऊर्ध्वाधर ऊंचाई और जीप की कोणीय दूरी का सटीक आकलन करें, तो जीप इस प्रभावी सीमा से काफी दूर खड़ी थी। तकनीकी रूप से इसे ‘आउट ऑफ रेंज फायरिंग’ कहा जाता है, जहां गोली लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही अपनी पूरी गतिज ऊर्जा खो देती है।
छत से फायरिंग तो सड़क पर भगदड़ क्यूं नहीं ?
छत से भरत तिवारी का फायर करना और सामने की सड़क पर कुछ लोगों का‌ बिना भगदड़, छिपने का प्रयास किए चलते-फिरते दिखना विरोधाभासी है। ये इस आशंका को प्रबल करता है कि फायर करने वाला भरत तिवारी या कम से कम सड़क पर मौजूद पुलिस या अन्य लोग इस बात से लेकर ज्यादा खतरा नहीं महसूस कर रहे थे कि भरत तिवारी की मंशा क्या है अथवा उसके हाथ में दिख रही पिस्टल की रेंज कितनी है। हालांकि the sunday views इस पूरे प्रकरण से संबंधित किसी भी फेसबुक लाइव या वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
देसी बैरल की सीमाएं: खौफ का माहौल या जानलेवा हमला ?
भरत तिवारी मामले में दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू उस हथियार की बनावट है। वीडियो में दिख रहा हथियार कोई फैक्ट्री-मेड मिलिट्री ग्रेड पिस्टल नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर निर्मित एक अवैध देसी सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल प्रतीत होती है। इस तरह के अवैध हथियारों की बैरल (नली) में वो वैज्ञानिक ‘ग्रूव्स’ या धारियां नहीं होतीं, जो गोली को हवा को चीरते हुए सीधा तैरने की रफ्तार दे सकें। नतीजा यह होता है कि ऐसी पिस्तौलों की मारक क्षमता घटकर महज 10 से 15 मीटर तक सिमट जाती है। विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, इतनी कम क्षमता वाले हथियार से 40 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित जीप पर निशाना साधना एक ‘विजुअल थ्रेट’ या मनोवैज्ञानिक दबाव (खौफनाक माहौल) बनाने की कोशिश हो सकती है, किसी की जान लेने का प्रभावी प्रयास, इस रेंज और स्थिति में ये संभावना कम ही आंकी जाएगी।
हवा का दबाव और गुरुत्वाकर्षण: रास्ते में ही दम तोड़ चुकी थीं गोलियां ?
जब कोई गोली अपनी प्रभावी रेंज से बाहर दागी जाती है, तो उस पर हवा का घर्षण और गुरुत्वाकर्षण बल हावी हो जाते हैं। यदि दावों के मुताबिक पिस्टल .32 कैलिबर की ही थी तो हल्की गोली (लगभग 71 ग्रेन) वैसे ही लंबी दूरी तय करने के लिए नहीं बनी होती। ऐसे में छत से नीचे की तरफ दागी गई ये गोलियां
ऊंचाई से नीचे फायर करने पर गुरुत्वाकर्षण भले ही गति दे सकता था, लेकिन बैरल की स्थिति और हवा के घर्षण के कारण इतनी कोणीय दूरी (Angular Distance) पर सटीक निशाना लगना लगभग असंभव था। यानी जीप तक पहुंचने से बहुत पहले ही हवा के बहाव के कारण गोलियां अपने रास्ते से भटक जातीं। शायद यही वजह थी कि नीचे मौजूद लोगों में भरत तिवारी की फायरिंग को लेकर कोई भगदड़ जैसी स्थिति नहीं दिख रही थी। ऐसे में क्या उसके फेसबुक लाइव की स्क्रीन पर दिखने वाली आक्रामक फायरिंग  वास्तव में असरदार नहीं थी।
फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार: क्या पुलिस पर किया था जानलेवा हमला ?
