पीडि़त भाजपा कार्यकर्ता नावेद मुस्तफा को सपा सभासद का ‘राजनीतिक विरोध’ करना पड़ा महंगा

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दबदबा कायम करने के लिए पुलिस को भ्रमित कर लिखाई गई एफ आईआर

नैमिष प्रताप सिंह

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रेस वार्ता में कानून- व्यवस्था के चौकस होने का दावा करते हैं लेकिन लखनऊ में ही पुलिसिया कार्रवाई पर आये दिन सवाल उठता रहता है। एक मामला लखनऊ में ही पश्चिमी कमिश्नेनट अंतर्गत सआदतगंज थाने का है। समाजसेवी और पूर्व में अयोध्या जनपद की रुदौली विधानसभा से वर्ष 2007 और 2012 में विधानसभा प्रत्याशी रहे नावेद मुस्तफा का एक प्लाट थाना सआदतगंज में आता है ,जहां नाली को लेकर उनका विवाद चल रहा है। ये प्रकरणस्थानीय पुलिस के संज्ञान में भी है।

10 जुलाई को दिन के लगभग साढ़े तीन बजे समाजवादी पार्टी की पार्षद सबा एहसान मंसूरी के पिता व पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद एहसान के लगभग दो दर्जन लोगों के साथ बवाल करने के इरादे से नाली के विवाद की आड़ लेकर खड़े हो गये। हंगामा देख नावेद मुस्तफा ने चौकी इंचार्ज को फोन कर मौके पर बुला लिया और मामला दब गया। नावेद मुस्तफा ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर इस घटना से अवगत कराया है। नावेद मुस्तफा जब अपने प्लाट पर पहुंचे तो उनके साथ बदसलूकी हुई। स्थिति बिगड़ती देख नावेद मुस्तफा ने कानून व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए उन्होंने तत्काल स्थानीय चौकी प्रभारी रोहित सरोज को हंगामे से अवगत कराया। पुलिस की मुश्तैदी से पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद एहसान की रंगबाजी पर रोक लग गई और पीडि़त नावेद मुस्तफा को जान -माल की कोई क्षति नहीं पहुंची। चूंकि मोहम्मद एहसान पार्षद प्रतिनिधि है और इलाक़े के दबंग है इसलिए नावेद मुस्तफा ने इस बवाल को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेज दिया है। इसी बीच मोहम्मद एहसान जब अपनी साजिश में सफल नहीं हो पाया तो उसने एक नया षडय़ंत्र रच डाला। मोहम्मद एहसान ने बोरिंग ठीकेदार रियाज, जिनकी नावेद मुस्तफा से भी जान्र- पहचान है, से नावेद मुस्तफा को 10 जुलाई को ही शाम के सात बजे के आसपास फोन करवाया। फोन पर नावेद और रियाज के मध्य दोपहर को हुए बवाल को लेकर भी बातचीत हुई। फोन पर हुई इस बातचीत दौरान रियाज ने नावेद से मोहम्मद एहसान से बातचीत करने के लिए कहा लेकिन नावेद से इसलिए बात करने से इंकार कर दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मोहम्मद एहसान ने पुलिस के किसी बड़े अफ सर को अत्यंत भ्रामक सूचना देकर 11 जुलाई को सआदत गंज थाने में नावेद मुस्तफा के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट 0160 भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 , 351, 3 के अंतर्गत पंजीकृत करवा दिया।

सवाल बनता है कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट जो प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत करने में इतना हीला- हवाली करती है, उसने 10 जुलाई की सुनियोजित घटना को लेकर इतनी जल्दी एक तरफ ा प्रथम सूचना रिपोर्ट कैसे पंजीकृत कर लिया? वह भी तब जबकि 10 जुलाई को नाली को लेकर विवाद हुआ था, जिसे स्थानीय चौकी प्रभारी ने ही मौके पर पहुंचकर कानून व्यवस्था की स्थिति संभाली थी। इसके अलावा नावेद मुस्तफा के प्लाट पर नाली का विवाद पहले से था, जिसकी जानकारी पुलिस को भी है। अब प्रश्न यह है कि ऐसी स्थिति में जो विवाद सुलझाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, उसे और उलझाने के लिए 10 जुलाई को दो दर्जन लोगों के साथ मोहम्मद एहसान क्यों विवाद की जगह पर गए ? जाहिर है कि मोहम्मद एहसान नाली की विवाद की आड़ में नावेद मुस्तफा को दबाना चाहते थे लेकिन जब उनका जोर- जबरदस्ती नहीं चला तो उन्होंने जैसे- तैसे नावेद मुस्तफा के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत करवाने में सफल रहे।

11 जुलाई को नावेद मुस्तफा के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अम्बरगंज वार्ड की पूर्व पार्षद प्रत्याशी अनीता यादव के पति ओमकार सिंह यादवए वार्ड अध्यक्ष ने भाजपा के समर्थकए कार्यकर्ता नावेद मुस्तफा के पक्ष में न केवल बयान दिया बल्कि सपा पार्षद सबा एहसान मंसूरी के पिता वा पार्षद प्रतिनिधि मोहम्मद एहसान पर बेहद गंभीर आरोप भी लगाए और पुलिस कार्रवाई के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए एक तरफ ा प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखे जाने को भी गलत बताया। भाजपा नेता ओमकार सिंह यादव ने यह भी भरोसा दिलाया कि भाजपा समर्थक, कार्यकर्ता नावेद मुस्तफा के खिलाफ पुलिस को भ्रमित करके जो प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाई गई है , उसको लेकर पुलिस अफ सरों और शासन, सरकार को अवगत कराया जाएगा ताकि नावेद मुस्तफा के खिलाफ कोई भी अन्यायपूर्ण कार्रवाई न हो पाए।

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