लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी सीमाओं में रहकर भूमिका का निर्वहन करना चाहिए : सतीश महाना

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Satish Mahana news: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश की विधायिका को लेकर समाज में बनी नकारात्मक धारणा में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी सीमाओं में रहकर अपनी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के सफलतापूर्वक संपन्न होने के उपरांत मंगलवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए अध्यक्ष महाना ने सत्र की उपलब्धियों और सदन के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि एक समय था जब विधानसभा की कार्यवाही को लेकर आमजन के मन में शंका और निराशा का भाव था, किंतु आज वही सदन गंभीर, सार्थक और परिणामोन्मुखी चर्चाओं का केंद्र बन चुका है। सतीश महाना ने कहा कि 18वीं विधानसभा ने लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजते हुए नवाचार, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक को अपनाकर कार्यसंस्कृति में व्यापक सुधार किया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा अब केवल एक ऐतिहासिक भवन नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व, अनुशासन और जन-आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बन चुकी है। इन सुधारात्मक प्रयासों के कारण प्रदेश की विधानसभा को देश की अग्रणी विधानसभाओं में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि बजट सत्र अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण, विचारोत्तेजक और परिणामोन्मुखी रहा। वित्तीय वर्ष के बजट पर विस्तृत, गंभीर और सारगर्भित चर्चा की गई। विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर क्रमबद्ध विचार-विमर्श हुआ तथा जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन की स्वीकृति प्राप्त हुई। प्रश्नकाल के माध्यम से शासन-प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित की गई, जबकि शून्यकाल में जनसरोकार के विविध विषय प्रभावी ढंग से उठाए गए। इससे स्पष्ट है कि सदन जनता की आवाज को सरकार तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

विधान सभा अध्यक्ष ने संतोष व्यक्त किया कि पूरे सत्र के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों ने संसदीय मर्यादाओं का सम्मान किया। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक अंग हैं, किंतु संवाद, संयम और शालीनता उसकी मूल आत्मा हैं। इस सत्र में स्वस्थ बहस, तार्किक प्रतिपादन और सकारात्मक सहभागिता देखने को मिली, जो प्रदेश की संसदीय परंपराओं के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक है। विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा विधानसभा के बदलते स्वरूप की सराहना भी की गई।

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए अध्यक्ष ने मीडिया प्रतिनिधियों का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की सकारात्मक छवि को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अंत में उन्होंने सभी सदस्यों, संसदीय कार्य मंत्री, नेता प्रतिपक्ष तथा विभिन्न दलों के नेताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सदन की गरिमा, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सर्वोपरि रखते हुए भविष्य में भी स्वस्थ और सार्थक संवाद की परंपरा को और सुदृढ़ किया जाएगा।

बजट सत्र में 72 घंटे 45 मिनट स्थगन रहित चली यूपी विधानसभा

विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि बजट सत्र 09 फरवरी से 20 फरवरी तक संचालित हुआ। सत्र के उपरांत विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि सत्र के दौरान कुल 10 उपवेशन संपन्न हुए। कुल समयावधि 75 घंटे 08 मिनट रही। स्थगन की समयावधि 02 घंटे 23 मिनट रही, जबकि 72 घंटे 45 मिनट कार्यवाही स्थगन रहित चली। उन्होंने कहा कि सदन में सार्थक चर्चा, सकारात्मक संवाद और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन सुनिश्चित किया गया। नियम-300 के अंतर्गत कुल 16 सूचनाएं प्राप्त हुईं। उनमें से 13 स्वीकार की गईं तथा 03 अग्राह्य की गईं।

वहीं नियम-301 के तहत कुल 694 सूचनाएं प्राप्त हुईं। उनमें 358 स्वीकृत तथा 336 अस्वीकृत की गईं। सत्र के दौरान कुल 2427 प्रश्न प्राप्त हुए। उनमें से 2322 प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए, जो कुल प्रश्नों का लगभग 95.67 प्रतिशत है। प्राप्त प्रश्नों में 490 तारांकित, 1466 अतारांकित, 120 अल्पसूचित तथा 838 निजी सदस्यों से संबंधित प्रश्न सम्मिलित हैं। नियम-56 के अंतर्गत 62 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें 16 को चर्चा हेतु स्वीकृत किया गया तथा 03 को शासन द्वारा स्वीकार किया गया।  याचिका समिति के समक्ष सत्र अवधि में कुल 999 याचिकाएं प्राप्त हुईं, जिनमें 826 ग्राह्य, 48 अग्राह्य तथा 125 याचिकाएं व्यपगत की गईं।

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