अब इस पूरी थ्योरी का दारोमदार फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की बैलिस्टिक रिपोर्ट पर टिक गया है। अदालत और फाॅरेंसिक जांच में सामने अब सबसे पेचीदा सवाल यही होगा कि क्या पुलिस की जीप पर .32 कैलिबर की गोली का कोई वास्तविक डेंट या निशान मिला है? या किसी अन्य कैलिबर (जैसे 9mm जो प्रतिबंधित है, उससे फायर किया गया), हालांकि जानकारों के मुताबिक, यदि हथियार में 9mm बैरल का भी इस्तेमाल हुआ हो, तब भी अवैध निर्मित होने के कारण उच्च गैस प्रेशर लीक होने से इसकी मारक क्षमता बेहद सीमित हो जाती है। लेकिन इस थ्योरी पर पुलिस का बयान ‘क्लोज काॅडनिंग’ यानी धीरे-धीरे नजदीक आते हुए घेराबंदी करना पुलिस के पक्ष में भारी पड़ेगा। यानी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स के जवान अगर भरत तिवारी की पिस्टल की रेंज में धीरे-धीरे आ चुके थे। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अदालत में ये बात साबित हो जाए कि जब पुलिस भरत तिवारी के नजदीक आ चुकी थी, तब उसने हथियार चलाया था, या वो पिस्टल रखकर सरेंडर कर चुका था। लेकिन पुलिस की इस थ्योरी को आलाधिकारियों की कार्रवाई खारिज करती है, चूंकि संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।
एक दिन पहले ‘मानसिक अस्वस्थ’, अगले दिन एनकाउंटर ?
इस मामले में पुलिस के खुद के बयानों में विरोधाभास भी है। 16.6.2026 को पुलिस अधीक्षक भोजपुर (आरा) के कार्यालय जारी प्रेस विज्ञप्ति में भरत तिवारी को ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ लिखा गया है। इसी के अगले दिन यानी 17.6.26 को हुए एनकाउंटर के बाद इसी पुलिस अधीक्षक भोजपुर (आरा) के कार्यालय जारी प्रेस विज्ञप्ति में ‘एक व्यक्ति भरत भूषण तिवारी’ कर घटनाक्रम बताया गया लेकिन ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ जैसी बात इस बयान में कहीं नहीं लिखी गई।
भरत की मां सुमन देवी ने कहा: सरेंडर कर चुका था बेटा
मीडिया को दिए बयान में भरत की मां सुमन देवी ने कहा ‘पुलिस और एसटीएफ की टीम जबरन हमारे घर में घुसी। पहले उन्होंने पूरे परिवार को डराया-धमकाया और मौके से भगा दिया। जब मेरा बेटा फेसबुक लाइव के दौरान पुलिस के सामने अपनी पिस्तौल फेंककर आत्मसमर्पण (Surrender) कर चुका था, तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई? यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या है।’
पुलिस के आला अधिकारी कर रहे माॅनिटरिंग
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने कार्रवाई की है। जारी बयान में कहा गया है कि फेसबुक लाइव वीडियो के वायरल विजुअल्स और शुरुआती प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए, शाहपुर थाना अध्यक्ष (SHO) समेत इस कार्रवाई में शामिल छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
भरत तिवारी के पिता, भाई और सड़क जाम करने वालों पर एफआइआर 
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस पूरे मामले में पुलिस ने एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। इनमें मृतक भरत तिवारी, उसके पिता और भाई को भी नामजद किया गया है। वहीं एनकाउंटर के विरोध में सड़क जाम करने वाले लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है।
हाइकोर्ट में भेजी गई याचिका, न्यायिक जांच की मांग 
भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक ईमेल और पत्र लिखकर याचिका भेजा है। याचिका में अदालत से मामले का स्वतः संज्ञान लेने और एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है।
गांव वालों ने कहा: कोई आपराधिक इतिहास नहीं, सिर्फ समस्याएं उठाता था!
उधर, गांव के ज्यादातर लोग मीडिया को दिए बयानों में यही बात कहते नजर आए कि भरत तिवारी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं था। वह तो पिछले डेढ़ साल से गांव में बाढ़ और मिट्टी कटाव की समस्या को लेकर नेताओं और प्रशासन से हक मांग रहा था। वीडियो में जो फायरिंग दिख रही है, वह सिर्फ दबाव बनाने के लिए थी।

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